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स्पेस एजेंसी ने तैयार किया खास पॉड लूना, जानें इसके अंदर कैसी होगी मून वॉक

Artificial Moon On Earth: चांद को धरती पर उतार लाने की बातें तो आपने गानों और कविताओं में जरूर सुनी होगी, लेकिन स्पेस एजेंसी ने बिल्कुल चांद की तरह ही माहौल धरती पर तैयार कर लिया है. चलिए जानें.

अगर आप इंसान के चांद पर जाने की तैयारियों को लेकर थोड़ी भी दिलचस्पी रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. यूरोपीय स्पेस एजेंसी और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर ने जर्मनी में लूना एनॉलॉग फैसिलिटी की स्थापना कर ली है. आम भाषा में कहें तो इस देश ने धरती पर चांद की तरह से ही दूसरे चांद का निर्माण किया है. चंद्रमा के वातावरण की नकल करके यह फैसिलिटी डेवलप की गई है, जो कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चंद्रमा पर जाने से पहले एक माहौल तैयार करके दिया जाता है, जो कि उनके लिए महत्वपूर्णं कदम है. इस लूना पॉड में एस्ट्रोनॉट्स धरती पर चंद्रमा के हालात को अनुभव कर सकते हैं.

लूना को बनाने में किन चीजों की पड़ी जरूरत

चंद्रमा की तरह हालात बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की जरूरत होती है. पहली होती है चंद्रमा की मिट्टी जिसको चंद्रमा की रेगोलिथ कहा जाता है. इस संरचना चंंद्रमा की रेत की तरह होती है. दूसरा होता है सूर्य के एंगल की नकल करने के लिए खास तरीके की रोशनी डेवलप करना. तीसरी सबसे अहम चीज है चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण जो कि धरती पर ही चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का असर देगा. इसके अलावा इन सब चीजों को एकसाथ जोड़ने के लिए एक बहुत बड़े कंटेनर, जैसे की एक बड़ी सी धातु के हैंगर की जरूरत होती है. 

किस तरह से बनाया गया लूना

लूना एनॉलॉग फैसिलिटी में 900 टन ज्वालामुखी की कुचली हुई चट्टानें हैं, जो कि इटली के माउंट एटना और जर्मनी के आइफेल से ली गई हैं. यह पूरी तरह से चंद्रमा की सतहकी नकल करता है. यह पूरी फैसिलिटी 700 स्क्वायर मीटर में फैली हुई है. इसमें धूल भरे वातावरण से निपटना और क्रेटर्स को नेविगेट करने जैसी अंतरिक्ष यात्रियों को बताई जाती हैं. इसी तरह से चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की नकल के लिए छत पर लगी चलने वाली ट्रॉलियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि कूदने या चलने पर काम करती हैं. 

चांद पर जाने से पहले हो सकेगी प्रैक्टिस

डीएलआर और ईसा ने सितंबर 2024 के लास्ट में चंद्रमा के अपने संस्करण को पेश किया था. तब जर्मनी के मैथियास मौरर और फ्रांस के थॉमस पेस्केट ने स्पेस सूट पहनकर इसमें अनुभव किया था. उन्होंने ही दिखाया कि फैसिलिटी में सूर्य की चमक कैसे बनती है और अंतरिक्ष यात्रियों को मिशन के दौरान किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. दरअसल नासा आर्टिमिस मिशन के जरिए एकबार फिर से इंसानों को चांद पर ले जाने का मिशन चल रहा है, ऐसे में यह बहुत सहायक होगा. 

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