BMC Elections 2026: MCD से कितना अमीर है BMC, जानें दोनों के मेयर में कौन ज्यादा ताकतवर?
BMC Elections 2026: महाराष्ट्र में म्यूनिसिपल चुनाव हो चुके हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि एमसीडी से कितना अमीर है बीएमसी. जानें दोनों के मेयर में कौन ज्यादा ताकतवर है.

BMC Elections 2026: महाराष्ट्र में म्यूनिसिपल चुनाव चल रहे हैं और दिल्ली को भी अप्रैल में अपना नया मेयर मिल जाएगा. मुंबई और दिल्ली दोनों में जल्द मेयर बदलने की उम्मीद है. ऐसे में भारत के दो सबसे बड़े नागरिक निकायों के बीच तुलना एक बार फिर से चर्चा का विषय बन चुकी है. बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली को अक्सर शक्तिशाली शहरी संस्थान बताया जाता है. लेकिन आपको बता दें कि इन दोनों की वित्तीय ताकत में एक काफी बड़ा अंतर है. आइए जानते हैं कि बीएमसी और एमसीडी में से कौन ज्यादा अमीर है और दोनों के मेयर में कौन ज्यादा ताकतवर.
बीएमसी और एमसीडी की संपत्ति में एक बड़ा अंतर
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन भारत और यहां तक कि एशिया का अब तक का सबसे अमीर नागरिक निकाय है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बीएमसी का बजट चौंका देने वाला है. यह बजट ₹74,427 करोड़ रुपये का है. यह सिर्फ दिल्ली के म्युनिसिपल बजट से ज्यादा नहीं है बल्कि कई भारतीय राज्यों के सालाना बजट से भी बड़ा है.
इसकी तुलना में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली ने 2026-27 के लिए लगभग ₹16,530 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है. दिल्ली के म्युनिसिपल एकीकरण के बाद एमसीडी की वित्तीय क्षमता मुंबई की तुलना में काफी कम है. सीधे शब्दों में कहें तो बीएमसी एमसीडी से चार गुना ज्यादा अमीर है.
बड़े बजट का मतलब ज्यादा शक्तिशाली मेयर
दरअसल ऐसा बिल्कुल नहीं है. मुंबई और दिल्ली दोनों में मेयर के पास कार्यकारी शक्ति नहीं होती, भले ही नागरिक निकाय कितना भी अमीर क्यों ना हो. मेयर मुख्य रूप से कॉर्पोरेशन का राजनीतिक और औपचारिक प्रमुख होता है ना कि प्रशासनिक. मुंबई में भले ही बीएमसी के पास काफी ज्यादा फंड ना हो लेकिन असली एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी म्युनिसिपल कमिश्नर के पास होती है. यह आमतौर पर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक सीनियर आईएएस ऑफिसर होता है. कमिश्नर फाइनेंस, एडमिनिस्ट्रेशन, प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और स्टाफ को कंट्रोल करता है.
दिल्ली की एमसीडी में पावर स्ट्रक्चर
दिल्ली भी इसी तरह का मॉडल फॉलो करता है. म्युनिसिपल कमिश्नर एमसीडी में सबसे पावरफुल होता है. इसके पास एग्जीक्यूटिव, फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव की अथॉरिटी होती है. मेयर कॉर्पोरेशन की मीटिंग्स की अध्यक्षता करता है और शहर को लीड भी करता है. दिल्ली के मेयर की स्थिति एक छोटे 1 साल के कार्यकाल और स्टैंडिंग कमेटी और अप्रूवल की कई लेयर्स की वजह से और भी कमजोर हो जाती है.
तो क्या है मेयर की भूमिका
दोनों शहरों में मेयर सीधे गवर्नेंस के बजाय एजेंडा को तय करते हैं और प्रतिनिधित्व और राजनीतिक पहचान बनाते हैं. मेयर हाउस मीटिंग्स की अध्यक्षता करता है, बहसों को मैनेज करता है, शहर के पहले नागरिक के तौर पर शहर को लीड करता है और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या विदेशी मेहमानों का स्वागत करने जैसे औपचारिक कामों को करता है.
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Source: IOCL

























