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Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में किसकी तरफ पलट रही है सियासी रोटी, क्या बाल ठाकरे वाला दांव चल रहे हैं शरद पवार?

Sharad Pawar Resignation: पवार ने जैसे ही अपने इस्तीफे की बात कही, महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया. एनसीपी के बड़े नेताओं ने उनके इस्तीफे का विरोध किया और कहा कि एनसीपी का मतलब ही शरद पवार है.

Sharad Pawar Resignation: शरद पवार के एक फैसले ने दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक हलचल मचाकर रख दी है. उनके रिटायरमेंट के ऐलान के बाद से ही एनसीपी और महाविकास अघाड़ी गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े होने लगे. वहीं अब शरद पवार ने एक बड़ा दांव चलते हुए अपने इस्तीफे पर सोचने के लिए कुछ दिनों का वक्त मांगा है. जिससे एक नई चर्चा शुरू हो गई है. महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से जानने वालों को बाल ठाकरे का चैप्टर याद आने लगा है, जब उन्होंने शिवसेना से अपना इस्तीफा दिया था. कहा जा रहा है कि शरद पवार दो कदम पीछे हटकर कोई बड़ा वार करने वाले हैं. आइए जानते हैं कि सियासी शतरंज के बादशाह शरद पवार की अगली चाल क्या हो सकती है. 

यूं तो सियासी जगत में शरद पवार को लेकर कहा जाता है कि उनकी अगली चाल का पता लगा पाना काफी मुश्किल है, शरद पवार का हर फैसला उनकी सियासी गणित का ही एक हिस्सा होता है. अब पार्टी में मचे घमासान के बीच उनके रिटायरमेंट के ऐलान को भी इसी का एक हिस्सा माना जा रहा है. 

शरद पवार के फैसले की टाइमिंग
एनसीपी में पिछले कुछ हफ्तों से कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था, शरद पवार के भतीजे अजित पवार का बीजेपी की तरफ झुकाव लगातार बढ़ रहा था और वो इसके लिए शरद पवार पर दबाव बना रहे थे. क्योंकि बिना शरद पवार के पार्टी विधायकों को हाईजैक करना अजित पवार के बस की बात नहीं थी. ये 2019 में साबित हो चुका था, जब अजित पवार ने रातोंरात पाला बदल लिया था.

महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से जानने वालों का कहना है कि शरद पवार पर लगातार इस बात का दबाव बनाया जा रहा था कि वो एमवीए गठबंधन छोड़कर बीजेपी के साथ जाने पर फैसला लें, लेकिन पवार इसके लिए तैयार नहीं थे. इसके बाद से ही पार्टी में उथल-पुथल मची थी. जिसके बाद शरद पवार ने अपने रिटायरमेंट वाला दांव चल दिया. 

पवार के पक्ष में बन रहा माहौल
शरद पवार ने जैसे ही अपने इस्तीफे की बात कही, महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आना शुरू हो गया. एनसीपी के तमाम बड़े नेताओं ने उनके इस्तीफे का विरोध किया और कहा कि एनसीपी का मतलब ही शरद पवार है, इसीलिए उन्हें अपने इस फैसले को वापस लेना होगा. छगन भुजभल जैसे नेताओं ने कहा कि पार्टी को आपकी जरूरत है, इसीलिए आपका ये फैसला हमें मंजूर नहीं है. इतना ही नहीं पवार के ऐलान के बाद से ही पार्टी के तमाम कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे हैं, रो रहे हैं और शरद पवार को अपना भगवान बता रहे हैं. जिससे शरद पवार की सियासी ताकत खुलकर सबके सामने आ गई है. 

ये हो सकती है पवार की चाल
अब शरद पवार की इस सियासी चाल को कई नजरिए से देखा जा रहा है. कुछ जानकारों का कहना है कि शरद पवार ने पार्टी पर अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए ये बड़ा दांव चला है. हो सकता है कि शरद पवार पार्टी में उठ रहे विरोधी सुरों को अपनी ताकत का एहसास करा रहे हों. नए अध्यक्ष को लेकर पैदा विवाद और उनके इस्तीफे के विरोध के बाद वो अपना फैसला पलट सकते हैं. कहा जा रहा है कि शरद पवार ने ये इमोशनल कार्ड पार्टी को फिर से एकजुट करने के लिए खेला है. वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना है कि एनसीपी महाराष्ट्र में एमवीए गठबंधन से अलग हो सकती है, जिसके लिए ये पूरी कवायद हुई हो और शरद पवार किसी और के हाथों ये सब करवाना चाह रहे हों. हाल ही में शरद पवार के रोटी पलटने वाले बयान को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है. 

क्यों याद आ रहे बाला साहेब ठाकरे
शरद पवार वाले इस पूरे एपिसोड के बीच बाला साहेब ठाकरे के चैप्टर को भी याद किया जा रहा है. शिवसेना में भी एक दौर में एनसीपी जैसी ही हलचल मची थी. बात साल 1992 की है, जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच पार्टी को लेकर टकराव की स्थिति बनी थी. इसे खत्म करने के लिए बाला साहेब ठाकरे ने सामने में एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे की बात कही. इसके बाद शिवसैनिकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए और बाला साहेब के फैसले का जमकर विरोध हुआ. पार्टी एकजुट हो गई और बाल ठाकरे और ज्यादा मजबूत हो गए. अब शरद पवार के रिटायरमेंट का ऐलान करते ही लोग बाल ठाकरे के इसी दांव की याद दिला रहे हैं. 

अजित पवार का रुख सबसे अलग
जहां एक तरफ तमाम पार्टी नेता शरद पवार को मना रहे थे और कार्यकर्ता इस जिद पर अड़े थे कि पवार अपना फैसला वापस ले, वहीं अजित पवार का रुख सबसे ज्यादा अलग था. अजित पवार ने साफ कहा कि ये फैसला कभी न कभी लेना था, इसलिए इसका विरोध करना ठीक नहीं है. अजित पवार ने कहा, "जिसे भी जिम्मेदारी दी जाएगी वो पवार साहेब के मार्गदर्शन में काम करेगा. इसलिए आप बार-बार फैसला वापस लेने की बात न करें. पवाह साहेब ने अब फैसला ले लिया है." इतना ही नहीं जब एक कार्यकर्ता शरद पवार से गुजारिश कर रहा था तो अजित पवार ने उसे डांटकर चुप करा दिया. 

अजित पवार की छटपटाहट क्यों?
अब अजित पवार की इस छटपटाहट को भी डीकोड करने की कोशिश करते हैं. कहा जा रहा है कि अगर शरद पवार अपना फैसला वापस नहीं लेते हैं तो अजित पवार को अध्यक्ष पद मिलना अब थोड़ा मुश्किल नजर आ रहा है. अगर वाकई ऐसा होता है तो इसके लिए उनकी ये छटपटाहट ही जिम्मेदार होगी. इसके बाद अजित पवार गुस्से में कोई बड़ा कदम भी उठा सकते हैं. अब इस पूरे मामले में दो तस्वीरें बनती दिख रही हैं. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
पहली तस्वीर ये है कि महाराष्ट्र में शिवसेना सरकार गिरने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जिस पर कभी भी फैसला आ सकता है. इस फैसले के बाद जो समीकरण बनेंगे उन पर एनसीपी की नजर होगी. अजित पवार का बीजेपी की तरफ झुकाव भी इसी से जोड़ा जा रहा है. कहा जा रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट शिंदे गुट के खिलाफ फैसला सुनाता है और विधायकों की सदस्यता पर संकट पैदा होता है तो अजित पवार बीजेपी के साथ डील क्रैक कर सकते हैं. जिससे वो अपनी पुरानी मुख्यमंत्री बनने की महत्वकांक्षा को पूरा कर सकते हैं. 

दूसरी तस्वीर इसी को लेकर ये बन सकती है कि शरद पवार खुद बीजेपी के साथ गठबंधन के लिए मान जाएं. बताया जा रहा है कि पिछले दिनों पवार ने अपने विधायकों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक शांत रहने के निर्देश दिए थे. यानी अगर शिंदे-फडणवीस सरकार पर खतरा मंडराया तो शरद पवार महाराष्ट्र में एनसीपी का मुख्यमंत्री बना सकते हैं. जिसके लिए बीजेपी भी तैयार हो जाएगी. हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि महज एक साल के लिए राज्य में सरकार बनाने का फैसला शरद पवार नहीं लेंगे. इससे चुनावों में उनकी ताकत कम हो जाएगी, इसीलिए वो आने वाले चुनावों का इंतजार करेंगे और फिर अपनी बार्गेनिंग पावर से सत्ता तक पहुंचेंगे. 

यानी महाराष्ट्र की रोटी पूरी तरह से पक चुकी है और जलने से पहले शरद पवार अब इसे किस तरफ पलटते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा. हालांकि राजनीति के धुरंधर शरद पवार इस रोटी को कुछ ऐसे पलटेंगे कि वो एनसीपी के लिए कड़वी न हो. भले ही एनसीपी को नया अध्यक्ष मिल जाए, लेकिन पार्टी कैडर की कमान शरद पवार के ही हाथ रहेगी. उनके ही इशारों पर आगे के तमाम बड़े फैसले लिए जाएंगे. 

ये भी पढ़ें - शरद पवार के बाद NCP के भविष्य को लेकर उठने लगे सवाल, पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए ये होंगी बड़ी चुनौतियां

मुकेश बौड़ाई पिछले 7 साल से पत्रकारिता में काम कर रहे हैं. जिसमें रिपोर्टिंग और डेस्क वर्क शामिल है. नवभारत टाइम्स, एनडीटीवी, दैनिक भास्कर और द क्विंट जैसे संस्थानों में काम कर चुके हैं. फिलहाल एबीपी न्यूज़ वेबसाइट में बतौर चीफ कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं.
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