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Bihar Election Result 2025: कांटे की शुरुआत के बाद एकतरफा मुकाबला, जानें दो घंटे की मतगणना के दौरान की बड़ी बातें

बिहार विधानसभा चुनाव में शुरुआती दो घंटे की मतगणना काफी उतार-चढ़ाव भरी रही. पहले बुरी तरह पिछड़ रहा महागठबंधन अचानक एनडीए को टक्कर देता नजर आया, लेकिन चीजें एकदम बदल गईं.

बिहार विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती जारी है, लेकिन शुरुआती दो घंटे में रुझानों ने हर किसी सांसें ऊपर-नीचे कर दीं. सबसे पहले जनसुराज ने पहला रुझान अपने नाम करके खलबली मचाई, लेकिन एनडीए एकतरफा बढ़त हासिल करके एग्जिट पोल्स के दावों को सही साबित करती दिखी. इसके बाद महागठबंधन ने अचानक तेजी दिखाते हुए कांटे की टक्कर दी, लेकिन अब मुकाबला एकतरफा नजर आ रहा है. आइए जानते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती दो घंटे कैसे रहे? इस दौरान किस पार्टी का क्या हाल रहा? 

एनडीए लगातार आगे, कभी नहीं पिछड़ा

शुरुआती दो घंटे के रुझानों की बात करें तो तमाम एग्जिट पोल्स में किए गए दावों को एनडीए ने सही ठहराया. इस गठबंधन ने शुरुआत में ही बढ़त हासिल कर ली और सुबह 10 बजे तक इसे कायम रखा है. हालांकि, जब रुझानों में एनडीए और महागठबंधन के बीच 91-91 सीटों पर टाई हुआ तो रोमांच बढ़ गया था, लेकिन यह खुशी चंद पलों में ही काफूर हो गई और एनडीए ने दोबारा बढ़त बना ली. हालांकि, यह हकीकत है कि इन उतार-चढ़ावों के बावजूद एनडीए एक बार भी किसी भी पार्टी से नहीं पिछड़ा. खबर लिखे जाने तक एनडीए ने 161 सीटों पर बढ़त बना रखी है. 

एनडीए में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

कहा जाता है कि किसी भी मैदान में कदम रखने के बाद बीजेपी पहले क्षेत्रीय पार्टी को 'बड़ा भाई' बनाती है और बाद में धीरे-धीरे खुद 'बड़े भाई' की भूमिका में आ जाती है. बिहार विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में कुछ ऐसा ही नजर आया. दरअसल, एक वक्त ऐसा भी रहा, जब बीजेपी ने 78 सीटों पर बढ़त बना ली थी. इससे बीजेपी सिर्फ एनडीए ही नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सबसे बड़ी पार्टी बनती नजर आई. हालांकि, 10 बजे तक बीजेपी की बढ़त सिर्फ 68 सीटों पर ही रह गई.

जेडीयू ने बेहतर किया पिछला प्रदर्शन

2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने भले ही बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी, लेकिन सीटों के मामले में वह तीसरे पायदान पर रह गई थी. 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू की झोली में सिर्फ 43 सीटें आई थीं. अब 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन को सुधारती दिख रही है और सुबह 10 बजे तक जेडीयू ने 76 सीटों पर बढ़त बना रखी है और वह सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है.

क्या सबसे बड़ी पार्टी बनेगी आरजेडी?

बिहार की राजनीति के पिछले 3 विधानसभा चुनावों यानी कि 15 साल की बात करें तो आरजेडी हर बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. 2010 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने 115 सीटें जीती थीं तो 2015 के चुनाव में पार्टी की झोली में 80 सीटें गई थीं. इसके अलावा 2020 के विधानसभा चुनाव में सरकार भले ही एनडीए की बनी थी, लेकिन आरजेडी 75 सीटों के साथ पहले पायदान पर रही थी. हालांकि, आरजेडी अपना यह प्रदर्शन 2025 के चुनावों में दोहराती नजर नहीं आ रही है. सुबह 10 बजे तक के रुझानों में आरजेडी सिर्फ 64 सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है. 

कांग्रेस का बुरा हाल

2025 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हालत बेहद खराब नजर आ रही है. पार्टी ने 61 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सुबह 10 बजे तक वह सिर्फ 12 सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है. कांग्रेस का यह प्रदर्शन 2020 के नतीजों से भी खराब है, क्योंकि उस दौरान पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

चिराग ने दिखाया दम

बिहार विधानसभा चुनाव के अब तक के रुझानों में चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति (रामविलास) ने दम दिखाया है. दरअसल, 2015 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 2 सीटें जीती थीं तो 2020 में वह सिर्फ एक ही सीट जीत पाई थी. इस बार उन्होंने एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जिसके बाद उन्हें 29 सीटें दी गई थीं. सुबह 10 बजे तक पार्टी करीब 14 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

जनसुराज का जोश लो

बिहार की 'आम आदमी पार्टी' बनने की कोशिश में लगी प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को इन विधानसभा चुनावों में निराशा हाथ लगी है. राज्य की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रहे प्रशांत किशोर को तगड़ा झटका लगा है. उनकी पार्टी एक भी सीट पर बढ़त बनाती नहीं दिख रही है.

ये भी पढ़ें: इलेक्शन कमीशन के रुझानों में नीतीश कुमार की JDU बनी सबसे बड़ी पार्टी, BJP को पछाड़ा, महागठबंधन का हाल

खबर कोई भी हो... कैसी भी हो... उसकी नब्ज पकड़ना और पाठकों को उनके मन की बात समझाना कुमार सम्भव जैन की काबिलियत है. मुहब्बत की नगरी आगरा से मैंने पत्रकारिता की दुनिया में पहला कदम रखा, जो अदब के शहर लखनऊ में परवान चढ़ा. आगरा में अकिंचन भारत नाम के छोटे से अखबार में पत्रकारिता का पाठ पढ़ा तो लखनऊ में अमर उजाला ने खबरों से खेलना सिखाया. 

2010 में कारवां देश के आखिरी छोर यानी राजस्थान के श्रीगंगानगर पहुंचा तो दैनिक भास्कर ने मेरी मेहनत में जुनून का तड़का लगा दिया. यहां करीब डेढ़ साल बिताने के बाद दिल्ली ने अपने दिल में जगह दी और नवभारत टाइम्स में नौकरी दिला दी. एनबीटी में गुजरे सात साल ने हर उस क्षेत्र में महारत दिलाई, जिसका सपना छोटे-से शहर से निकला हर लड़का देखता है. साल 2018 था और डिजिटल ने अपना रंग जमाना शुरू कर दिया था तो मैंने भी हवा के रुख पकड़ लिया और भोपाल में दैनिक भास्कर पहुंच गया. 

झीलों के शहर की खूबसूरती ने दिल और दिमाग पर काबू तो किया, लेकिन जरूरतों ने वापस दिल्ली ला पटका और जनसत्ता में काफी कुछ सीखा. यह पहला ऐसा पड़ाव था, जिसकी आदत धारा के विपरीत चलना थी. इसके बाद अमर उजाला नोएडा में करीब तीन साल गुजारे और अब एबीपी न्यूज में बतौर फीचर एडिटर लोगों के दुख-दर्द और तकलीफ का इलाज ढूंढता हूं. करीब 18 साल के इस सफर में पत्रकारिता की दुनिया के हर कोने को खंगाला, चाहे वह रिपोर्टिंग हो या डेस्क... प्रिंटिंग हो या मैनेजमेंट... 

काम की बात तो बहुत हो चुकी अब अपने बारे में भी चंद बातें बयां कर देता हूं. मिजाज से मस्तमौला तो काम में दबंग दिखना मेरी पहचान है. घूमने-फिरने का शौकीन हूं तो कभी भी आवारा हवा के झोंके की तरह कहीं न कहीं निकल जाता हूं. पढ़ना-लिखना भी बेहद पसंद है और यारों के साथ वक्त बिताना ही मेरा पैशन है. 

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