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क्या दुनिया के सारे देश एक होकर भी नहीं कर सकते अमेरिका का मुकाबला, कितना ताकतवर है US?

अमेरिका सिर्फ नाम का नहीं, असल में भी सुपरपावर है. उसे चुनौती देना संभव है, लेकिन उसके खिलाफ दुनिया का एकजुट होना लगभग नामुमकिन है. आइए जानें कि अमेरिका कितना ताकतवर है.

अमेरिका को दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क कहा जाता है, लेकिन क्या यह सिर्फ धारणा है या ठोस आंकड़ों पर टिकी हकीकत? अगर दुनिया के बाकी देश एकजुट हो जाएं, तो क्या वे वाकई अमेरिका का मुकाबला कर सकते हैं? इस सवाल का जवाब भावनाओं से नहीं, बल्कि रक्षा बजट, परमाणु हथियार, अर्थव्यवस्था और वैश्विक गठबंधनों जैसी चीजों से मिलता है. आइए समझते हैं कि अमेरिका की असली ताकत कितनी है.

सबसे बड़ा सैन्य खर्च

संयुक्त राज्य अमेरिका का रक्षा बजट वित्त वर्ष 2024 में लगभग 886 अरब डॉलर रहा. यह दुनिया में सबसे अधिक है. तुलना करें तो चीन का आधिकारिक रक्षा बजट करीब 296 अरब डॉलर और रूस का करीब 109 अरब डॉलर के आसपास है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का सैन्य खर्च कई बड़े देशों के संयुक्त खर्च के बराबर या उससे अधिक है.

सैन्य क्षमता और वैश्विक मौजूदगी

अमेरिका के पास 11 परमाणु-संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जो किसी भी अन्य देश से अधिक हैं. उसकी नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी और तकनीकी रूप से उन्नत मानी जाती है. अमेरिका के 70 से अधिक देशों में सैन्य ठिकाने या तैनाती मौजूद है. यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और मध्य पूर्व में उसकी स्थायी उपस्थिति है. इससे उसे वैश्विक स्तर पर तेज प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिलती है. 

अमेरिकी वायुसेना के पास 13,000 से अधिक सैन्य विमान हैं, जिनमें F-22 और F-35 जैसे स्टील्थ फाइटर शामिल हैं.

परमाणु शक्ति

अमेरिका के पास लगभग 5,200 परमाणु वारहेड (तैनात और भंडारित मिलाकर) होने का अनुमान है. रूस के पास भी लगभग इतनी ही संख्या है. अमेरिका की खासियत उसकी न्यूक्लियर ट्रायड है- जमीन आधारित ICBM, पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और बॉम्बर एयरक्राफ्ट. यह व्यवस्था किसी भी हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित करती है, जिससे प्रत्यक्ष युद्ध की संभावना बेहद कम हो जाती है. 

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 2023-24 में लगभग 26 ट्रिलियन डॉलर रहा, जो दुनिया में सबसे अधिक है. वैश्विक GDP में उसकी हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है. अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल लेनदेन और विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा डॉलर में होता है. इससे अमेरिका को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में खास ताकत मिलती है. 

क्या अमेरिका के खिलाफ दुनिया एकजुट हो सकती है?

सैद्धांतिक रूप से अगर चीन, रूस, यूरोपीय संघ, भारत और अन्य बड़े देश मिल जाएं तो उनकी संयुक्त अर्थव्यवस्था और सेना अमेरिका से बड़ी हो सकती है. लेकिन व्यवहार में ऐसा गठबंधन बेहद असंभव है. नाटो जैसे गठबंधन अमेरिका के नेतृत्व में हैं. कनाडा, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देश उसके करीबी सहयोगी हैं. सिर्फ इतना ही नहीं कई देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं. ऐसे में ऐसा करना व्यावहारिक नहीं है.

आंकड़े साफ दिखाते हैं कि अमेरिका रक्षा बजट, वैश्विक सैन्य मौजूदगी, परमाणु क्षमता और आर्थिक ताकत में शीर्ष पर है. दुनिया के सभी देश मिलकर सैद्धांतिक रूप से संतुलन बदल सकते हैं, लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात में ऐसा एकजुट होना लगभग असंभव है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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