कंगना रनौत ने नागरिकता कानून को सही ठहराते हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर अफसोस जताया
जल्द रिलीज होने जा रही अपनी फिल्म 'पंगा' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान कंगना रनौत ने एबीपी न्यूज़ द्वारा पूछे एक सवाल के जवाब में न सिर्फ नागरिकता कानून में संशोधन का समर्थन किया, बल्कि हिंसक तरीके से इसका विरोध करनेवालों को भी आड़े हाथों लिया है.

मुंबई: हाल ही में नागरिकता कानून में संशोधन और उसके बाद देशभर में हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर बॉलीवुड के कई सितारों ने अपनी राय जाहिर की है और कमोबेश सभी ने इस कानून की भर्त्सना की है. लेकिन जल्द रिलीज होने जा रही अपनी फिल्म 'पंगा' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान कंगना रनौत ने एबीपी न्यूज़ द्वारा पूछे एक सवाल के जवाब में न सिर्फ नागरिकता कानून में संशोधन का समर्थन किया, बल्कि हिंसक तरीके से इसका विरोध करनेवालों को भी आड़े हाथों लिया है.
कंगना ने हिंसक प्रदर्शनों पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा, "जब भी आप किसी चीज के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं तो सबसे पहले इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि हम हिंसा न करें. जिस तरह से हमारे देश की आबादी है. महज तीन से चार फीसदी लोग ही टैक्स देते हैं और बाकी लोग उसी टैक्स के भरोसे जीते हैं. ऐसे में किसी को बसें, ट्रेनें जलाने और देशभर में उत्पात मचाने का हक किसने दिया? इसपर गौर किया जाना चाहिए क्योंकि एक बस 80-90 लाख रुपये की आती है और ये कोई छोटी रकम नहीं है. जो देश की हालत है, जितने लोग भुखमरी से मर रहे हैं, जितने लोग कुपोषण से मर रहे हैं, ऐसे में लोगों के लिए सही नहीं है कि वो हिंसा में शामिल हों."
कंगना ने आगे कहा, "लोकतंत्र के नाम पर हम आज भी स्वतंत्रता से पहले की मानसिकता को अपनाते आ रहे हैं. जब हम परतंत्र थे और उस दौरान जिस तरह से उन्होंने (अंग्रेजों ने) शस्त्रों के माध्यम से हमें गुलाम बनाया हुआ था, तो उनके खिलाफ स्ट्राइक पर जाना, देश को बंद करा देना या टैक्स नहीं देना 'कूल' माना जाता था."
नागरिकता कानून को अमली जामा पहनाने वाले प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का पक्ष लेते हुए कंगना ने कहना ने कहा, "देश में लोकतंत्र है और हमारे लीडर कोई इटली और जापान से तो आए नहीं हैं. आप ही के बीच के इंसान हैं, जो छोटी से छोटी जगह से यहां तक पहुंचे हैं."
अपरोक्ष रूप से मोदी के सफर को रेखांकित करते हुए कंगना ने इस मोड़ पर अपनी मिसाल पेश की और कहा, "कंगना रनौत होने के नाते आप मुझे यह नहीं कह सकते हैं कि एक फिल्म गलती से चल गयी या दो फिल्में गलती से चल गयीं. अगर आप 10-15 साल से सस्टेन कर रहे हो, तो आपको यह मानना पड़ेगा कि मैं अपनी प्रतिभा के दम पर यहां तक पहुंची हूं."
इस कानून को लागू करनेवाली बीजेपी सरकार का बचाव करते हुए कंगना ने कहा, "क्या यह लोकतंत्र नहीं कि उन्होंने अपने मेनिफेस्टो में लिखकर, बताकर जिन शर्तों पर सत्ता पाई है, अगर वो इसको पूरा कर रहे हैं, तो क्या वह लोकतंत्र नहीं है? तो ऐसा नहीं होता. आप एक 'सोर लूजर' नहीं हो सकते हैं."
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Source: IOCL
























