महाराष्ट्र में BJP-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने में दिक्कत नहीं, हरियाणा में निर्दलीय लगाएंगे बेड़ा पार
महाराष्ट्र में बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना को 159 सीटें मिली हैं. कांग्रेस और इसके सहयोगी को 100 सीटें मिली हैं. वहीं हरियाणा में बीजेपी 40 सीटों पर जीती है और कांग्रेस के खाते में 31 सीटें गई हैं. जेजेपी 10 सीटों पर विजयी हुए हैं.

Assembly Election 2019: केंद्र में मोदी सरकार के दोबारा सत्ता संभालने के ठीक 5 महीने बाद 2 अहम राज्यों के चुनावी नतीजों में बीजेपी अकेले अपने दम पर बहुमत जुटाने का जो दावा कर रही थी उसे पूरा नहीं कर पाई. आज महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों के नतीजे आए और दोनों ही राज्यों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. बीजेपी को हरियाणा और महाराष्ट्र में जो सीटें मिलीं हैं वो उसे अपनी बड़ी जीत बता रही है लेकिन सच्चाई ये है कि हरियाणा के 2014 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 47 सीटें मिलीं थीं और इस बार 40 सीटें मिलती दिख रही हैं. वहीं महाराष्ट्र में बीजेपी को 2014 विधानसभा में 122 सीटें मिलीं थी और इस बार अकेले बीजेपी सिर्फ 105 सीटों पर आगे है. यानि पिछले चुनाव के मुकाबले दोनों राज्यों में बीजेपी को सीटों का नुकसान हो रहा है.
हालांकि बीजेपी मुख्यालय में बीजेपी की इस जीत को भी जमकर सेलिब्रेट किया गया. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि इस जीत को दोनों राज्यों में पीएम मोदी के नेतृत्व पर लोगों के भरोसे और राज्यों के सीएम देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर पर लोगों की पसंद को मुहर के रूप में देखा जाए. वहीं पीएम मोदी ने महाराष्ट्र-हरियाणा में जीत पर कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि जनता का भरोसा बीजेपी पर कायम है.
महाराष्ट्र और हरियाणा में क्या रहे नतीजे महाराष्ट्र में बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना को 159 सीटें मिली हैं. इसके अलावा कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को 100 सीटें मिली हैं. अन्य के खाते में 29 सीटें गई हैं. हरियाणा की बात करें तो यहां बीजेपी बहुमत के जादुई आंकड़े 46 से 6 सीट पीछे रह गई है. बीजेपी ने यहां 90 में से 40 सीटें जीती हैं और कांग्रेस को 31 सीटों पर जीत मिली है. जेजेपी 10 सीटों पर जीती है और अन्य के खाते में 9 सीटें गई हैं.
हरियाणा: 40 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी बीजेपी, कांग्रेस 15 से बढ़कर 31 पर पहुंची
महाराष्ट्रः महाराष्ट्र में 105 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बहुमत के आंकड़े 145 से पीछे रह गई. हालांकि शिवसेना के साथ गठबंधन में मिलकर दोनों पार्टियां 159 सीटों का आंकड़ा छू रही हैं. बता दें कि महाराष्ट्र में 288 सीटों के लिए 145 सीटों पर जीत की जरूरत है और साथ मिलकर बीजेपी-शिवसेना दोबारा सत्ता पर आसानी से काबिज हो सकती हैं. लेकिन इसमें भी एक पेंच है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ कर दिया है कि वो सीएम पद के लिए 50-50 के फॉर्मूले पर चलेगी और इसपर बीजेपी के साथ समझौता नहीं करेगी. यानी ढाई साल के लिए बीजेपी का सीएम और ढाई साल के लिए शिवसेना का सीएम होगा. महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस का कहना है कि सीएम पद के लिए फैसला लिया जाएगा और उसी समझौते के आधार पर लिया जाएगा जो चुनाव से पहले शिवसेना के साथ हुआ था.

2014 में शिवसेना 282 सीटों पर लड़ी थी और 63 पर जीती थी, इस बार शिवसेना 126 सीटों पर लड़ी है और 56 सीटें जीत रही हैं. 2014 में बीजेपी ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ा और तब उसे 122 सीटें मिली थीं और इस बार शिवसेना के साथ लड़ने पर ये आंकड़ा 110 से भी नीचे आ गया. 2014 की तुलना में बीजेपी का वोट प्रतिशत भी घटा है. 2014 में बीजेपी का वोट प्रतिशत 27.81 फीसदी था जो 2019 में घटकर 25.61 फीसदी रह गया है. महाराष्ट्र में बीजेपी ने 200 पार का नारा दिया था इसीलिए शिवसेना के साथ हाथ भी मिलाया लेकिन दोनों मिलकर भी 200 के आसपास नहीं पहुंच पाए. ऐसे में विपक्षियों का कहना है कि इस चुनाव में बीजेपी का राष्ट्रवाद नहीं चला. वहीं सीएम फडणवीस का कहना है कि पिछली बार हमने सारी सीटों पर चुनाव लड़कर 122 सीटें मिली थी और इस बार 164 सीटों पर चुनाव लड़कर 105 सीटें जीती हैं इस लिहाज से हमारा स्ट्राइक रेट इस बार बढ़ा है.
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हरियाणा हरियाणा के 2014 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 47 सीटें मिलीं थी जो इस बार घटकर 40 पर अटकती दिख रही हैं. हालांकि 2014 की तुलना में बीजेपी का वोट प्रतिशत 33.20 फीसदी से बढ़कर 36.40 फीसदी पर पहुंच गया है. हरियाणा में 40 सीटें जीत कर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी फिर भी बहुमत नहीं हासिल कर पाई. पार्टी के 8 मौजूदा मंत्री हार गए.

वहीं कांग्रेस की बात करें तो 2014 में इसने 15 सीटें जीती थीं जो 2019 में बढ़कर 31 सीटें हो गई हैं यानी पार्टी की सीटें दोगुनी हो गई हैं. हरियाणा में कांग्रेस की इस जीत के पीछे भूपेंद्र सिंह हुड्डा का चेहरा माना जा रहा है. हुड्डा को राहुल गांधी की पसंद नहीं माना जाता है. राहुल गांधी ने हरियाणा में ज्यादा प्रचार भी नहीं किया और हुड्डा के साथ एक मंच पर भी नहीं आए. बावजूद इसके कांग्रेस ने अच्छी वापसी की. हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी का शानदार प्रदर्शन रहा. ये पार्टी 10 महीने पहले बनी और 10 सीटों पर जीतकर किंग मेकर की भूमिका में होने का दावा कर रही है.
हरियाणा में बीजेपी को मिलेगा निर्दलीयों का साथ हरियाणा में बीजेपी भले ही 40 सीटें जीतकर बहुंत से 6 सीटें दीर रह गई है लेकिन उसे भरोसा है वो राज्य में सरकार बना लेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि हरियाणा में हरियाणा लोकहित पार्टी के नेता गोपाल कांडा ने बीजेपी को समर्थन देने का एलान कर दिया है और उनके भाई गोविंद कांडा ने ये जानकारी खुद दी है. इतना ही नहीं वो अपने साथ कुछ और विधायकों को दिल्ली ला रहे हैं जो बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार हैं. इसलिए बीजेपी भरोसा कर जता रही है कि इनके समर्थन से वो सरकार बना लेगी. गोपाल कांडा के साथ इन संभावित विधायकों के नाम धर्मपाल गोंदर, रंजीत चौटाला, बलराज कुंडू, सोमबीर सांगवान और नयन पाल हैं.
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