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जब पहली बार स्पेस में मकड़ी ने बुना था जाल, जानिए क्या था यह अजीबोगरीब मिशन

वैज्ञानिकों ने देखा कि यह मकड़ियां पृथ्वी की तरह स्पेस स्टेशन में भी जाल बुन रही थीं. हालांकि, यहां उनके जाल पृथ्वी के मुकाबले बहुत अलग थे.

मकड़ियां इस दुनिया में हर जगह मौजूद हैं. आपका घर हो, पार्क हो या जंगल हो... मकड़ी के जाले आपको हर जगह कभी ना कभी दिखे होंगे. लेकिन क्या आपको मालूम है कि इन मकड़ियों ने पृथ्वी के साथ-साथ स्पेस में भी जाल बुने हैं. दरअसल, इन मकड़ियों को जाल बुनता देखकर वैज्ञानिकों के मन में यह सवाल उठा कि क्या यह मकड़िया पृथ्वी के बाहर स्पेस में भी जाल बुन सकती हैं. इसी के लिए उन्होंने एक मिशन लॉन्च किया और फिर धरती से दो मकड़ियों को ले जाकर स्पेस में छोड़ दिया. हालांकि यहां स्पेस में छोड़ देने का मतलब खुले स्पेस में नहीं, बल्कि स्पेस स्टेशन के अंदर रखा गया. आपको बता दें अंतरिक्ष में जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन मौजूद है उसमें सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पृथ्वी के कई और छोटे-छोटे जीव जंतु भी रहते हैं और उन पर वहां तरह तरह का रिसर्च भी होता है.

क्या हुआ था इस मिशन में

यह बात साल 1973 की है जब पहली बार जुलाई के महीने में पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर मौजूद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में दो यूरोपियन गार्डन स्पाइडर को भेजा गया. यहां के यूएस स्पेस स्टेशन जिसे, स्काई लैब कहते हैं उनमें इन्हें रखा गया. वैज्ञानिकों ने देखा कि यह मकड़ियां पृथ्वी की तरह स्पेस स्टेशन में भी जाल बुन रही थीं. हालांकि, यहां उनके जाल पृथ्वी के मुकाबले बहुत अलग थे. मकड़िया अंतरिक्ष में अजीब तरह के जाल बुन रही थीं. वैज्ञानिकों को समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है. हालांकि, बाद में कुछ वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि शायद यह जीरो ग्रेविटी या फिर खाने और नमी की कमी के कारण हो रहा है.

साल 2008 में फिर भेजी गई मकड़ियां

साल 2008 में नासा ने मकड़ियों की दो प्रजातियों को फिर से अंतरिक्ष में भेजने का फैसला किया. इन मकड़ियों को अंतरिक्ष में भोजन के लिए मक्खियां दी गईं. कुछ दिनों बाद वैज्ञानिकों ने देखा कि दोनों मकड़िया एक साथ एक चेंबर में आ गई हैं और जाल बुनना उन्होंने शुरू कर दिया है. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इन मकड़ियों ने वैज्ञानिकों द्वारा दी गई मक्खियों को ना के बराबर खाया.

जाल में फर्क क्या था

इस रिसर्च में सामने आया कि जब अंतरिक्ष में मकड़ियों ने जाल बनाना शुरू किया तो अंधेरे में उन्होंने सेमेट्रिक जाल बुने. जबकि जैसे ही उनके सामने लाइट ऑन की गई उन्होंने प्रकाश को देखते ही असेमेट्रिक जाल बुनना शुरू कर दिया. वैज्ञानिकों का मानना था कि मकड़िया ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि जीरो ग्रेविटी में उनके पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता है. जीरो ग्रेविटी में मकड़ियों को पता नहीं चलता है कि उनके ऊपर क्या है और उनके नीचे क्या है इसलिए ऐसी स्थिति में वह जिस तरह से जाल बुन सकती हैं वैसा ही वह बना लेती हैं.

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