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महज 15 हजार रुपये में आप भी लड़ सकते हैं उपराष्ट्रपति का चुनाव, जान लें भारतीय संविधान का यह नियम

Vice President Elections: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. चलिए जानें कि उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है और क्या कोई भी 15000 रुपये देकर यह चुनाव लड़ सकता है.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए बीते दिन अचानक उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया है. धनखड़ ने उस समय इस्तीफा दिया है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर उपराष्ट्रपति का चुनाव किस तरीके से लड़ा जाता है. भारत में उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं, ऐसे में अगर किसी भी वजह से राष्ट्रपति का पद खाली होता है तो उपराष्ट्रपति उसकी जिम्मेदारी संभालते हैं. लेकिन जब उपराष्ट्रपति का पद खाली होता है तो उस पर कैसे चुनाव कराया जाता है. क्या सिर्फ 15,000 रुपये में कोई भी उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकता है. चलिए जानें कि क्या कहता है भारतीय संविधान का नियम.

इस्तीफे के कितने दिन बाद होता है चुनाव

संविधान के नियम के अनुसार 60 दिनों के अंदर उपराष्ट्रपति का चुनाव कराना होता है. तब तक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा की जिम्मेदारी देखेंगे. अगले उपराष्ट्रपति के लिए बहुत चर्चा चल रही है, लेकिन अभी कोई नाम तय नहीं पाया है. 

उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्यता

 इस पद के लिए उसी व्यक्ति का चुनाव किया जा सकता है, जो कि भारत का नागरिक हो और 35 साल की उम्र पूरी कर चुका हो. वो राज्यसभा का निर्वाचित सदस्य होने के लिए अर्हित है. इसके अलावा वो भारत सरकार के किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अधीनस्थ स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कोई लाभ का पद धारण करने वाला व्यक्ति न हो.

कैसे होता है चुनाव और 15000 में कैसे कोई भी चुनाव लड़ सकता है

  • भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत होता है. यह एक पारदर्शी और गुप्त मतदान की प्रक्रिया होती है.
  • इसके लिए निर्वाचक मंडल का गठन किया जाता है. इसमें संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद वोट डालते हैं. हर सांसद के वोट का मूल्य बराबर होता है. 
  • उम्मीदवार को 20 सांसदों का प्रस्तावक और 20 के समर्थन की जरूरत होती है. इसके साथ ही 15,000 रुपये की जमानत राशि जमा की जाती है, जो कि ⅙ वोट न मिलने पर जब्त भी हो सकती है. 
  • इसके बाद निर्वाचन आयोग भारत सरकार के परामर्श से लोकसभा या राज्यसभा के महासचिव को रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्त करता है. यही अधिकारी चुनाव की तारीख और प्रक्रिया की घोषणा करता है.
  • संसद भवन में गुप्त मतदान होता है, जिसमें वोटर अपनी पसंद के कैंडिटेट को चुनते हैं और प्राथमिकता के आधार पर नंबर देते हैं. यह सिंगल ट्रांसफर वोट होता है. 
  • फिर वोटों की गिनती तय करने के लिए एक कोटा बनाया जाता है. किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 394 वोट की जरूरत होती है. 
  • इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर गिनती की जाती है, फिर परिणाम की घोषणा की जाती है और जो जीतता है, वो उपराष्ट्रपति के पद के लिए शपथ लेता है.

यह भी पढ़ें: इस्तीफा देने के बाद भी जगदीप धनखड़ जिएंगे लग्जरी लाइफ, पूर्व उपराष्ट्रपति को मिलती हैं इतनी सुविधाएं

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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