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सत्यपाल मलिक को कितनी मिलती थी पेंशन, जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल को मिलती थीं इतनी सारी सुविधाएं?

Satyapal Malik Passed Away: जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का लंबी बीमारी की वजह से निधन हो गया है. चलिए जानें कि पूर्व राज्यपाल को कितनी सुविधाएं और पेंशन सरकार की तरफ से मिलती थी.

Satyapal Malik Passed Away: जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है. लंबे वक्त से उनका दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन उनको बचाया नहीं जा सका. वे जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों में गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे. सत्यपाल मलिक ने सांसद से लेकर गवर्नर तक का पद तय किया था. वे आखिरी के कुछ सालों में भाजपा के साथ जुड़े और कई राज्यों के गवर्नर पर रहे थे. उन पर जम्मू कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का आरोप लगा था. चलिए जानें कि पूर्व राज्यपाल को कितनी पेंशन मिलती है और सत्यपाल मलिक को कितनी सुविधाएं दी जाती थीं.

गवर्नर की सुविधाएं और सैलरी

जब गवर्नर अपने पद पर होते हैं, तो उस वक्त उनको बहुत अच्छी सैलरी और सुविधाएं दी जाती हैं. उनकी सैलरी 3.5 लाख रुपये महीने के आसपास होती है. गवर्नर को पद पर रहते हुए शानदार सरकारी आवास और लंबा-चौड़ा स्टाफ मिलता है. राष्ट्रपति के बाद अगर किसी को इतनी सुविधाएं और सैलरी मिलती हैं, तो वे राज्पाल ही होते हैं. उनको अपना आवास सजाने से लेकर टेलीफोन और यात्रा भत्ता भी दिया जाता है. लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद क्या सुविधाएं रह जाती हैं.

रिटायमेंट के बाद पेंशन और सुविाएं

गवर्नर पद पर रहते हुए तो उनको खूब सुविधाएं और अच्छी सैलरी मिलती है, लेकिन जब वे रिटायर हो जाते हैं तो न तो कोई सरकारी आवास मिलता है और न ही कोई पेंशन या भत्ते जैसी सुविधा मिलती है. स्वास्थ्य खराब होने की स्थिति में उनका पूरा खर्चा सरकार उठाती है, लेकिन इसके अलावा जो भी खर्चे होते हैं, वे उनको खुद ही करने होते हैं. 1982 के अधिनियम के अनुसार राज्यपालों को पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है.

गवर्नर को क्यों नहीं मिलती पेंशन और सुविधाएं

10 दिसंबर 2012 को लोकसभा में तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने द गवर्नर्स एमेडमेंट बिल पेश किया था. इसमें कुछ सुविधाओं के लिए राज्यपाल को प्रति माह 1,10,000 रुपये देने का प्रावधान किया गया था, जबकि पूर्व राज्यपाल को सिर्फ चिकित्सा सुविधा के लिए हकदार माना गया था. इस बिल में राज्यपाल को ताउम्र एक कार्यालय सहायक देने का प्रावधान किया गया था, जिसका वेतन 25 हजार रुपये महीना होता है. 

साल 2008 में केंद्र सरकार ने राज्यपालों को पेंशन दिए जाने के मामले की कोशिश की थी, लेकिन ये आगे ही नहीं बढ़ पाया और मामला वहीं पर ठप हो गया था. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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