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ओडिशाः पांचवीं बार सीएम बनेंगे नवीन पटनायक, शपथ ग्रहण समारोह आज
ओडिशा में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्ताधारी बीजू जनता दल ने शानदार प्रदर्शन करते हए 21 में से 13 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की. इन लोकसभा चुनाव में बीजेडी ने राज्य में 42.76 फीसदी वोट हासिल किए.

नई दिल्लीः ओडिशा में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने वाले नवीन पटनायक कल लगातार पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. नवीन पटनायक कल भुवनेश्वर के IDCO प्रदर्शनी मैदान में सुबह 10.30 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. शपथ गहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पेट्रोलियम मंत्री और बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान को भी आमंत्रण भेजा गया है. हालांकि पीएम मोदी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे या नहीं ये साफ नहीं है. ओडिशा में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्ताधारी बीजू जनता दल ने शानदार प्रदर्शन करते हए 21 में से 13 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की. इन लोकसभा चुनाव में बीजेडी ने राज्य में 42.76 फीसदी वोट हासिल किए. वहीं अगर विधानसभा नतीजों की बात करें तो 147 सीटों में से 112 सीटों पर बीजेडी ने जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया. बीजेडी को विधानसभा चुनाव में 44.71 फीसदी वोट मिले. राज्य में आक्रमक प्रचार करने वाली बीजेपी का भी आधार बढ़ा और पार्टी को 7 लोकसभा सीटों पर जीत मिली. 23 विधानसभा सीटें जीतने में भी बीजेपी को इस तटवर्ती राज्य में सफलता मिली. ओडिशा के मुख्यमंत्री पद की लगातार पांचवीं बार शपथ लेने से एक दिन पहले नवीन पटनायक मंगलवार को पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की. पटनायक ने मंदिर के बाहर कहा, 'भुवनेश्वर में कल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले मैंने ओडिशा के लोगों के लिए भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की.' श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने पटनायक को भगवान के वस्त्र भेंट किए. पटनायक ने इससे पहले 2000, 2004, 2009 और 2014 में राजभवन में सादे तरीके से शपथ ग्रहण की थी. वह पहली बार बुधवार को इडको एक्जिबिशन ग्राउंड में एक बड़े कार्यक्रम में सुबह साढ़े दस बजे शपथ लेंगे. 2000 में पहली बार सीएम बने थे पटनायक 72 साल के नवीन पटनायक 2000 में पहली बार ओडिशा के सीएम बने थे. तब से लेकर अब तक नवीन पटनायक लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और 19 साल से सीएम की कुर्सी पर बने हुए हैं. 2009 के चुनाव से पहले नवीन पटनायक ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था और अकेले ही राज्य का चुनाव लड़ा. नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल पर एनडीए से अलग होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. बीजेडी ना सिर्फ 2009 का चुनाव जीतने में कामयाबी हुई, बल्कि 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद पटनायक की जीत का अतंर विरोधी पार्टियों के मुकाबले बढ़ गया.
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Source: IOCL


















