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Oil Crisis: गल्फ से क्रूड ऑयल नहीं आया तो किन देशों में सबसे पहले खत्म होगा तेल, किस नंबर पर हैं भारत-पाक?

Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर खाड़ी से तेल आना बंद हो जाए तो सबसे पहले किस देश पर असर पड़ेगा.

Oil Crisis: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिला कर रख दिया है. खाड़ी इलाके में हमले और होर्मुज स्ट्रेट के पास रूकावटों ने दुनिया भर में तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है. जैसे-जैसे यह युद्ध तेज हो रहा है और इस जरूरी चोकपॉइंट से शिपिंग धीमी हो रही है दुनिया भर में एक बड़ा सवाल उठ रहा है. अगर खाड़ी से क्रूड ऑयल ग्लोबल मार्केट तक पहुंचना बंद हो जाता है तो आखिर किन देशों में सबसे पहले तेल खत्म हो जाएगा? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

ग्लोबल एनर्जी के लिए खाड़ी इतनी जरूरी क्यों?

फारस की खाड़ी दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी हब में से एक है. सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक और ईरान जैसे देश दुनिया भर में तेल की मांग का एक बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं. इस तेल का ज्यादातर हिस्सा एशिया, यूरोप और दूसरे मार्केट तक पहुंचने से पहले और होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. अगर यह सप्लाई रूट रुक भी जाता है तो सबसे पहले और सबसे ज्यादा असर एशियाई इकोनॉमी पर ही पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें से कई ट्रांसपोर्टेशन, इंडस्ट्री और बिजली बनाने के लिए गल्फ ऑयल पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. 

तेल की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित देश 

कई एशियाई देश  इंपोर्टेड तेल पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. साथ ही उनके पास सीमित रिजर्व भी है. अगर गल्फ सप्लाई पूरी तरह से बंद हो जाती है तो इन देशों को कुछ ही हफ्तों में एनर्जी संकट का सामना करना पड़ सकता है. पाकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से है. ऐसा कहा जा रहा है कि देश के पास सिर्फ 20 से 28 दोनों का तेल रिजर्व है. क्योंकि पाकिस्तान काफी ज्यादा इंपोर्ट पर निर्भर है इस वजह से सप्लाई में कोई भी रुकावट एक महीने के अंदर गंभीर फ्यूल संकट पैदा कर सकती है. 

इसी के साथ इंडोनेशिया और वियतनाम को भी काफी ज्यादा जोखिम है. इंडोनेशिया के तेल रिजर्व के लगभग 20 दिनों तक चलने का अनुमान है. इसी के साथ वियतनाम के पास लगभग 15 दोनों का रिजर्व हो सकता है. इससे वे सप्लाई में रुकावट के प्रति काफी ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं. थाईलैंड और फिलिपींस के पास थोड़ा बेहतर बफर है. उनके पास लगभग 60 दोनों का तेल रिजर्व होने का अनुमान है.

क्या है भारत की स्थिति?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल कंज्यूमर्स में से एक है. भारत देश अपने 80% से ज्यादा क्रूड ऑयल की जरूरतों को इंपोर्ट करता है. इन इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा गल्फ रीजन से आता है. इससे देश वहां की रूकावटों के प्रति कमजोर हो जाता है. भारत के पास वर्तमान में कथित तौर पर लगभग 50 दिनों के लिए काफी तेल और पेट्रोलियम स्टॉक है. सरकार ने रूस और दूसरे देशों सहित तेल इंपोर्ट करके अपने सप्लाई सोर्स को डायवर्सिफाई करने की भी कोशिश की है. इससे गल्फ प्रोड्यूसर्स पर उसकी डिपेंडेंस कम हो गई है. हालांकि ईरान ने यह साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल की सप्लाई सिर्फ अमेरिका, इजरायल और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए बंद की गई है. 

मजबूत तेल रिजर्व वाले देश 

कुछ देश पोटेंशियल तेल सप्लाई शॉक के लिए काफी ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार हैं. जापान अपना लगभग 95% तेल मिडल ईस्ट से इंपोर्ट करता है. लेकिन उसने दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोलियम रिजर्व में से एक बनाया है. यह रिजर्व लगभग 254 से 260 दिनों तक चल सकते हैं. इसी के साथ साउथ कोरिया भी गल्फ ऑयल पर काफी ज्यादा निर्भर है. फिर भी उसके पास लगभग 208 से 210 दोनों का रिजर्व है. 

चीन जो दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है अपना लगभग आधा तेल गल्फ से लेता है. इसका अनुमानित रिजर्व लगभग 90 से 104 दिनों तक चल सकता है. वहीं यूनाइटेड स्टेट्स दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर बन चुका है. घरेलू प्रोडक्शन के अलावा यूनाइटेड स्टेट्स के पास स्ट्रैटेजिक रिजर्व भी है. यह लगभग 161 से 200 दिनों तक चल सकता है. 

सबसे पहले किसका तेल खत्म होगा? 

अगर गल्फ से क्रूड ऑयल का फ्लो पूरी तरह से बंद हो जाता है तो कम रिजर्व वाले और इंपोर्ट पर ज्यादा निर्भर देशों को सबसे पहले इस संकट का सामना करना पड़ेगा. पाकिस्तान, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देश तेल की कमी से जूझ सकते हैं. वहीं इंडिया जैसे देश थोड़े और समय तक चल सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ जापान, साउथ कोरिया, चीन और यूनाइटेड स्टेट्स जैसे बड़े स्ट्रैटेजिक रिजर्व वाले देश महीनों तक खुद को बनाए रख सकते हैं.

यह भी पढ़ें:  इतना गर्म क्यों है फारस की खाड़ी का पानी? वजह जान लेंगे तो नहीं होगा यकीन

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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