एक्सप्लोरर

डंब बॉम्ब और स्मार्ट बॉम्ब में क्या होता है अंतर, जानें कौन-सा बम कब होता है इस्तेमाल?

हवाई हमलों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक और आधुनिक हथियारों की कार्यप्रणाली और उनकी निर्माण लागत में एक बहुत बड़ा तकनीकी अंतर होता है. आइए आज आपको डंब बॉम्ब और स्मार्ट बॉम्ब के बारे में बताएं.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • DRDO ने 'तारा' प्रणाली से डंब बमों को स्मार्ट बनाया.

दुनिया भर के युद्ध मैदानों में अब केवल सैनिकों की संख्या नहीं, बल्कि उनके हथियारों की तकनीक जीत और हार का फैसला करती है. आज के दौर में जब हवाई हमलों यानी एयरस्ट्राइक की बात आती है, तो दो तरह के बमों का जिक्र सबसे ज्यादा सुना जाता है, जिन्हें 'डंब बॉम्ब' और 'स्मार्ट बॉम्ब' कहा जाता है. देखने में भले ही ये दोनों तबाही मचाने वाले हथियार लगते हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका, इनकी कीमत और सटीकता में जमीन-आसमान का अंतर होता है. रक्षा विज्ञान के इन दोनों अहम पहलुओं और इनके बीच के बड़े अंतर को समझना हर सैन्य रणनीतिकार के लिए बेहद जरूरी है.

कैसे काम करते हैं डंब बॉम्ब?

डंब बॉम्ब को पारंपरिक या अनगाइडेड बम भी कहा जाता है. तकनीकी रूप से इन बमों के भीतर दिशा बदलने या खुद को नियंत्रित करने का कोई दिमाग या गाइडेंस सिस्टम नहीं होता है. जब किसी लड़ाकू विमान या एयरक्राफ्ट से इन्हें नीचे गिराया जाता है, तो ये पूरी तरह से केवल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) के सहारे सीधे नीचे की ओर गिरते हैं. हवा के बहाव या मौसम के बदलने पर ये अपने तय निशाने से भटक भी सकते हैं. यही वजह है कि इन्हें 'डंब' यानी बिना दिमाग वाला बम पुकारा जाता है.

डंब बॉम्ब के इस्तेमाल में कितना बड़ा खतरा?

इन अनगाइडेड बमों की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि इनसे एकदम सटीक और अचूक एयरस्ट्राइक करना बेहद मुश्किल काम होता है. अगर किसी सेना को दुश्मन के किसी खास बंकर या ठिकाने को पूरी तरह तबाह करना है, तो पायलट को अपने फाइटर जेट को दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम और उनके बहुत करीब लेकर जाना पड़ता है. दुश्मन की सीमा के इतने नजदीक जाकर बम गिराना लड़ाकू विमान और पायलट दोनों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित होता है.

यह भी पढ़ें: Spy Satellite: क्या सैटेलाइट के जरिए दूसरे देश पर नजर रखी जा सकती है, क्या है इसके पीछे का‌ कानून?

कैसे होते हैं स्मार्ट बॉम्ब?

दूसरी तरफ आते हैं स्मार्ट बॉम्ब, जिन्हें गाइडेड वेपन्स भी कहा जाता है. इन बमों के भीतर आधुनिक तकनीक, कंप्यूटर चिप्स, जीपीएस (GPS) या लेजर गाइडेंस सिस्टम लगा होता है. विमान से छोड़े जाने के बाद ये बम हवा में भी अपनी दिशा खुद बदलने की क्षमता रखते हैं. लेजर या जीपीएस सिग्नलों की मदद से ये सीधे अपने तय निशाने पर जाकर ही ब्लास्ट करते हैं. इनकी सटीकता इतनी जबरदस्त होती है कि ये दुश्मन के चलते हुए वाहनों या छोटे से बंकर को भी ढूंढकर पूरी तरह नेस्तनाबूद कर सकते हैं.

स्मार्ट बॉम्ब की भारी कीमत और युद्ध में बड़ी जरूरत

सटीक और अचूक होने के बावजूद स्मार्ट बॉम्ब की सबसे बड़ी खामी उनकी अत्यधिक ऊंची लागत या कीमत है. इन बमों में लगी हाई-टेक तकनीक के कारण इनकी एक-एक मिसाइल या बम करोड़ों रुपये की बैठती है. किसी भी बड़े युद्ध के दौरान सेनाओं को ऐसे हजारों बमों की जरूरत पड़ती है, जिससे रक्षा बजट पर बहुत भारी वित्तीय दबाव आ जाता है. यही कारण है कि दुनिया के अमीर देश भी हर जगह केवल स्मार्ट बॉम्ब का इस्तेमाल करने से बचते हैं और पारंपरिक बमों का सहारा लेते हैं.

भारत के डीआरडीओ ने ढूंढा बीच का अनोखा रास्ता

स्मार्ट बमों की इसी भारी-भरकम कीमत को देखते हुए भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO ने एक बेहद शानदार और किफायती बीच का रास्ता निकाला है. भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नया स्वदेशी सिस्टम तैयार किया है जिसका नाम 'तारा' (TARA) रखा गया है. तारा का पूरा नाम 'टेक्टिकल एडवांस रेंज ऑगमेंटेशन' है. यह एक ऐसा आधुनिक और मॉड्यूलर सिस्टम है, जो पुरानी तकनीक के डंब बमों को भी पलक झपकते ही बेहद आधुनिक और अचूक स्मार्ट बमों में बदलने की पूरी ताकत रखता है.

पुराने कबाड़ बमों को भी 'तारा' बना देता है बेहद स्मार्ट

डीआरडीओ का यह 'तारा' सिस्टम एक तरह की कस्टमाइज्ड किट है, जिसे वायुसेना के बेड़े में पहले से मौजूद पुराने और अनगाइडेड डंब बमों के ऊपर आसानी से फिट कर दिया जाता है. जैसे ही यह मॉड्यूलर सिस्टम पुराने बम पर लगता है, वह साधारण बम भी जीपीएस और लेजर गाइडेंस की मदद से एक बेहद सटीक और मारक स्मार्ट बम की तरह काम करने लगता है. इस अनोखी तकनीक की वजह से भारत को करोड़ों रुपये के नए स्मार्ट बम खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और पुराने स्टॉक का बेहतरीन इस्तेमाल हो जाता है.

यह भी पढ़ें: Monk Culture: मोंक के सिर पर अगरबत्ती से क्यों बनाए जाते हैं निशान, जानें क्या होता है उनका मतलब

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

डंब बॉम्ब और स्मार्ट बॉम्ब में क्या होता है अंतर, जानें कौन-सा बम कब होता है इस्तेमाल?
डंब बॉम्ब और स्मार्ट बॉम्ब में क्या होता है अंतर, जानें कौन-सा बम कब होता है इस्तेमाल?
कितने रुपये में होता है एक प्लेन का इंश्योरेंस, किस तरह के हादसों पर नहीं मिलता क्लेम?
कितने रुपये में होता है एक प्लेन का इंश्योरेंस, किस तरह के हादसों पर नहीं मिलता क्लेम?
TARA System: चीन-पाकिस्तान को खौफ से कांपने को क्यों मजबूर कर रहा भारत का 'तारा', कितना घातक है यह हथियार?
चीन-पाकिस्तान को खौफ से कांपने को क्यों मजबूर कर रहा भारत का 'तारा', कितना घातक है यह हथियार?
Water Control System: समुद्र से नीचे होने के बाद भी क्यों नहीं डूबता यह देश, जानें समंदर का पानी कैसे किया कंट्रोल?
समुद्र से नीचे होने के बाद भी क्यों नहीं डूबता यह देश, जानें समंदर का पानी कैसे किया कंट्रोल?
Advertisement

वीडियोज

Iran-US-Israel War Update: हूती विद्रोहियों का अब तक का सबसे बड़ा हमला | Trump| Middle East Crisis
Sansani : रील पर गोल्ड चैलेंज...चोरों ने कहा चैलेंज कबूल है | Crime News
Mahadangal: हारे तो 'INDIA' के सहारे! | INDIA Bloc Meeting | Rahul Gandhi | Mamata Banerjee
Sandeep Chaudhary: इंडिया गठबंधन की एकजुटता का सबसे सटीक विश्लेषण! | INDIA Bloc Meeting | TMC | News
Janhit : दिल्ली दरबार में दीदी हुईं 'अकेली' ! | INDIA Bloc Meeting | Mamata Banerjee | Rahul Gandhi
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'बाप को मारकर लाश के टुकड़े बाल्टियों में भरे', सूली पर लटकाए जाएंगे कलयुगी बेटा-बेटी, मां को भी उम्रकैद
'बाप को मारकर लाश के टुकड़े बाल्टियों में भरे', सूली पर लटकाए जाएंगे कलयुगी बेटा-बेटी, मां को भी उम्रकैद
अपने ही विधायक से नाराज होकर रोने लगे BJP पार्षद संजय गुजराती, कहा- संगठन से करेंगे शिकायत
अपने ही विधायक से नाराज होकर रोने लगे BJP पार्षद संजय गुजराती, कहा- संगठन से करेंगे शिकायत
अमेरिका ने जब्त किया 1 अरब डॉलर का क्रिप्टो फंड तो गुस्से से तमतमाया ईरान, कहा - 'बौने चोर के जिस्म पर...'
US ने जब्त किया 1 अरब डॉलर का फंड तो गुस्से से तमतमाया ईरान, कहा - 'बौने चोर के जिस्म पर...'
खिलाड़ियों के बीच जमकर हुई घूंसेबाजी, इस क्रिकेट टीम का कप्तान भी लड़ाई शामिल; मचा बवाल
खिलाड़ियों के बीच जमकर हुई घूंसेबाजी, इस क्रिकेट टीम का कप्तान भी लड़ाई शामिल; मचा बवाल
Bandar BO Day 4: मंडे टेस्ट में बुरी तरह पिटी बॉबी देओल की ‘बंदर’, चार दिनों का कलेक्शन जान लगेगा झटका
मंडे टेस्ट में बुरी तरह पिटी बॉबी देओल की ‘बंदर’, चार दिनों का कलेक्शन जान लगेगा झटका
ईरान-इजरायल में छिड़ी जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कर दिया बड़ा ऐलान, बोले - 'अगले दो हफ्तों में...'
ईरान-इजरायल में छिड़ी जंग के बीच ट्रंप ने कर दिया बड़ा ऐलान, बोले - 'अगले दो हफ्तों में...'
Clove Farming At Home: किचन गार्डन में कैसे कर सकते हैं लौंग की खेती? पूजा-पाठ से लेकर खाना बनाने में आएंगी काम
किचन गार्डन में कैसे कर सकते हैं लौंग की खेती? पूजा-पाठ से लेकर खाना बनाने में आएंगी काम
क्या Airplane Mode सच में रोक देता है Smartphone Radiation? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे
क्या Airplane Mode सच में रोक देता है Smartphone Radiation? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे
Embed widget