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16 नहीं 6 घंटे पढ़कर भी निकल सकता है UPSC, जानें सही तरीका

UPSC क्रैक करने के लिए 16 घंटे रटने के बजाय रोज 6 घंटे की स्मार्ट स्टडी, सटीक स्ट्रेटजी और फोकस्ड टाइम मैनेजमेंट काफी है. जानिए कैसे कंसिस्टेंसी और सही विजन आपको टॉपर बना सकता है.

UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है, और इसी वजह से ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि इसे पास करने के लिए दिन में 15 से 16 घंटे पढ़ाई करनी ही पड़ेगी. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. कई टॉपर्स के इंटरव्यू और उनकी तैयारी की कहानियां बताती हैं कि यूपीएससी घंटों की गिनती की नहीं, बल्कि सही रणनीति और लगातार मेहनत की परीक्षा है. सही तरीके से पढ़ाई की जाए तो 6 घंटे की फोकस्ड स्टडी भी इस परीक्षा को पास कराने के लिए काफी हो सकती है.

घंटों से ज्यादा जरूरी है क्वालिटी स्टडी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक बिना फोकस के पढ़ने से बेहतर है कि कम समय में पूरे ध्यान के साथ पढ़ाई की जाए. कई टॉपर्स ने अपने इंटरव्यू में बताया है कि पढ़ाई के घंटे हर कैंडिडेट के हिसाब से अलग-अलग होते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोई तैयारी के किस स्टेज पर है और उसकी बाकी जिम्मेदारियां क्या हैं. जो अभ्यर्थी नौकरी करते हुए तैयारी कर रहे हैं, वे भी रोजाना 5 से 6 घंटे की समझदारी से की गई पढ़ाई के दम पर परीक्षा पास कर चुके हैं.

सीमित किताबों को बार-बार पढ़ना ज्यादा फायदेमंद

टॉपर्स की तैयारी में एक बात कॉमन देखी जाती है, वे बहुत सारी किताबें इकट्ठा करने के बजाय सीमित और भरोसेमंद स्टडी मटीरियल को बार-बार दोहराते हैं. एनसीईआरटी की किताबों से बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर करना पहला कदम माना जाता है, क्योंकि इतिहास, भूगोल, राजनीति और अर्थशास्त्र जैसे विषयों की नींव यहीं से मजबूत होती है. इसके बाद करंट अफेयर्स को स्टैटिक सिलेबस से जोड़कर पढ़ना और पिछले सालों के प्रश्नपत्रों का लगातार अभ्यास करना तैयारी को असरदार बनाता है.

डेली रूटीन में क्या-क्या होना चाहिए शामिल?

एक अच्छे डेली रूटीन में सुबह अखबार पढ़कर जरूरी करंट अफेयर्स नोट करना, दिन में एक या दो बड़े विषयों की पढ़ाई करना और पहले पढ़े गए टॉपिक्स को रिवाइज करना शामिल होता है. इसके साथ ही रोजाना एक-दो आंसर लिखने की प्रैक्टिस करना मेन्स परीक्षा के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. रिवीजन को तैयारी का सबसे अहम हिस्सा बताया जाता है, क्योंकि सिलेबस बहुत बड़ा होने की वजह से बिना दोहराए चीजें याद रखना मुश्किल हो जाता है.

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प्लानिंग भी है जरूरी

सिर्फ रोजाना का शेड्यूल बनाकर पढ़ना काफी नहीं है, बल्कि हफ्ते और महीने के हिसाब से भी लक्ष्य तय करने चाहिए. हफ्ते में उस विषय से जुड़ा सेक्शनल मॉक टेस्ट देना फायदेमंद रहता है जो उस हफ्ते पढ़ा गया हो, और उसके बाद गलतियों को ठीक करना जरूरी है. महीने के हिसाब से जीएस सिलेबस के किसी हिस्से को पूरा करने और फुल लेंथ टेस्ट देने का लक्ष्य रखने से बड़ा सिलेबस भी धीरे-धीरे कवर होता जाता है.

आखिरी महीनों में बढ़ानी पड़ती है रफ्तार

शुरुआत में भले ही 5 से 6 घंटे की पढ़ाई काफी हो, लेकिन परीक्षा के आखिरी 3 से 4 महीनों में ज्यादातर अभ्यर्थी रिवीजन और मॉक टेस्ट पर फोकस बढ़ाते हुए पढ़ाई के घंटे भी बढ़ा देते हैं. इस दौरान नई किताबें उठाने के बजाय पहले से पढ़े गए मटीरियल को बार-बार दोहराना और ज्यादा से ज्यादा प्रीवियस ईयर क्वेश्चन प्रैक्टिस करना बेहतर होता है. 

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मंदसौर, मध्यप्रदेश के दीनदयाल पाटीदार ABP न्यूज में बतौर इंटर्न कार्यरत हैं. मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे दीनदयाल की जनरल नॉलेज (GK) और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है. वह खबरों को सटीक और ज्ञानवर्धक तरीके से पेश करने का हुनर रखते हैं.

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