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West Bengal Elections 2026: 'महिला आरक्षण से SIR तक... ',किस करवट बैठेगा ऊंट, चुनावी सभाओं में छाए रहे ये बड़े मुद्दे

West Bengal First Phase Voting: पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रचार थम गया है. यहां 23 अप्रैल को मतदान किया जाएगा. यह वोटिंग पहले फेज की 152 सीटों पर होगी. देखते हैं, इस बार जनता किसे अपना प्रतिनिधित्व सौंपती है.

West Bengal First Phase Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का चुनावी शोर-गुल थम गया है. अब राज्य में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. ऐसे में बीजेपी और टीएमसी ने राज्य में जमकर चुनावी प्रचार किया है. एक तरफ ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने चुनावी मोर्चा संभाले रखा, तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक दी. पीएम मोदी से लेकर अमित शाह समेत कई कद्दावर नेता प्रचार और चुनावी रैली के लिए पहुंचे. 

यह पहला मतदान होगा, जब बीजेपी की तरफ से लाए महिला आरक्षण बिल सदन में गिर गया. इससे पहले बिहार में 17 बार चुनाव हो चुके हैं. यह राज्य का 18वां चुनाव है. 

अबतक 3.60 करोड़ मतदाता करीबन 1,478 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. CM ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में आने का रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य साध रही हैं. यह चुनाव उनकी राजनीतिक विरासत को बचाने का भी चुनाव है. 

हाल के सालों में बंगाल में बीजेपी का जनाधार बढ़ा है. हालांकि, बहुमत के आंकड़े को कभी पार नहीं कर पाई है. 2021 में बीजेपी ने 77 सीटें जीतीं थी. इस बार राज्य में दो चरण में चुनाव होंगे. इस बार का चुनाव बीजेपी और टीएमसी के बीच है. इसमें कांग्रेस और कम्युनिस्ट एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं.


पहले चरण का चुनाव उत्तरी बंगाल और बॉर्डर से जुड़े जिलों में हो रहा है. इसमें घुसपैठ, पहचान और आदिवासी राजनीतिक मुद्दे हावी हैं. चुनाव की नाजुकता को देखते हुए सुरक्षा टाइट कर रखी है. साथ ही हजारों की संख्या में संवेदनशील बूथ और अति संवेदनशील बूथ के रूप में इन्हें चिन्हित किया गया है. केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू है.  इसके अलावा लक्ष्मी भंडार चुनावी योजनाएं इस चुनाव को प्रभावित कर सकती हैं.  इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य में हटाए गए नाम, नागरिकता, विदेशी, घुसपैठिया और फर्जी मतदाता जैसे मुद्दों का बोलबाला रहा. 


(इस बार के चुनाव प्रचार के छाए रहे ये 10 मुख्य मुद्दे...)

'हटाए गए नाम' और नागरिकता पर बहस

इस बार का चुनाव प्रचार मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे के इर्द-गिर्द रहा. टीएमसी का आरोप है कि नाम गायब होना ही नागरिकता के लिए खतरा है. बीजेपी इसे गलत तरीके से बनाए गए मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया करार दे रही है. 


SIR पर विवाद

इस बार के चुनाव में एसआईआर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है.  इस प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने राज्य से 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. 27 लाख मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति की श्रेणी में हैं. TMC का आरोप है कि असली वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है. BJP का कहना है कि यह वोटर लिस्ट की सफाई है.

महिला आरक्षण बिल पर विवाद

2029 तक महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन संसद में लागू न होने पाना एक मुद्दा है.  ममता बनर्जी  का कहना है कि BJP ने इसे परिसीमन से जोड़ दिया है, और इसे बांटने वाला कदम बताया है. वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने TMC पर महिलाओं के सशक्तिकरण में रुकावट डालने का आरोप लगाया है. 

विदेशी / घुसपैठिया / नागरिकता का नैरेटिव

BJP अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और घुसपैठियों का मुद्दा उठा रही है. वहीं टीएमसी का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी अल्पसंख्यकों और बंगाली पहचान को निशाना बनाती है. 

ED के छापे और I-PAC विवाद

ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने इस बार के चुनाव प्रचार पर असर डाला है. I-PAC पर हुई कार्रवाई से चुनाव प्रचार के काम में रुकावट आई. यह कंपनी ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति बनाती है. टीएसमी ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है. वहीं बीजेपी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करार दिया है. 


खाने की राजनीति 'मछली बनाम शाकाहार'

राज्य में भात मछली एक प्रतीकात्मक सांस्कृतिक मुद्दा है. TMC का दावा है कि BJP मछली, मांस और अंडे (जो बंगाली खाने का मुख्य हिस्सा हैं) पर रोक लगा सकती है. BJP इस डर को दूर करने के लिए मछली के साथ चुनाव प्रचार कर रही है. 

PM का झालमुड़ी वाला पल

पीएम मोदी का झारग्राम रैली के बाद झालमुड़ी खाने वाले वीडियो ने राज्य के लोगों का दिल जीता है. यह इस चुनाव का वायरल फुटेज साबित हुआ है. टीएमसी ने इसे राजनीतिक दिखावा और नाटक बताया है. 

बाहरी बनाम भद्रलोक का नैरेटिव

इधर, टीएमसी एक तरफ बीजेपी को बाहरी बता रही है. तो वहीं बीजेपी राष्टीय एकता के तहत इसका जवाब दे रही है. 

सीमा पर घुसपैठ और आबादी में बदलाव

इस बार के चुनाव में बीजेपी ने घुसपैठ और आबादी में आए बदलाव को लेकर मुद्दा बनाया हुआ है. यह बीजेपी का मुख्य चुनावी मुद्दा है. बीजेपी का दावा है कि घुसपैठ की वजह से आबादी में बदलाव भी हुआ है. .साथ ही टीएमसी इसे डर की राजनीति बता रही है. 

कल्याणकारी योजनाएं बनाम पहचान की राजनीति

टीएमसी एक तरफ अपनी सरकारी योजनाओं को जनता के सामने रख रही है, तो वहीं बीजेपी इस बार सोनार बांग्ला का मुद्दा लेकर चुनावी मैदान में रही. 

2011 से सत्ता में है टीएमसी

पिछली बार पश्चिम बंगाल में जबरदस्त वोटिंग हुई थी. कुल 83.18% वोटिंग हुई थी. तृणमूल कांग्रेस राज्य में पिछले 2011 से सत्ता में है.  ममता बनर्जी रिकॉर्ड चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है.  BJP का ध्यान पहचान से जुड़े मुद्दों, शासन संबंधी चिंताओं और सत्ता-विरोधी लहर पर केंद्रित होने से यह मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है.


जिन सीटों पर होनी है वोटिंग उन जगहों पर क्या हाल? 
अगर पश्चिम बंगाल में पहले चरण की सीटों पर नजर डालें तो यहां टीएमसी के पास 92 सीटें हैं, तो वहीं बीजेपी के पास 59 सीटें हैं. इनमें एक निर्दलीय है. करीबन 3.6 करोड़ वोटर पहले चरण में वोट डालेंगे. इनमें 1.84 पुरुष वोटर हैं, तो वहीं महिला वोटर 1.75 करोड़ हैं. 

इन सीटों पर टीएमसी के 149 उम्मीदवार हैं, तो वहीं बीजेपी के 152 उम्मीदवार हैं. वहीं कांग्रेस के 151 उम्मीदवार हैं. सीपीएम ने 98 सीटों पर उम्मीवार उतारे हैं.  CPI के 13 उम्मीदवार और एआईएमआईएम के 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. 

इन सीटों पर नजर रहेगी

  • इस चुनाव में पूर्व मेदिनीपुर की नंदीग्राम विधानसभा सीट से बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी टीएमसी के पवित्र कर से मुकाबला है. अधिकारी ममता बनर्जी के मुखर विरोधी हैं. इसके अलावा दक्षिण मेदिनीपुर में खड़गपुर सदर से बीजेपी ने दिलीप घोष को चुनावी मैदान में उतारा है. यहां प्रदीप सरकार टीएमसी की तरफ से मैदान में उतरे हैं. 
  • बंगाल की मुर्शिदाबाद के बहरमपुर सीट से कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी चुनावी मैदान में हैं. यहां टीएमसी के नारू गोपाल मुखर्जी चुनावी मैदान में हैं. साथ ही कूच बिहार के माथाभांगा से बीजेपी के निशीध चुनावी मैदान में हैं. उनका मुकाबला टीएमसी के सबलू बर्मन से है. 
  • पश्चिमी बर्धमान की आसनसोल दक्षिण से बीजेपी ने अग्निमित्रा पॉल को चुनाव में उतारा है. यहां उनके सामने तापस बनर्जी टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. कूच बिहार के दिनहाटा में टीएमसी के उदयन गुहा चुनावी मैदान में हैं. यहां बीजेपी ने अजय राय को चुनाव में उतारा है. हरिरामपुर से टीएमसी के बिपल्ब मित्रा का मुकाबला देबब्रत मजूमदार से है. इसके अलावा मुर्शिदाबाद की जंगीपुर सीट से टीएमसी ने जाकिर हुसैन को चुनावी मैदान में उतारा है. यहां से बीजेपी ने चित्त मुखर्जी को टिकट दिया है. 
  • मोयना की पुरबा मेदिनीपुर सीट से बीजेपी के अशोक डिंडा चुनावी मैदान में हैं. वहीं टीएम सी चंदन मंडल चुनाव लड़ रहे हैं. मुर्शिदाबाद के डोकमल सीट पर टीएमसी ने डॉ. हुमायूं कबीर को टिकट दिया है. इनके सामने बीजेपी के नंदूलाल पाल हैं. यह बाबरी मस्जिद वाले हुमायूं कबीर नहीं हैं. 
  • मुर्शिदाबाद के रेजनीगर विधानसभा से आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर चुनावी मैदान में हैं. यहां उनकी सीधी टक्कर टीएमसी के अताउर रहमान से है. इसके अलावा हुमायूं कबीर नाउदा सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं. 

यह भी पढ़ें: पहलगाम हमले की पहली बरसी पर देश भावुक, जम्मू के स्कूलों ने 26 निर्दोषों की याद में दी गई श्रद्धांजलि

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