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सबसे पहले किस देश में मनाया गया था फादर्स डे? ये था सेलिब्रेशन का कारण

दुनियाभर में पिताओं के महत्व और उनके त्याग के लिए हर साल जून के तीसरे रविवार को 'फादर्स डे' मनाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले इसकी शुरूआत कहां से हुई थी.

दुनिया में हर साल 'मदर्स डे' के साथ-साथ 'फादर्स डे' भी सेलिब्रेट किया जाता है. इस दिन बच्चे अपने पापा को उनके साथ के लिए थैंक्यू कहते हैं और केक काटकर सेलिब्रेट करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस दिन की शुरुआत कब, कहां, कैसे हुई थी. आज हम आपको बताएंगे कि सबसे पहले फादर्स डे कहां पर मनाया गया था और आधिकारिक तौर पर दुनियाभर में इसकी शुरूआत कब हुई थी. 

फादर्स डे

फादर्स डे हर साल जून महीने के तीसरे सप्ताह में मनाया जाता है. इस बार फादर्स डे 16 जून को सेलिब्रेट किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक अमेरिका में साल 1907 में पहली बार अनिधिकृत रूप से 'फादर्स डे' मनाया गया था. जबकि आधिकारिक रूप से इसकी शुरुआत साल 1910 में हुई थी. हालांकि, 'फादर्स डे' मनाने की तारीख को लेकर जानकारों में मतभेद हैं. इतिहासकारों के मुताबिक इस दिन की शुरुआत सोनोरा स्मार्ट डोडने की थी. दरअसल सोनेरा जब छोटी थीं, तो उनकी मां का देहांत हो गया था और पिता विलियम स्मार्ट ने उन्हें मां और बाप दोनों का प्यार दिया था. अपने पिता के प्यार, त्याग और समर्पण को देख उन्होंने मदर्स डे की तर्ज पर 'फादर्स डे' मनाने की सोचा था.

पहली बार फादर्स डे

इसके बाद 19 जून 1909 को पहली बार डोड ने फादर्स डे मनाया गया था. वहीं साल 1924 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति कैल्विन कोली ने फादर्स डे को मंजूरी दी थी. इसके चार दशक बाद राष्ट्रपति लिंडन जानसन ने साल 1966 में यह घोषणा कि हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को 'फादर्स डे' मनाया जाएगा. इस दिन अमेरिका में आधिकारिक छुट्टी दी जाती है. 

फादर्स डे का महत्व

फादर्स डे के दिन पिता के योगदान, उनके परिश्रम, त्याग और बच्चों के लिए उनके समर्पण को याद किया जाता है. इतना ही नहीं यह दिन हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हम अपने पिता के प्रति आभार व्यक्त करें और उनके जीवन में किए गए त्याग और समर्पण को समझे. फादर्स डे मनाने का जो प्रमुख उद्देश्य है, वो पिता के प्रति प्यार और सम्मान को प्रकट करना है. यह दिन विशेष रूप से उनके पिताओं के बलिदानों, परिश्रम और निस्वार्थ सेवा को सराहने के लिए होता है. इस दिन को पिता और पूरे परिवार क साथ मिलकर बनाना चाहिए और पिता के समर्पण को याद करके उनके महत्व को समझना चाहिए. 

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गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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