चांद पर कितना होगा इंसान का वजन, वहां गुरुत्वाकर्षण कितना अलग?
पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा पर इंसान का वजन करीब 6 गुना कम हो जाता है, वहां का गुरुत्वाकर्षण बल धरती से 16.6 प्रतिशत ही है, जिससे 60 किलो का व्यक्ति चांद पर कदम रखते ही महज 10 kg का महसूस होगा.

अंतरिक्ष यात्रियों की चांद पर उछल-उछलकर चलने वाली तस्वीरें और वीडियो देखकर अक्सर यह सवाल मन में आता है कि आखिर चांद पर इंसान का वजन कितना कम हो जाता है और वहां गुरुत्वाकर्षण धरती से इतना अलग क्यों है. दरअसल किसी भी ग्रह या उपग्रह पर गुरुत्वाकर्षण उसके द्रव्यमान यानी मास पर निर्भर करता है, और चांद का द्रव्यमान धरती के मुकाबले काफी कम है, इसी वजह से वहां का गुरुत्वाकर्षण बल भी धरती से बहुत कमजोर पड़ जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर चांद पर इंसान का वजन कितना रह जाएगा और यह पूरा गणित काम कैसे करता है.
क्यों कम है चांद का गुरुत्वाकर्षण?
किसी भी पिंड का गुरुत्वाकर्षण बल उसके द्रव्यमान और आकार पर निर्भर करता है. धरती का व्यास चांद के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा है, और धरती का द्रव्यमान भी चांद से कहीं ज्यादा है. जितना बड़ा और भारी कोई खगोलीय पिंड होगा, उसका गुरुत्वाकर्षण बल भी उतना ही ज्यादा होगा. चूंकि चांद धरती के मुकाबले बहुत छोटा और हल्का है, इसलिए उसका गुरुत्वाकर्षण बल भी काफी कमजोर है.
धरती के मुकाबले कितना कम है चांद का गुरुत्वाकर्षण?
धरती पर गुरुत्वाकर्षण बल करीब 9.8 मीटर प्रति सेकेंड वर्ग होता है, जबकि चांद पर यह सिर्फ करीब 1.62 मीटर प्रति सेकेंड वर्ग है. यानी चांद का गुरुत्वाकर्षण धरती के गुरुत्वाकर्षण का करीब छठा हिस्सा यानी 1/6 ही है. इसी वजह से चांद पर कोई भी चीज धरती के मुकाबले बहुत हल्की महसूस होती है, और वहां चीजें धीरे-धीरे नीचे गिरती हैं.
चांद पर कितना रह जाएगा वजन?
वजन और द्रव्यमान में एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है. द्रव्यमान यानी मास हमेशा एक जैसा रहता है, चाहे इंसान धरती पर हो या चांद पर, लेकिन वजन गुरुत्वाकर्षण बल के हिसाब से बदल जाता है. अगर धरती पर किसी व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है, तो चांद पर वही व्यक्ति का वजन घटकर करीब 10 किलोग्राम के आसपास रह जाएगा, क्योंकि चांद का गुरुत्वाकर्षण धरती का सिर्फ छठा हिस्सा है. यही वजह है कि अंतरिक्ष यात्री चांद पर बेहद हल्का महसूस करते हैं और सामान्य चलने के बजाय उछलकर चलते नजर आते हैं.
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शरीर पर क्या और असर पड़ता है?
कमजोर गुरुत्वाकर्षण का असर सिर्फ चलने-फिरने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे मांसपेशियों और हड्डियों पर भी असर पड़ता है. धरती पर हमारा शरीर हर पल गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ काम करता रहता है, जिससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं.
लेकिन चांद जैसी कम गुरुत्वाकर्षण वाली जगह पर लंबे समय तक रहने से हड्डियों का घनत्व और मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है, इसी वजह से एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष मिशन के दौरान नियमित एक्सरसाइज करनी पड़ती है, ताकि उनका शरीर मजबूत बना रहे.
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