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City Heat Effect : आपका शहर क्यों लग रहा है ज्यादा गर्म? जानिए पेड़, कंक्रीट और 10°C तापमान का सच

City Heat Effect : दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों में गर्मी इतनी अलग क्यों लगती है.

City Heat Effect : गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है. हर कोई अब कह रहा है कि गर्मी सहन नहीं हो रही है. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों में गर्मी इतनी अलग क्यों लगती है. कहीं सड़क पर चलते हुए ऐसा लगता है जैसे आग बरस रही हो, और कुछ ही दूरी पर पेड़ों के नीचे खड़े होते ही राहत मिल जाती है. इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है. तो आइए जानते हैं कि आपका शहर क्यों ज्यादा गर्म लग रहा है और पेड़, कंक्रीट और 10°C तापमान का सच क्या है. 

एक ही शहर में 10°C का अंतर कैसे?

गर्मियों की दोपहर में अगर आप किसी बड़े शहर में निकलें, तो आपको तापमान हर जगह एक जैसा नहीं मिलेगा. घनी आबादी और कंक्रीट से भरे इलाकों में तापमान 42-43°C तक जा सकता है. जहां पेड़ और पार्क हैं, वहां यह 32-34°C तक गिर सकता है और शहर के बाहरी, ज्यादा हरियाली वाले हिस्सों में यह 25-26°C तक भी पहुंच सकता है.  एक ही समय, एक ही शहर में 10°C या उससे ज्यादा का फर्क हो सकता है. यह फर्क आपके स्वास्थ्य, बिजली की खपत और लाइफ पर सीधा असर डालता है. 

आपका शहर क्यों ज्यादा गर्म लग रहा है?

शहर इसलिए ज्यादा गर्म लगता है क्योंकि उसकी बनावट ही ऐसी होती है कि वह गर्मी को पकड़कर रखता है. सड़कों का डामर, ऊंची इमारतों का कंक्रीट और कांच दिनभर सूरज की तेज गर्मी को सोख लेते हैं और उसे जमा कर लेते हैं, फिर यही गर्मी रात में धीरे-धीरे बाहर निकलती रहती है, जिससे शहर ठंडा नहीं हो पाता है. इसके उलट, मिट्टी, पेड़ और पानी जैसी प्राकृतिक चीजें सूरज की गर्मी को कम सोखती हैं और वातावरण को ठंडा बनाए रखती हैं. खासकर पेड़ हवा में नमी छोड़ते हैं और छाया देते हैं, जिससे तापमान कम होता है, लेकिन जब शहरों से ये प्राकृतिक तत्व हट जाते हैं और उनकी जगह कंक्रीट बढ़ जाता है, तो गर्मी तेजी से बढ़ने लगती है और शहर ज्यादा तपने लगता है. 

पेड़ शहर को कैसे ठंडा करते हैं?

पेड़ सिर्फ छाया ही नहीं देते, बल्कि कई तरीकों से शहर को ठंडा करते हैं. पेड़ सीधे सूरज की किरणों को जमीन और इमारतों तक पहुंचने से रोकते हैं. पेड़ अपनी पत्तियों से पानी छोड़ते हैं, जिससे आसपास की हवा ठंडी होती है. पेड़ों के नीचे की जमीन कंक्रीट की तरह गर्मी जमा नहीं करती. हर हरियाली एक जैसी ठंडक नहीं देती, इसलिए सिर्फ ग्रीन एरिया होना ही काफी नहीं है. अगर किसी पार्क में सिर्फ घास है और पेड़ नहीं हैं, तो वह ज्यादा ठंडा नहीं बन पाता, क्योंकि घास छाया नहीं देती और गर्मी को पूरी तरह रोक नहीं पाती है. इसके मुकाबले, जहां घने पेड़ होते हैं, वहां छाया भी मिलती है और पेड़ हवा में नमी छोड़कर तापमान को ज्यादा कम करते हैं.

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गर्मी की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

शहरों में  सबसे बड़ी समस्या सही प्लानिंग की कमी है. पेड़ लगाना मुश्किल नहीं है, लेकिन अगर उन्हें सही जगह और सही तरीके से नहीं लगाया जाए तो उनका पूरा फायदा नहीं मिल पाता है. शहरों में जगह की कमी होती है, ऊंची-ऊंची इमारतें हवा के बहाव को रोक देती हैं, और अगर पेड़ इधर-उधर बिखरे हों तो वे तापमान को ज्यादा कम नहीं कर पाते हैं. इसलिए जरूरी है कि अलग-अलग पेड़ लगाने की जगह एक जुड़ा हुआ ग्रीन नेटवर्क बनाया जाए, जहां पेड़ आपस में जुड़े हों और लगातार हरियाली बने. साथ ही, शहर की योजना बनाते समय शुरू से ही पेड़ों और हरियाली को शामिल करना चाहिए, जिससे शहर सच में ठंडे और रहने लायक बन सकें. 

शहरों को ठंडा करने के आसान उपाय

शहरों को ठंडा करने के लिए आसान और असरदार उपाय अलग-अलग स्तर पर अपनाए जा सकते हैं. मोहल्ले के स्तर पर सड़कों के किनारे पेड़ लगाना, घने पेड़ों वाले पार्क बनाना और सार्वजनिक जगहों पर छाया बढ़ाना बाहर के तापमान को कम करता है. वहीं इमारतों के स्तर पर छतों पर पौधे लगाना (ग्रीन रूफ), दीवारों पर वर्टिकल गार्डन बनाना और बेहतर हवा के आवागमन की व्यवस्था करना अंदर की गर्मी को घटाता है. जब ये सभी उपाय काम करते हैं, तो एक तरह का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम बनता है, जो शहर को ऊपर, आसपास और अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है. 

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