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Chhath Puja History: कब से मनाई जा रही छठ पूजा? देख लें सबसे पुराना सबूत

Chhath Puja History: क्या आप जानते हैं छठ पूजा कब शुरू हुई थी? इसके बारे में इतिहास के पन्नों में वो पल छिपा है, जब पहली बार सूर्यदेव की आराधना की गई और आज वह करोड़ों लोगों की आस्था बन चुकी है.

Chhath Puja History: छठ पूजा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि सूर्य उपासना की सबसे पुरानी और शुद्ध परंपरा मानी जाती है. इस पूजा की शुरुआत कब और कैसे हुई, इसे लेकर कई रोचक मान्यताएं प्रचलित हैं. त्रेता युग से लेकर महाभारत काल तक, इस पर्व की जड़ें इतनी गहरी हैं कि हर कहानी में इसकी महिमा अलग ढंग से झलकती है. आइए जानते हैं उन ऐतिहासिक और धार्मिक कथाओं को, जो छठ पूजा की नींव से जुड़ी हैं और जिन पर आज भी आस्था अटूट है.

भगवान राम और माता सीता से जुड़ी कथा

कहते हैं कि त्रेता युग में भगवान राम और माता सीता ने छठ पूजा का व्रत रखा था. रामायण के अनुसार, रावण पर विजय और 14 वर्ष के वनवास के बाद जब वे अयोध्या लौटे, तो उन्होंने सूर्यदेव को धन्यवाद देने के लिए छठ का व्रत किया था. यह परंपरा तब से लोगों के जीवन में अटूट रूप से जुड़ी रही है.

छठ पूजा की शुरुआत कब और कैसे हुई

छठ पूजा की शुरुआत को लेकर सबसे प्रसिद्ध मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है. कहा जाता है कि सूर्यपुत्र कर्ण ने सबसे पहले सूर्यदेव की पूजा की थी. वे हर सुबह गंगा तट पर खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे. माना जाता है कि सूर्य की कृपा से ही वे महान योद्धा बने और उनके कवच-कुंडल दिव्य शक्ति से चमकते थे. यही वजह है कि छठ को सूर्य उपासना का पर्व कहा जाता है.

द्रौपदी और पांडवों की आस्था

महाभारत की एक और कथा में बताया गया है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भी अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि के लिए छठ व्रत रखा था. कहा जाता है कि उनके इस व्रत से पांडवों के जीवन में फिर से सुख लौट आया. द्रौपदी का यह उदाहरण आज भी महिलाओं के बीच आस्था का प्रतीक माना जाता है.

वैज्ञानिक महत्व भी कम नहीं

धार्मिक महत्व के साथ-साथ इस पर्व का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गहरा संबंध है. छठ पूजा के दौरान सूर्य की किरणों के संपर्क में आने से शरीर को विटामिन डी मिलता है और त्वचा पर पराबैंगनी किरणों का असर संतुलित होता है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मददगार माना गया है. छठ पूजा सिर्फ श्रद्धा का नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान के बीच संतुलन का भी प्रतीक है. यह पर्व बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल से निकलकर अब दुनिया भर में फैल चुका है.

यह भी पढ़ें: छठ पूजा में क्यों नहीं चढ़ाए जाते ये फल? जान लें इसके पीछे की वजह

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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