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क्या पाकिस्तान में भी मिलता है E20, वहां की सरकार एथेनॉल पर क्या कर रही?

Pakistan E20: भारत में एथेनॉल वाले ईंधन को लेकर चर्चा चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में भी E20 पेट्रोल मिलता है या फिर नहीं.

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  • पाकिस्तान में E20 पेट्रोल उपलब्ध नहीं, E10 भी कम है।
  • सरकार ने पुरानी गाड़ियों के लिए E5 ब्लेंडिंग का प्रस्ताव दिया।
  • पाकिस्तान एथेनॉल का बड़ा उत्पादक, घरेलू उपयोग बढ़ाने पर विचार।
  • पूर्व E10 पायलट कार्यक्रम विफल रहा, जिससे सावधानी बरती जा रही।

Pakistan E20: जब भी कोई गाड़ी चलाने वाला पेट्रोल भरवाने पेट्रोल पंप जाता है तो वह सबसे पहले कीमत को ही देखता है. लेकिन अब पेट्रोल में क्या-क्या मिला है यह भी एक बड़ा मुद्दा बन चुका है. खासकर एथेनॉल मिला हुआ इंधन इस्तेमाल करने का चलन बढ़ने के साथ. भारत ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने, विदेशी मुद्रा को बचाने और साथ ही कृषि उत्पादों की अतिरिक्त मांग को पैदा करने के लिए E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर पड़ोसी देश में क्या हो रहा है? क्या पाकिस्तान में E20 पेट्रोल मिलता है? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब.

पाकिस्तान में E20 पेट्रोल

पाकिस्तान अभी भी अपने आम पेट्रोल पंप पर E20 पेट्रोल नहीं देता है. देश के मौजूदा नियमों के मुताबिक 10% तक के एथेनॉल मिलने की इजाजत है जिसे E10 कहा जाता है. लेकिन यह भी आम ग्राहकों के लिए आसानी से मौजूद नहीं है. पाकिस्तान में बिकने वाला स्टैंडर्ड पेट्रोल आमतौर पर बिना मिलावट वाला पेट्रोल होता है. 

भारत के उलट पाकिस्तान ने पूरे देश में अनिवार्य एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम नहीं अपनाया है. इसके बजाय सरकार ज्यादा सावधानी भरा तरीका अपना रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि उसे गाड़ियों के अनुकूल होने, इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू स्तर पर एथेनॉल के इस्तेमाल के कमर्शियल फायदे को लेकर चिंता है. 


क्या पाकिस्तान में भी मिलता है E20, वहां की सरकार एथेनॉल पर क्या कर रही?

पाकिस्तान स्वैच्छिक E5 ब्लेंडिंग पर विचार कर रहा है 

शाहबाज शरीफ सरकार की बनाई एक हाई लेवल कमिटी ने पेट्रोल में 5% एथेनॉल ब्लेंडिंग यानी कि E5 शुरू करने की सिफारिश की है. इस कमेटी के प्रमुख पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक थे. यह प्रस्ताव भारत के E20 प्रोग्राम की तुलना में काफी कम महत्वाकांक्षी है. सिफारिश के तहत इसे लागू करने से पहले तेल मार्केटिंग कंपनियां सलाह देंगी और साथ ही कमर्शियल फायदे और तकनीकी पहलुओं को भी समझा जाएगा. 

पाकिस्तान बनता है एथेनॉल 

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान में एथेनॉल का एक काफी बड़ा उद्योग है. देश हर साल लगभग चार लाख से 4,50,000 टन एथेनॉल का उत्पादन करता है. यह मुख्य रूप से गन्ने के शीरे से बनता है. हालांकि घरेलू स्तर पर ब्लेंडिंग की कोई मजबूत नीति न होने की वजह से उत्पादकों ने अपना ज्यादातर एथेनॉल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचने को प्राथमिकता दी है. वहां उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है. यही वजह है कि पाकिस्तान में एथेनॉल बनाने की क्षमता तो है लेकिन उसने इसके लिए भारत जैसा घरेलू इंधन बाजार विकसित नहीं किया है.  यही वजह है कि सरकारी इस बात पर विचार कर रही है कि क्या एथेनॉल को निर्यात करने के बजाय घरेलू स्तर पर ज्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहिए.


क्या पाकिस्तान में भी मिलता है E20, वहां की सरकार एथेनॉल पर क्या कर रही?

पाकिस्तान सावधानी क्यों बरत रहा है?

सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है देश में पुरानी गाड़ियों का बड़ी संख्या में होना. सरकार और ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियां पुरानी गाड़ियों और दो पहिया वाहनों में एथेनॉल मिश्रित इंधनों के इस्तेमाल को लेकर चिंतित हैं. 

आम पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल का कुछ ईंधन प्रणाली और पुर्जों पर अलग-अलग असर पड़ सकता है. पाकिस्तान की सड़कों पर लाखों पुरानी मोटरसाइकिल, गाड़ियां और ऑटो रिक्शा हैं. इसलिए अधिकारी बिना यह पक्का किया कि यह गाड़ियां उनके अनुकूल हैं या फिर नहीं एथेनॉल के ज्यादा मिश्रण वाले ईंधन को लाने से हिचकिचा रहे हैं.

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पाकिस्तान ने पहले भी E10 आजमाया था 

एथेनॉल मिश्रण को लेकर पाकिस्तान का प्रयोग पूरी तरह से नया नहीं है. 2010 और 2012 के बीच पाकिस्तान स्टेट तेल ने एक E10 पायलट प्रोग्राम शुरू किया था. लेकिन एथेनॉल की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी लागत और दूसरी व्यावहारिक दिक्कतों की वजह से इस पहल को आखिरकार बंद कर दिया गया था. सरकार अब इस बात पर विचार कर रही है कि क्या नए मिश्रण प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए एक नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा सकता है या फिर नहीं. यही वजह है कि पाकिस्तान अभी तुरंत E20 की तरफ बढ़ने के बजाय एक मामूली E5 फ्रेमवर्क पर विचार कर रहा है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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