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आदि कैलाश, ओम पर्वत का रजिस्ट्रेशन कैसे होता है? किन-किन लोगों को मिलती है जाने की परमिशन

Adi Kailash Yatra: उत्तराखंड में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा शुरू हो चुकी है. चलिए आपको बताते हैं आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए कैसे करना होता है रजिस्ट्रेशन. क्या होती है पूरी प्रक्रिया.

Adi Kailash Yatra: भारत में बहुत सी धार्मिक जगह है जहां श्रद्धालु लाखों की संख्या में दर्शन करने जाते हैं. उत्तराखंड में भी ऐसे ही कई जगहें है. जहां श्रद्धालियों का तांता लगा रहता है. मैं का महीना चल रहा है और ऐसे में उत्तराखंड में मौजूद आदि कैलाश पर्वत और ओम पर्वत की यात्रा शुरू हो चुकी है. 

इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुके हैं. आज यानी 13 मई को सोमवार के दिन आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए 19 यात्रियों का पहला दस्ता रवाना हो चुका है. चलिए आपको बताते हैं आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए कैसे करना होता रजिस्ट्रेशन और किन-किन लोगों को मिलती है इसके लिए परमिशन. 

इस तरह करें यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा शुरू हो चुकी है. आदि कैलाश को भगवान शिव का घर कहा जाता है. पौराणिक हिंदू ग्रंथों के अनुसार आदि कैलाश पंच कैलाशों में से एक माना गया है. इसीलिए इसकी यात्रा का महत्व काफी होता है. आदि कैलाश की यात्रा का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आपको कुमाऊं मंडल विकास निगम के जरिए आवेदन भरना होता है. 

सबसे पहले आपको यात्रा के लिए फॉर्म भरना होता है. उसके साथ आपको पुलिस वेरीफिकेशन सर्टिफिकेट और अधिसूचित क्षेत्र परमिट, मेडिकल क्लीयरेंस सर्टिफिकेट और इंडिमनिटी बॉन्ड यात्रा की तय रकम के साथ जमा करना होता है. यह फॉर्म आपको दो साइड में भरने होते हैं. 

इसके साथ ही इन्फॉर्म और बाकी दस्तावेजों को crckmvn@gmail.com इस मेल आईडी पर मेल भी करना होता है. उसके बाद प्रबंधक, केंद्रीय आरक्षण केंद्र ओक पार्क हाउस मल्लीताल नैनीताल, उत्तराखंड -263001मोबाइल नंबर 8650002520. इस पते पर डाक द्वारा फॉर्म भेजना होता है. 

मेडिकल अनफिट लोग नहीं जा सकते

आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा हाई एल्टीट्यूड की यात्रा होती है. इसलिए इस यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं का मेडिकल फिट होना अनिवार्य है. इसके लिए मेडिकल क्लीयरेंस सर्टिफिकेट भी जमा करना होता है. अगर किसी को किसी प्रकार की कोई बीमारी है या ऊंचाई पर जाने से डर लगता है. तो वह लोग इस यात्रा में हिस्सा नहीं ले सकते. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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