Oil Crisis Impact: पूरी दुनिया में तेल किल्लत हुई तो भी इस देश पर नहीं पड़ेगा असर, बिना ईंधन भी नहीं होगी परेशानी
Oil Crisis Impact: इस वक्त मिडिल ईस्ट भारी तनाव से जूझ रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि वह कौन सा देश है जिस पर वैश्विक तेल संकट का असर बिल्कुल नहीं पड़ेगा.

Oil Crisis Impact: जैसे-जैसे ईरान में तनाव बढ़ रहा है दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. ईंधन आयात पर काफी ज्यादा निर्भर देश जैसे कि भारत को बढ़ती अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है. दिलचस्प बात यह है कि एक ऐसा देश भी है जहां दुनिया भर में तेल की कमी का झटका शायद ही महसूस होगा. यह देश है आइसलैंड. इसे अक्सर दुनिया का सबसे ऊर्जा-स्वतंत्र देश बताया जाता है.
प्रकृति से चलने वाला देश
आइसलैंड अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% से 90% हिस्सा बिना जीवाश्म ईंधन वाले स्रोतों से पूरा करता है. यह शानदार उपलब्धि काफी हद तक इसकी अनोखी भौगोलिक बनावट की वजह से है. यहां जियोथर्मल और हाइड्रो पावर संसाधन भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं. इस देश के ऊर्जा मॉडल को अक्सर भविष्य के लिए एक मिसाल के तौर पर देखा जाता है.
जियोथर्मल ऊर्जा
आइसलैंड की ऊर्जा स्वतंत्रता में सबसे बड़ा योगदान जियोथर्मल ऊर्जा का है. अपने ज्वालामुखी वाले भूभाग की वजह से यह देश बिजली बनाने और घरों को गर्म रखने के लिए जमीन के नीचे की गर्मी का इस्तेमाल करता है. आइसलैंड की लगभग 65% ऊर्जा जियोथर्मल स्रोतों से आती है. इसका मतलब है कि घरों को गर्म रखने, पानी की सप्लाई करने और यहां तक कि उद्योगों को चलाने के लिए भी तेल या फिर गैस पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है.
हाइड्रोपावर से पूरी होती है ऊर्जा की जरूरत
आइसलैंड अपनी 20% से 25% ऊर्जा हाइड्रोपावर से बनाता है. ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियां और झरने बिजली का एक लगातार और रिन्यूएबल स्रोत उपलब्ध कराते हैं.
नागरिकों के लिए बिजली की काफी कम लागत
क्योंकि यह ऊर्जा स्रोत प्रकृति में भरपूर मात्रा में मौजूद हैं इस वजह से आइसलैंड में बिजली काफी सस्ती है. कई मामलों में इसकी लागत इतनी कम होती है कि दुनिया के मानकों के मुकाबले यह लगभग ना के बराबर ही लगती है. इससे ना सिर्फ आम घरों को फायदा होता है बल्कि ऊर्जा की ज्यादा खपत करने वाले उद्योग भी इस देश की तरफ आकर्षित होते हैं.
परिवहन के क्षेत्र में तेल से आगे बढ़ते कदम
जहां ज्यादातर देश अभी भी परिवहन के लिए पेट्रोल और डीजल पर ही निर्भर हैं वही आइसलैंड तेजी से इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों की तरफ बढ़ रहा है. गाड़ी, मछली पकड़ने वाली नांव और यहां तक की जहाज से जुड़े कुछ हिस्सों को भी बिजली से चलाने के प्रयास जोर-शोर से चल रहे हैं.
हालांकि आइसलैंड सबसे अलग दिखता है लेकिन वह पूरी तरह से अकेला नहीं है. नॉर्वे, स्वीडन, पैराग्वे और कोस्टा रिका जैसे देश भी अपनी लगभग सारी बिजली रिन्यूएबल स्रोतों से ही बनाते हैं.
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Source: IOCL

























