क्या परमाणु बम की भी होती है एक्सपायरी डेट, कब तक चलता है एक बार बना बम?
खाने के सामान की तरह बमों और हथियारों की भी एक्सपायरी डेट होती है. उसी तरह से एक बार बनाए गए परमाणु बम हमेशा नहीं चलते हैं, बल्कि उनकी भी एक उम्र होती है. चलिए जानें.

जब हम किसी चीज पर एक्सपायरी डेट देखते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले खाना, दवाइयां या रोजमर्रा की चीजें आती हैं, लेकिन क्या दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों की भी कोई उम्र होती है? क्या एक बार बना परमाणु बम हमेशा के लिए काम करता रहता है या फिर समय के साथ उसकी ताकत भी घटती जाती है? यह सवाल जितना चौंकाने वाला है, उतना ही वैज्ञानिक और गंभीर भी है, जिसका जवाब जानकर आप हैरान रह जाएंगे.
क्या परमाणु बम की भी होती है एक्सपायरी डेट?
आमतौर पर लोग मानते हैं कि परमाणु बम एक बार बन जाए तो वह हमेशा उतना ही खतरनाक रहता है, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है. परमाणु बम की कोई एक्सपायरी डेट दूध या दवा की तरह नहीं होती है, लेकिन इसका एक तकनीकी जीवनकाल जरूर होता है. यानी एक समय के बाद वह बम पहले जितना भरोसेमंद या प्रभावी नहीं रह जाता है.
एक परमाणु बम कितने साल तक काम करता है?
विशेषज्ञों के अनुसार एक परमाणु बम आमतौर पर 30 से 50 साल तक प्रभावी माना जाता है. इसके बाद उसके अंदर लगे कई अहम हिस्से धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं. हालांकि बम में मौजूद यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसे रेडियोधर्मी तत्व हजारों साल तक टिक सकते हैं, लेकिन पूरा हथियार सिर्फ इन्हीं पर निर्भर नहीं होता है.
ट्रिटियम और दूसरे घटकों की भूमिका
आधुनिक परमाणु हथियारों में ट्रिटियम नाम का एक खास तत्व इस्तेमाल होता है, जो विस्फोट की ताकत बढ़ाने में मदद करता है. ट्रिटियम की आधी उम्र लगभग 12 साल होती है. इसका मतलब यह है कि हर 12 साल में इसकी मात्रा आधी हो जाती है. अगर समय पर इसे बदला न जाए, तो बम की क्षमता कम हो सकती है और वह ठीक से काम नहीं कर सकता है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीक भी होती है पुरानी
परमाणु बम सिर्फ रेडियोधर्मी धातु नहीं होती, बल्कि उसमें बेहद जटिल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, डिटोनेटर और सुरक्षा उपकरण लगे होते हैं. समय के साथ ये इलेक्ट्रॉनिक हिस्से खराब हो सकते हैं. पुराने हो चुके सर्किट, सेंसर और तार बम को खतरनाक भी बना सकते हैं, इसलिए इन्हें नियमित रूप से बदला जाता है.
क्या पुराने बमों को फेंक दिया जाता है?
नहीं…कभी भी परमाणु शक्तियां अपने पुराने बमों को ऐसे ही छोड़ नहीं देती हैं. इन्हें समय-समय पर मेंटेन किया जाता है, अपग्रेड किया जाता है या फिर पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया जाता है, जिससे वह किसी के लिए भी खतरा न रहें. कई देशों में पुराने परमाणु हथियारों को खोलकर उनके उपयोगी हिस्सों को नए हथियारों में लगाया जाता है.
गलत स्टोरेज से बढ़ता खतरा
अगर परमाणु बम को सही तापमान और सुरक्षित माहौल में न रखा जाए, तो वह समय से पहले खराब हो सकता है. नमी, ज्यादा गर्मी या लापरवाही से स्टोरेज करने पर दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि परमाणु हथियारों की निगरानी बेहद सख्त होती है.
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