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UP Elections 2022: यूपी के देवरिया में जनता किसके सिर बांधेगी जीत का सेहरा? फिर खिलेगा ‘कमल’ या दौड़ेगी ‘साइकिल’?

UP Elections (Deoria Chunav Yatra): वर्तमान में देवरिया जिले की सात विधानसभा सीटों में से छह सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी के पास है.

UP Elections (Deoria Chunav Yatra):  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों का बिगल बज चुका है. 10 मार्च को तय हो जाएगा कि सूबी की सत्ता पर कौन विराजमान होगा. एबीपी न्यूज़ की चुनावी यात्रा में आज हम आपको देवरिया जिले की सात विधानसभा सीटों के बारे में बता रहे हैं. यहां सात में से छह सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी के पास है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि यहां फिर एक बार कमल खिलेगा या साइकिल को दौड़ने का मौका मिलेगा?

देवरिया के बारे में जानिए

देवरिया उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक निर्वाचन क्षेत्र है, जो उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के देवरिया शहर को कवर करता है. 1952 से 1967 तक इस सीट को देवरिया उत्तर विधानसभा के नाम से जाना जाता था. 1967 में इस सीट को बदलकर देवरिया कर दिया गया. वर्तमान में यह सीट बीजेपी के सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी की है, जिन्होंने 2020 के उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार बीएस त्रिपाठी को लगभग 20 हजार वोटों के अंतर से हराया था.

2011 की जनगणना के अनुसार देवरिया जिले की जनसंख्या 3,100,946 है. यह इसे भारत में (कुल 640 में से) 114वें स्थान पर रखता है. जिले का जनसंख्या घनत्व 1,220 निवासी प्रति वर्ग किलोमीटर (3,200/वर्ग मील) है. 2001-2011 के दशक में इसकी जनसंख्या वृद्धि दर 14.23% थी. देवरिया में प्रत्येक 1000 पुरुषों पर 1013 महिलाओं का लिंगानुपात है और साक्षरता दर 73.53% है.

भारत की 2011 की जनगणना के समय, जिले की 85.80% आबादी भोजपुरी, 12.67% हिंदी और 1.40% उर्दू को अपनी पहली भाषा के रूप में बोलती थी. देवरिया में बोली जाने वाली स्थानीय भाषाओं में भोजपुरी भाषा और अंग्रेजी भाषा के साथ बोली जाने वाली हिंदी भी शामिल है, जो देवनागरी और कैथी दोनों में लिखी गई लगभग 40,000 वक्ताओं हैं.

देवरिया नाम कहां से आया?

देवरिया नाम 'देवरन्या' या शायद 'देवपुरिया' से लिया गया है. आधिकारिक राजपत्र के अनुसार, जिले का नाम 'देवरिया' इसके मुख्यालय के नाम 'देवरिया' से लिया गया है और देवरिया शब्द का अर्थ आम तौर पर वह स्थान होता है, जहां मंदिर होते हैं. देवरिया नाम एक जीवाश्म (टूटे हुए) शिव मंदिर द्वारा विकसित किया गया है, जो इसके उत्तर में 'कुर्ना नदी' के किनारे है. कुशीनगर (पडरौना) जिला 1994 'मई' में देवरिया जिले के पूर्वोत्तर भाग को अलग करके अस्तित्व में आया था.

सजावटी वस्तुओं के मशहूर है देवरिया जिला

देवरिया जिले में एक जिले एक उत्पाद के तहत यहां सजावटी सामान रखा जाता है और इस जिले में सजावटी वस्तुओं को इतना सुंदर बनाया जाता है कि कोई भी इसे देखकर हैरान रह जाएगा. इन वस्तुओं को महिलाओं ने घर पर बनाया है और बाजार में इन वस्तुओं की बिक्री बढ़ रही है. कुछ लोग यहां सिलाई भी करते हैं. अंजलि जो इस काम से जुडी हैं उन्होंने बताया की "इस समय समूह की स्थिति बहुत अच्छी है, क्योंकि ओडीओपी के माध्यम से जो उत्पाद बनता है वह फ्लिपकार्ट और अन्य में भी बेचा जाता है. पहले हमारे सामान स्थानीय बाजारों में ही बिकते थे, लेकिन आज दुनिया भर में ओडीओपी के माध्यम से हमारे उत्पाद आसमान छू रहे हैं. आय में अच्छी वृद्धि हुई है, क्योंकि पहले बाजार की कमी के कारण महिलाओं की आय कम होती थी, लेकिन आज महिलाएं मदद और अच्छी मार्केटिंग से आसानी से 2500-3000 रुपये कमा रही हैं. कुछ मेहनती महिलाएं भी 7000-8000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं."

सरकार ने कितनी की मदद?

अंजलि का कहना है, "हमें सरकार से बहुत मदद मिली है, क्योंकि पहले जब मैंने इन सब की व्यवस्था करना शुरू किया तो मुझे पता चला कि ओडीओपी के माध्यम से एक जिला एक उत्पाद, हमें ऋण मिल रहा है. इसलिए ओडीओपी मार्जिन के अनुसार मैंने 5 लाख का ऋण लिया. हमें 125000 की सब्सिडी मिली और हमने उस पैसे का इस्तेमाल व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने के लिए किया." व्यवस्थाओं के अलावा महिलाएं भी आगे बढ़ी हैं. कुछ बैग, झूमर बना रही हैं. यकीन मानिए यह झूमर गोरखपुर से बंगाल और हमारे देश से विदेशी जगहों पर घूम रहा है. जो महिलाए यहां काम करती हैं, उनका कहना है, ‘’मैं बैग और झूमर बनाती हूं और इसकी विशिष्टता यह है कि यह बहुत अधिक बिकता है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है.

यह जिला घरेलू साज-सज्जा और अन्य सजावटी वस्तुओं जैसे झूमर, झालर, पर्दे आदि पर बुनाई और कढ़ाई के काम के लिए प्रसिद्ध है. इन उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बिहार और देश के अन्य हिस्सों में बिक्री के लिए भेजा जाता है.

बीजेपी क्या दावा कर रही है?

बीजेपी के जिला अध्यक्ष अंतर्यामी सिंह का दावा है, ‘’हम 7 में से 7 सीटें जीतेंगे, क्योंकि हमने अपने काम से लोगों का विश्वास हासिल किया है. हमारा नेतृत्व बेदाग है. पहली बार गुंडा-माफिया पर लगाम लगी है. सरकार की सीधी योजनाएं समाज के अंतिम लोगों तक पहुंची हैं और इसी के आधार पर हम जीतेंगे."

कांग्रेस क्या दावा कर रही है?

कांग्रेस के पुरुषोत्तम सिंह का कहना है, "कांग्रेस कम से कम 3-4 सीटें जीतेगी. प्रियंका गांधी ने नारा दिया था, "हां देवी, सर्व भूत शु..." उन्होंने लड़की को पहली प्राथमिकता दी है और "लड़की हूं लड़ सकती हूं" का नारा दिया है. उन्होंने 40% महिलाओं की सुरक्षा पर काम किया है जो किसी अन्य दल द्वारा नहीं किया गया हैय दूसरों ने लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया है. कांग्रेस पार्टी ने किसान मजदूरों और युवाओं के रोजगार पर काम किया है. कांग्रेस पार्टी के जाने के बाद उत्तर प्रदेश में कोई विकास नहीं हुआ है."

जनता को सपा से आस?

स्थानीय नागरिक राम प्रताप चौहान का कहना है, ‘’कमल अब गंदा हो गया है. इसे साफ करना पड़ेगा. यूपी में महिलाओ का चीयर हरण होता है. अभी दो महीना पहले ही ऐसी घटना हुई है. अखिलेश यादव ही हैं, जो अपराध से बचा सकते हैं. यह सब मैं नहीं बोल रहा, लेकिन यहां के लोग बोल रहे हैं." वहीं, बीजेपी के सोशल मीडिया प्रभारी अजीत भारती का कहना है, "राम हमारे हैं. सपा वाले राजा राम को नहीं पूजते हैं. राम किनके हैं, यह सब लोग जनते हैं. जो राम को लाये हैं, हम उनको लाएंगे. यह मैं नहीं उत्तर प्रदेश की जनता कह रही है. समाजवादी पार्टी राम नाम का झूठ प्रचार करती है.’’

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