एक्सप्लोरर

चीन में एक साल में 17 पर्सेंट घट गई जन्म दर, जानें 'ड्रैगन' के लिए यह कंडीशन कितनी खतरनाक?

चीन की घटती जन्मदर अब सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए बड़ी चेतावनी बन चुकी है. अगर यही रफ्तार रही, तो ‘ड्रैगन’ की आर्थिक और सामाजिक ताकत पर सीधा असर पड़ना तय है.

दुनिया की सबसे बड़ी आबादियों में शामिल चीन आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसकी सबसे बड़ी ताकत ही उसकी कमजोरी बनती दिख रही है. जन्मदर लगातार गिर रही है, आबादी घट रही है और समाज तेजी से बूढ़ा हो रहा है. सरकार तमाम कोशिशें कर रही है, लेकिन नतीजे उम्मीद के उलट जा रहे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह स्थिति चीन के भविष्य के लिए एक बड़ी खतरे की घंटी है? 

चीन में जन्मदर क्यों बन गई चिंता का विषय?

भारत के पड़ोसी देश चीन में जन्मदर अब ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुकी है. पिछले साल देश में सिर्फ 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो 1949 के बाद सबसे कम संख्या मानी जा रही है. उस साल पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई थी और तभी से जनसंख्या के आधिकारिक आंकड़े रखे जाने लगे थे. जन्मदर प्रति हजार आबादी पर सिर्फ 5.63 रही, जो साफ दिखाती है कि नए बच्चों की संख्या कितनी तेजी से घट रही है.

लगातार चौथे साल घटती आबादी

जन्मदर में गिरावट का असर कुल जनसंख्या पर भी साफ नजर आ रहा है. 2025 में चीन की आबादी करीब 33.9 लाख कम हो गई. यह गिरावट 2022 से लगातार चौथे साल दर्ज की गई है. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल करीब 1.13 करोड़ लोगों की मौत हुई, जबकि जन्म उससे कहीं कम रही. यही वजह है कि कुल जनसंख्या का ग्राफ नीचे की ओर जा रहा है.

एक साल में 17 फीसदी की बड़ी गिरावट

चीन के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ एक साल में बच्चों के जन्म की संख्या में करीब 17 प्रतिशत की गिरावट आई है. 2025 में जन्मे बच्चों की संख्या पिछले साल के मुकाबले करीब 16.2 लाख कम रही. विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ अस्थायी नहीं है, बल्कि एक गहरे जनसांख्यिकीय संकट की ओर इशारा कर रही है.

लोग बच्चे क्यों नहीं कर रहे?

इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं. चीन में बच्चों को पालना-पोसना बेहद महंगा हो चुका है. शिक्षा, स्वास्थ्य और रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसके साथ ही युवाओं पर करियर का दबाव भी काफी है. नौकरी का भविष्य अस्थिर होने की वजह से युवा दंपति परिवार बढ़ाने से हिचक रहे हैं.
 
इसके अलावा ‘4-2-1 फैमिली स्ट्रक्चर’ भी एक बड़ी वजह है, जिसमें पति-पत्नी दोनों अकेले बच्चे होते हैं और उन पर चार बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी होती है. ऐसे में बच्चे पैदा करने का फैसला और मुश्किल हो जाता है. 

शादी की दर भी ऐतिहासिक निचले स्तर पर

जन्मदर गिरने की एक बड़ी वजह यह भी है कि चीन में शादियां कम हो रही हैं. शादी की दर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है और देर से शादी या शादी न करने का चलन बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर बच्चों की संख्या पर पड़ रहा है.

सरकार के उपाय, लेकिन नतीजे कमजोर

चीन सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं. 1 जनवरी से लागू नई नीति के तहत तीन साल से कम उम्र के हर बच्चे के लिए परिवार को करीब 500 डॉलर सालाना की सब्सिडी दी जा रही है. सरकारी किंडरगार्टन की फीस पहले ही माफ की जा चुकी है. इसके साथ ही सरकार ने कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक साधनों पर 13 प्रतिशत वैट भी लगा दिया है, जो पहले टैक्स-फ्री थे. मकसद साफ है, लोगों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना. बावजूद इसके, हालात में खास सुधार नहीं दिख रहा है. 

दुनिया के सबसे कम जन्मदर वाले देशों में चीन

इन तमाम प्रयासों के बावजूद, 2023 में चीन दुनिया के सबसे कम जन्मदर वाले टॉप 10 देशों में शामिल रहा. विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस सूची में चीन-जापान के ठीक बाद आता है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सिर्फ आर्थिक प्रोत्साहन से यह समस्या हल नहीं होगी.

तेजी से बूढ़ा हो रहा समाज

स्थिति को और गंभीर बनाती है चीन की तेजी से बूढ़ी होती आबादी. फिलहाल देश की करीब 23 प्रतिशत आबादी 60 साल से अधिक उम्र की है. ऐसे में अनुमान है कि 2035 तक बुजुर्गों की संख्या 40 करोड़ तक पहुंच सकती है. इसका मतलब है कि कामकाजी उम्र की आबादी घटेगी और पेंशन व स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा.

भविष्य के लिए कितना खतरनाक?

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो चीन की आबादी 2100 तक घटकर करीब 80 करोड़ हो सकती है. इसका सीधा असर देश की आर्थिक रफ्तार, श्रमबल और वैश्विक ताकत पर पड़ेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संकट चीन के लिए सिर्फ जनसंख्या का नहीं, बल्कि पूरे विकास मॉडल का इम्तिहान है.

यह भी पढ़ें: आज होता अखंड भारत तो कितनी होती आबादी, चीन की तुलना में कहां होता इंडिया?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Oil Crisis: गल्फ से क्रूड ऑयल नहीं आया तो किन देशों में सबसे पहले खत्म होगा तेल, किस नंबर पर हैं भारत-पाक?
गल्फ से क्रूड ऑयल नहीं आया तो किन देशों में सबसे पहले खत्म होगा तेल, किस नंबर पर हैं भारत-पाक?
Russia Ukraine War: ईरान-इजरायल के बीच जान लीजिए रूस-यूक्रेन का हाल, वहां अब तक हुई कितनी मौतें?
ईरान-इजरायल के बीच जान लीजिए रूस-यूक्रेन का हाल, वहां अब तक हुई कितनी मौतें?
Persian Gulf Hot Water: इतना गर्म क्यों है फारस की खाड़ी का पानी? वजह जान लेंगे तो नहीं होगा यकीन
इतना गर्म क्यों है फारस की खाड़ी का पानी? वजह जान लेंगे तो नहीं होगा यकीन
IAS-IPS को शादी करने से पहले सरकार से लेनी होती है परमीशन, जानें क्यों है ऐसा नियम?
IAS-IPS को शादी करने से पहले सरकार से लेनी होती है परमीशन, जानें क्यों है ऐसा नियम?
Advertisement

वीडियोज

Donald Trump ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर...ईरान पर बहुत बड़े दावे कर दिए! | Iran-Israel War Update
Iran New Supreme Leader: इजरायल पर ईरान की खतरनाक प्लानिंग पर ट्रंप का खुलासा | Mojtaba Khamenei
Iran-Israel War : अमेरिका ने ईरान के हजारों ठिकानों पर किया हमला | Trump । Mojtaba
Sansani: Iran में खामेनेई 2.0 के 'दुस्साहस' का दौर ! | Iran- Israel War
Iran Israel War: क्या Middle East War अब और फैलने वाला है? | Big Breaking
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
बाब-अल-मंदेब क्या है? होर्मुज के बाद बंद करने जा रहा ईरान, बूंद-बूंद तेल को तरस जाएगी दुनिया
बाब-अल-मंदेब क्या है? जिसको बंद करने जा रहा ईरान, बूंद-बूंद तेल को तरस जाएगी दुनिया
देश के कई हिस्सों में LPG की कमी पर सपा की पहली प्रतिक्रिया, अखिलेश के सांसद बोले- तीन लोगों की कमेटी...
देश के कई हिस्सों में LPG की कमी पर सपा की पहली प्रतिक्रिया, सांसद बोले- तीन लोगों की कमेटी...
'जहाज छोड़ो एक लीटर तेल भी नहीं जाएगा', अमेरिका की धमकी पर ईरान का सीधा जवाब, अब क्या करेंगे ट्रंप?
'जहाज छोड़ो एक लीटर तेल भी नहीं जाएगा', अमेरिका की धमकी पर ईरान का सीधा जवाब, अब क्या करेंगे ट्रंप?
भारत की वर्ल्ड कप जीत पर शाहिद अफरीदी का लेटेस्ट बयान वायरल, इस बार टीम इंडिया को लेकर क्या कहा जानिए
भारत की वर्ल्ड कप जीत पर शाहिद अफरीदी का लेटेस्ट बयान वायरल, इस बार टीम इंडिया को लेकर क्या कहा जानिए
'दोस्ताना 2' से कटा लक्ष्य लालवानी का पत्ता? इससे पहले कार्तिक आर्यन ने भी छोड़ी थी फिल्म, वजह कर देगी परेशान
'दोस्ताना 2' से कटा लक्ष्य लालवानी का पत्ता? इससे पहले कार्तिक आर्यन ने भी छोड़ी थी फिल्म
US Israel Iran War: 'PM मोदी का एक कॉल...',अमेरिका-ईरान जंग के चलते UAE पर हो रहे हमलों को लेकर बोले पूर्व राजदूत
'PM मोदी का एक कॉल...',अमेरिका-ईरान जंग के चलते UAE पर हो रहे हमलों को लेकर बोले पूर्व राजदूत
25 दिन से पहले खत्म हो गया LPG सिलेंडर तो कैसे होगी नई बुकिंग? जान लें प्रोसेस
25 दिन से पहले खत्म हो गया LPG सिलेंडर तो कैसे होगी नई बुकिंग? जान लें प्रोसेस
Russia Ukraine War: ईरान-इजरायल के बीच जान लीजिए रूस-यूक्रेन का हाल, वहां अब तक हुई कितनी मौतें?
ईरान-इजरायल के बीच जान लीजिए रूस-यूक्रेन का हाल, वहां अब तक हुई कितनी मौतें?
Embed widget