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दूसरे चरण का चुनाव कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए क्या मायने रखता है?

दूसरे चरण में सवाल है कि आखिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए दूसरे चरण का चुनाव क्या मायने रखता है? बीजेपी के सामने जहां 2014 के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है वहीं कांग्रेस के लिए अपना खोया जनाधार वापस पाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है.

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में इस वक्त सबसे बड़ा त्योहार यानी लोकसभा चुनाव चल रहे हैं. सात चरणों में हो रहे इस चुनाव का एक चरण पूरा हो चुका है तो वहीं दूसरे चरण के लिए कल वोटिंग होगी. दूसरे चरण में 95 सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा. बीजेपी के सामने जहां 2014 के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है वहीं कांग्रेस के लिए अपना खोया जनाधार वापस पाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है. उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार रैलियां कर रहे है, राहुल गांधी अपनी रैलियों में सीधे प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर ले रहे हैं. राहुल गांधी की इस चुनावी मेहनत के बीच सवाल उठता है कि आखिर यह चुनाव राहुल गांधी के लिए क्या मायने रखता है?

यूपी में पार्टी का खाता खोलने की चुनौती है दूसरे चरण में राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में खाता खोलने की है. दूसरे चरण की जिन आठ सीटों पर चुनाव हो रहा है 2014 ये सभी सीटें बीजेपी के खाते में गईं थीं. राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को उतार कर अपना 'आखिरी दांव' भी चल दिया है. इस चरण में फतेहपुर सीकरी से खुद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और अभिनेता राजबब्बर मैदान में हैं. इसके साथ ही मथुरा में कांग्रेस ने बीजेपी की प्रत्याशी हेमा मालिनी को रोकने के लिए महेश पाठक को उतारा है.

दूसरे चरण का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए क्या मायने रखता है?

दक्षिण में डीएमके-जेडीएस से दोस्ती की परीक्षा है दक्षिण की लड़ाई कांग्रेस के लिए थोड़ी राहत जरूर लेकर आती है लेकिन इस बार की बीजेपी दक्षिण में भी कांग्रेस को टक्कर देने का मन बना चुकी है. तमिलनाडु में बीजेपी ने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया है, 2014 के चुनाव की बात करें तो तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 36 सीटें एआईएडीएमके ने ही जीती थीं. एआईएडीएमके के एनडीए में शामिल होने के बाद राहुल गांधी की राह तमिलनाडु में थोड़ी कठिन जरूर नजर आ रही है.

कांग्रेस इस बार डीएमके के साथ मैदान में उतर रही है, कांग्रेस के लिए राहत की बात ये है कि 2014 में बीजेपी का प्रदर्शन तमिलनाडु में बेहद खराब रहा था. यहां की जिन 38 सीटों पर चुनाव हो रहा है इनमें से 34 पर बीजेपी कभी नहीं जीती. कर्नाटक में कांग्रेस के लिए हमेशा फायदे का सौदा रहा है लेकिन पिछले कुछ चुनाव में बीजेपी ने यहां बेहतर प्रदर्शन किया है. इसके साथ ही कांग्रेस और जेडीएस के बीच चल रहा मनमुटाव भी राहुल गांधी के लिए चुनौती बनकर उभर रहा है. गठबंधन में होने के बाद भी दोनों पार्टी के कार्यकर्ता एक दूसरे का साथ नहीं दे रहे. वहीं इस बार ओडिशा से भी बीजेपी उम्मीद लगाए हैं, इसलिए यहां भी राहुल गांधी के लिए चुनौती कम नहीं है.

पार्टी के दिग्गजों की किस्मत दांव पर है महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे की भी किस्मत दांव पर लगी हुई है. अशोक चव्हाण जहां नांदेण से मैदान में हैं तो सुशील कुमार शिंदे को पार्टी ने सोलापुर से उतारा है. इसके अलावा असम के सिल्चर से सुष्मिता देव, बिहार के कटिहार से तारिक अनवर, बेंगलुरू दक्षिण से बीके हरिप्रसाद, तमिलनाडु के शिवगंगा से पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम, और मथुरा से राज बब्बर मैदान में हैं.

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