एक्सप्लोरर

CRPF सिक्योरिटी से कितना मजबूत होता है Z+ सुरक्षा कवच, दोनों में कितना अंतर?

हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर कई बदलाव देखने को मिले. उन्हें CRPF की Z कैटेगरी सिक्योरिटी दी गई, फिर वापस ले ली गई और बाद में Z+ सुरक्षा दी गई.

भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में नेताओं, बड़े अधिकारियों, जजों और अन्य खास लोगों की सुरक्षा एक अहम मुद्दा है. कुछ लोगों को अपने पद, फैसलों या सामाजिक भूमिका के कारण जान का खतरा ज्यादा होता है. ऐसे में केंद्र सरकार और खुफिया एजेंसियां समय-समय पर उनके खतरे का आंकलन करती हैं कि उन्हें किस स्तर की सुरक्षा दी जाए. इसी प्रक्रिया के तहत देश में VIP सिक्योरिटी को पांच मुख्य कैटेगिरी में बांटा गया है, जिसमें  X, Y, Y+, Z और Z+ सुरक्षा शामिल है. इनमें Z और Z+ सबसे हाई लेवल की सुरक्षा कैटिगिरी है.

हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर कई बदलाव देखने को मिले. उन्हें CRPF की Z कैटेगरी सिक्योरिटी दी गई, फिर वापस ले ली गई और बाद में Z+ सुरक्षा दी गई. ऐसे में CRPF सिक्योरिटी के लेकर Z+ तक की सुरक्षा अब चर्चा का विषय बन गए हैं और लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि CRPF सिक्योरिटी से Z+ सुरक्षा कवच कितना मजबूत होता है और दोनों में कितना अंतर है. 

Z+ सुरक्षा क्या है और कितनी मजबूत होती है?

Z+ सुरक्षा भारत में VIP के लिए सबसे मजबूत सुरक्षा मानी जाती है. इस स्तर की सुरक्षा जिस व्यक्ति को मिलती है, उसे देश के सबसे हाई रिस्क जोन में माना जाता है. इस सुरक्षा में 55 से 58 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, इनमें से 10-12 NSG कमांडो होते हैं, साथ ही 24x7 सुरक्षा मिलती है. इसमें बुलेटप्रूफ गाड़ी, पायलट व्हीकल और स्काउट कारें मिलती है. हर कमांडो अत्याधुनिक हथियार और संचार सिस्टम से लैस होते हैं. हर कदम पर हाई लेवल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल होता है. 

CRPF सिक्योरिटी यानी Z सुरक्षा क्या होती है?

Z सुरक्षा भी एक हाई लेवल की सुरक्षा है, लेकिन Z+ से थोड़ी कम. यह उन लोगों को दी जाती है, जिन्हें मीडियम से हाई लेवल का खतरा होता है, लेकिन जानलेवा खतरा नहीं होता है. Z सुरक्षा में करीब 22 सुरक्षाकर्मी होते हैं, जिसमें 4 से 6 NSG या CRPF कमांडो शामिल हैं. इसमें सुरक्षा में लगे जवान ज्यादातर CRPF, दिल्ली पुलिस या ITBP से होते हैं. Z श्रेणी की सुरक्षा आम तौर पर उन लोगों को दी जाती है, जिन्हें किसी विशेष आंदोलन, केस या सामाजिक मुद्दे के कारण खतरा होता है. 

Z और Z+ सुरक्षा में मुख्य अंतर क्या है?

Z सुरक्षा में 22 जवान होते हैं, जबकि Z+ में 55 से 58 तक सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, वहीं Z में 4-6 कमांडो होते हैं, Z+ में 10-12 NSG के ब्लैक कैट कमांडो शामिल होते हैं. इसके अलावा Z सुरक्षा CRPF, ITBP या दिल्ली पुलिस देती है, जबकि Z+ में CRPF के साथ भी शामिल होती है. Z सुरक्षा में 1-2 सामान्य गाड़ियां मिलती हैं, तो Z+ में बुलेटप्रूफ कार, स्काउट और पायलट वाहन होते हैं. Z में 4-6 PSO होते हैं, लेकिन Z+ में 10-12 PSO हर समय साथ रहते हैं. Z सुरक्षा खास मौकों तक सीमित होती है, वहीं Z+ में हर समय, हर स्थान पर सुरक्षा रहती है. Z सुरक्षा मीडियम से हाई खतरे वालों को दी जाती है, जबकि Z+ सुरक्षा हाई से एक्स्ट्रीम खतरे वालों के लिए होती िहै. 

यह भी पढ़ें : भारत के किस राज्य की विधानसभा है सबसे बड़ी? बिल्डिंग के साइज के हिसाब से जान लें आंकड़ा

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

इस देश के पास है दुनिया का सबसे खतरनाक टैंक, आधुनिक युद्ध में यह कितना सफल?
इस देश के पास है दुनिया का सबसे खतरनाक टैंक, ‌आधुनिक युद्ध में यह कितना सफल?
हुस्न की आड़ में करती थी जासूसी, फिर यूं बेनकाब हुआ जर्मनी की जासूस का हनीट्रैप
हुस्न की आड़ में करती थी जासूसी, फिर यूं बेनकाब हुआ जर्मनी की जासूस का हनीट्रैप
ईरान-अमेरिका युद्ध में क्यों नहीं खत्म होते हथियार, कितना बड़ा है जखीरा?
ईरान-अमेरिका युद्ध में क्यों नहीं खत्म होते हथियार, कितना बड़ा है जखीरा?
क्या बुजुर्गों का देश बनकर रह जाएगा भारत? 2050 तक कैसी होगी तस्वीर
क्या बुजुर्गों का देश बनकर रह जाएगा भारत? 2050 तक कैसी होगी तस्वीर

वीडियोज

Sansani: बेवफा बीवी की तेजाबी साजिश
Romana Isar Khan | Janhit: मीटिंग-मीटिंग की 'सेटिंग' से संदेह बढ़ा? | Jharkhand Student Protest
Bareilly Ke Bacchan: 😯Sangam की बल्लेबाज़ी और ससुर की गेंदबाजी, पहली गेंद पर टूटा बैट छूटी हंसी #sbs
Govinda संग Komal Rani Swarnkar हुईं स्पॉट, 4 साल की Dating Rumours फिर चर्चा में
Bhojpuri Bawal में Kajal Raghwani पर भड़के Nirahua, बोले- ‘आप उसी के लायक हो’

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
बाढ़ से हाहाकार! असम में अब तक 100 की मौत, यूपी-बिहार में कैसा है मौसम
बाढ़ से हाहाकार! असम में अब तक 100 की मौत, यूपी-बिहार में कैसा है मौसम
'लोकतंत्र में ऐसी घटना...', ममता बनर्जी के काफिले पर हमले को लेकर बोले अखिलेश
'लोकतंत्र में ऐसी घटना...', ममता बनर्जी के काफिले पर हमले को लेकर बोले अखिलेश
17 फिल्मों के बाद गोविंदा ने क्यों डेविड धवन संग काम करना कर दिया था बंद? एक्टर बोले-'मैं फोन करता था लेकिन...'
17 फिल्मों के बाद गोविंदा ने क्यों डेविड धवन संग काम करना कर दिया था बंद? एक्टर ने बताई वजह
भुवनेश्वर ने दिया सबसे बड़े सवाल का जवाब, टीम इंडिया का कॉल आया तो क्या करेंगे?
भुवनेश्वर ने दिया सबसे बड़े सवाल का जवाब, टीम इंडिया का कॉल आया तो क्या करेंगे?
भारतीय सीमा में घुस आए बांग्लादेशी, चाय किसान किया अपहरण, जानें पूरा मामला
भारतीय सीमा में घुस आए बांग्लादेशी, चाय किसान किया अपहरण, जानें पूरा मामला
सैनिकों को सैलरी के भी पड़े लाले! ट्रंप का दावा- 'कंगाली की ओर ईरान'
सैनिकों को सैलरी के भी पड़े लाले! ट्रंप का दावा- 'कंगाली की ओर ईरान'
DU UG की तीसरी मेरिट लिस्ट जारी, सीट अलॉटमेंट के बाद इन तारीखों का रखें ध्यान
DU UG की तीसरी मेरिट लिस्ट जारी, सीट अलॉटमेंट के बाद इन तारीखों का रखें ध्यान
GLP-1 दवाओं से बदल रहा मोटापे का इलाज, क्या अब सर्जरी की जरूरत कम होगी?
GLP-1 दवाओं से बदल रहा मोटापे का इलाज, क्या अब सर्जरी की जरूरत कम होगी?
Embed widget