दुश्मन के घर से बंधकों को छुड़ा लाई थी मोसाद, पढ़ें इजराइल के 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' की कहानी
Operation Thunderbolt: आधुनिक इतिहास के सबसे मुश्किल और साहसिक बंधक बचाव अभियानों में से एक ऑपरेशन थंडरबोल्ट है. आइए जानते हैं इस मिशन के बारे में पूरी जानकारी.

- 27 जून 1976 को एयर फ्रांस विमान को अपहृत किया गया।
- युगांडा में बंधकों को रखकर साथियों की रिहाई मांगी गई।
- इजरायल ने खुफिया जानकारी से एंटेबे में सैन्य ऑपरेशन किया।
- ऑपरेशन में 102 बंधक बचे, कमांडर नेतन्याहू शहीद हुए।
Operation Thunderbolt: ऑपरेशन थंडरबोल्ट को एंटेबे रेड के नाम से भी जाना जाता है. यह आधुनिक इतिहास के सबसे साहसी बंधक बचाव अभियानों में से एक माना जाता है. 4 जुलाई 1976 को इजरायली सेना ने मोसाद से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर इजरायल से लगभग 4000 किलोमीटर दूर युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे पर एक लंबी दूरी का ऑपरेशन चलाया.
यह मिशन और फ्रांस के एक विमान के अपहरण और 100 से ज्यादा इजरायली और यहूदी यात्रियों को बंधक बनाए जाने के बाद शुरू हुआ था. आखिरकार इजरायली सेना ने बंधकों को बचाया और उन्हें इजरायल वापस ले आई.
एयर फ्रांस के विमान का अपहरण कैसे हुआ?
यह संकट 27 जून 1976 को शुरू हुआ. एयर फ्रांस की फ्लाइट 139 तेल अवीव से पेरिस जा रही थी. एथेंस में रुकने के बाद चार आतंकवादियों दो फिलिस्तीन और दो जर्मन ने विमान का अपहरण कर लिया.
अपहरणकर्ताओं ने विमान का रुख युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे की तरफ मोड़ दिया. उस समय युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन अपहरण करता हूं का खुलेआम समर्थन करने और उन्हें मदद देने का आरोप लगा था.
विमान के एंटेबे पहुंचने के बाद गैर-यहूदी यात्रियों को छोड़ दिया गया. हालांकि 100 से ज्यादा इजरायली और यहूदी यात्रियों को एक पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग के अंदर बंधक बनाकर रखा गया. अपहरणकर्ताओं ने इजरायल और दूसरी जगहों पर कैद अपने साथियों को रिहा करने की मांग की और धमकी दी कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे बंधकों को मार डालेंगे.

इजरायल ने खुफिया जानकारी कैसे जुटाई?
जब बातचीत सार्वजनिक रूप से चल रही थी तब इजरायली अधिकारी एक संभावित सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे थे. मोसाद और इजरायली सेना ने हवाई अड्डे और बंधकों की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई. रिहा किए गए यात्रियों ने टर्मिनल, अपहर्ताओं और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जरूरी जानकारी दी.
एक और अनोखा फायदा यह था कि एंटेबे की पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग कथित तौर पर एक इजरायली कंपनी ने बनाई थी. इससे इजरायली योजनाकारों को ऐसी जानकारी मिल गई जिससे उन्हें इमारत की संरचना और लेआउट को समझने में मदद मिली.

काली मर्सिडीज का धोखा
3 जुलाई की रात को चार इजरायली C-130 हरक्यूलिस विमान एंटेबे की तरफ बढ़े. ऐसा बताया जाता है कि पकड़े जाने की संभावना को कम करने के लिए विमान काफी कम ऊंचाई पर उड़े थे. इजरायली कमांडो ने इदी अमीन के आधिकारिक काफिले जैसा दिखने का फायदा उठाने की भी कोशिश की है. वे एक काली मर्सिडीज़ और उसके साथ लैंड रोवर गाड़ियां लाए और कुछ जवानों को युगांडा की सेना की वर्दी पहनाई.
योजना यह थी कि टर्मिनल के पास ऐसे पहुंचा जाए जैसे वे युगांडा के नेताओं के काफिले का हिस्सा हों. हालांकि यह चाल पूरी तरह कामयाब नहीं हुई. युगांडा के कुछ पहरेदारों को शक हो गया. इससे कमांडो के टर्मिनल के पास पहुंचते ही गोलीबारी शुरू हो गई.
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90 मिनट का रेस्क्यू ऑपरेशन
इजरायली कमांडो ने उस टर्मिनल पर धावा बोल दिया जहां बंधकों को रखा गया था. इस मुठभेड़ में सभी सात अपहरणकर्ता मारे गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस लड़ाई में युगांडा के लगभग 45 सैनिक भी मारे गए. इसके अलावा इजरायली सेना ने हवाई अड्डे पर खड़े युगांडा के मिग लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया ताकि उनका इस्तेमाल वहां से निकल रहे रेस्क्यू विमान का पीछा करने के लिए ना किया जा सके. पूरा ऑपरेशन लगभग 90 मिनट में पूरा हो गया. इससे इजरायली सेना बचाए गए बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाल सकी.
कितने बंधकों को बचाया गया?
इस ऑपरेशन में 102 बंधकों को सफलतापूर्वक बचाया गया और उन्हें वापस इजरायल ले जाया गया. हालांकि इस मिशन में इजरायली सेना को भारी कीमत चुकानी पड़ी. ऑपरेशन के ग्राउंड कमांडर योनातन नेतन्याहू लड़ाई के दौरान मारे गए. योनातन नेतन्याहू बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे.
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