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DU Admissions 2022: इस बार DU में स्टेट बोर्ड से कम छात्रों को मिला एडमिशन, कहीं CUET तो नहीं बना वजह? जानते हैं

Delhi University Admission 2022: दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में इस बार स्टेट बोर्ड से कम स्टूडेंट्स को एडमिशन मिला है. कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट इसकी एक वजह हो सकता है.

Delhi Univeristy Admissions: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के अंडर ग्रेजुएट कोर्स में इस बार स्टेट बोर्ड के कम छात्रों को एडमिशन मिला है. इसके पीछे कारण हो सकता है कि इस बार डीयू यूजी कोर्स में प्रवेश क्लास 12वीं के स्कोर के आधार पर नहीं बल्कि कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के स्कोर के आधार पर दिया गया है. एक तरफ जहां आज से डीयू का नया सेमेस्टर शुरू हो गया है वहीं कॉलेज द्वारा जारी स्टूडेंट्स की लिस्ट में ये बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल बीए ऑनर्स पॉलिटिकल साइंस में हिंदू कॉलेज में स्टेट बोर्ड से 124 स्टूडेंट्स थे और इस बार केवल एक.

किस बोर्ड से कितने छात्र थे

अगर डिटेल में पिछले साल के आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल बीए (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस प्रोग्राम में पहली दो कट-ऑफ लिस्ट के बाद कुल 146 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ था. इनमें से 124 स्टूडेंट स्टेट बोर्ड थे. इनमें से 120 स्टूडेंट केरल बोर्ड से, 3 राजस्थान से और 1 हरियाणा बोर्ड से था.

इस साल के आंकड़ें क्या कहते हैं

वहीं इस साल दूसरे राउंड के सीट एलोकेशन के बाद स्थिति कुछ ऐसी है कि अभी तक कुल 59 स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया गया है इनमें से केवल एक स्टूडेंट केरल बोर्ड से है. हिंदू कॉलेज का बीए (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस प्रोग्राम, पिछले साल डीयू के 10 कार्यक्रमों में से एक था, जहां अनारक्षित सीटों के लिए पहली कटऑफ सूची 100% (चार विषयों में से सर्वश्रेष्ठ) थी.

पिछले साल इस प्रोग्राम के लिए कुल 102 एप्लीकेशन प्राप्त हुए थे जिसमें से 101 केरल बोर्ड से थे. हिंदू कॉलेज का बीए ऑनर्स पॉलिटिकल साइंस प्रोग्राम सीयूईटी में टॉप स्कोर करने वाले छात्रों की पहली पसंद है.

क्या वजह है स्टेट बोर्ड से कम छात्रों की

इस बारे में हिंदू कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर का कहना है कि अब तक हुए एडमिशन में ज्यादातर छात्र सीबीएसई बोर्ड के हैं और कुछ छात्र सीआईएससीई बोर्ड के हैं. दोनों ही नेशनल बोर्ड हैं. इनमें से ज्यादातर एडमिशन मिलने वालों का सीयूईटी स्कोर 800 में  795 या 800 था. इसके पीछे वजह सीयूईटी परीक्षा हो सकती है.

नेशनल बोर्ड के छात्रों को हुई कम दिक्कत

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये सीयूईटी का पहला साल था जिसकी वजह से समस्या हो सकती है क्योंकि स्टेट बोर्ड के छात्रों को तैयारी के लिए कम समय मिला. वहीं सीबीएसई के छात्र एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ते हैं और सीयूईटी परीक्षा एनसीईआरटी पुस्तकों पर ही आधारित थी. ये एक वजह हो सकती है कि स्टेट बोर्ड से कम छात्रों को इस बार डीयू के कुछ खास कोर्स में कम एडमिशन मिला है.

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