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जिनकी आंखें नहीं हैं... क्या उन्हें भी आते हैं सपने, क्या फर्क होता है उनके और नॉर्मल आंख वाले सपनों में

रिसर्च में बताया गया कि हमारे सपनों का तकरीबन 48 फ़ीसदी हिस्सा सुन कर लिए गए अनुभवों पर आधारित होता है. जबकि 52 फ़ीसदी हिस्सा किसी स्पर्श, सूंघने और स्वाद महसूस करने की क्षमता पर आधारित होता है.

सपनों को लेकर पूरी दुनिया में कई तरह की बातें कही जाती हैं. कुछ लोग सपनों के अलग-अलग तरीकों को शुभ अशुभ संकेतों से जोड़ते हैं... तो कहीं सपनों को शरीर की कुछ बीमारियों से जोड़ा जाता है. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सपना इस पृथ्वी पर रहने वाले हर जीव को आ सकता है. मनोविज्ञान कहता है कि इंसान सोते समय जो सपना देखता है, वह उसके जागते हुए जीवन में किए गए अनुभवों पर आधारित होता है. लेकिन अब सवाल उठता है कि जो लोग देख नहीं सकते, जिनके पास देखने का कोई अनुभव नहीं है... क्या उन्हें सपना आता है? अगर उन्हें सपना आता है तो वह अपने सपने में क्या देखते हैं?

जो देख नहीं सकती उन्हें कैसे सपने आते हैं

साइंस डायरेक्ट में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, जो लोग देख नहीं सकते उन लोगों को अलग-अलग तरह के सपने आते हैं. खासतौर से अलग-अलग तरीकों से दृष्टिहीन हुए लोगों को अलग-अलग तरह के सपने आते हैं. जैसे कि अगर कोई व्यक्ति शुरू के 5 से 6 साल की उम्र में दृष्टिहीन हुआ है... तो उसे उसके सपने में अपने बचपन की वह तस्वीरें दिख सकती हैं जो उसने शुरू के 5 से 6 साल के बीच अनुभव किए थे. यानी अगर कोई व्यक्ति आज से 20 साल पहले दृष्टिहीन हुआ है और दृष्टिहीन होने से पहले कुछ वर्षों तक उसने इस दुनिया को देखा है, तो वह अपने सपने में 20 साल बाद भी इस दुनिया को उसी स्वरूप में देखता है जैसा कि उसने 20 साल पहले देखा था.

जो लोग पैदाइशी दृष्टिहीन होते हैं वह कैसा सपना देखते हैं

साइंस डायरेक्ट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जब वैज्ञानिकों ने अलग-अलग तरह से दृष्टिहीन हुए लोगों से बातचीत की तो उन्हें पता चला कि जो लोग पैदाइशी दृष्टिहीन होते हैं, यानी जिन्होंने कभी कोई तस्वीर या विजुअल नहीं देखा है, उन्हें सपने में भी कुछ नहीं दिखाई देता है. दरअसल, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सपने में हमारा दिमाग उन्हीं चीजों से जुड़ी तस्वीर तैयार करता है जिन्हें हम जागते हुए देखते हैं. इसलिए पैदाइशी दृष्टिहीन लोगों के दिमाग में ऐसी कोई छवि ही नहीं होती है जिस से जुड़ा कोई भी विजुअल उनका दिमाग तैयार कर सके.

हमें सपने किस तरह से आते हैं

इसी रिसर्च में बताया गया कि हमारे सपनों का तकरीबन 48 फ़ीसदी हिस्सा सुन कर लिए गए अनुभवों पर आधारित होता है. जबकि 52 फ़ीसदी हिस्सा किसी स्पर्श, सूंघने और स्वाद महसूस करने की क्षमता पर आधारित होता है. यानी सोते वक्त हमारे दिमाग में सपनों के माध्यम से जो विजुअल तैयार होता है, उनमें इन 4 चीजों का अहम रोल होता है.

जैसे कि अगर कोई ऐसा व्यक्ति जो बाद में दृष्टिहीन हुआ हो सपना देखे तो उसे सपने में जो डरावनी चीजें आती हैं उनमें होता है कि वह किसी कार से टकरा गया या किसी गड्ढे में गिर गया या फिर कोई कुत्ता उसके पीछे उसे काटने के लिए दौड़ रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि दृष्टिहीन लोगों को सामान्य लोगों की तुलना में डराने वाले सपने करीब दोगुने आते हैं.

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