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IAS Success Story: चार बार असफलता का मुंह देखकर भी नहीं रुके शाहिद, पांचवी बार में पूरा किया बचपन का सपना और बन गये IAS

तेलांगना के नागरकुर्नूल जिले के मोहम्मद अब्दुल शाहिद का हौंसला काबिले-तारीफ है. बार-बार यूपीएससी परीक्षा में असफल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार आईएएस बनकर ही दम लिया.

Success Story Of IAS Mohammad Abdul Shahid: तेलांगना के नागरकुर्नूल जिले के एक छोटे से गांव थुम्मनपेट के शाहिद उन कैंडिडेट्स में से हैं जो बहुत कम उम्र में ही अपनी राह चुन लेते हैं. शाहिद ने बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनने का सपना देखा और समय आने पर पूरे जोर-शोर से तैयारियों में जुट गये. उनके इस सपने में उनका परिवार उनके साथ था पर किस्मत को कुछ और मंजूर था.

शाहिद एक-दो बार नहीं पूरे चार बार यूपीएससी परीक्षा में असफल हुये पर हर बार दोगुने जोश से तैयारी शुरू कर दी. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लायी और उनका बचपन का सपना अंततः साल 2018 में पूरा हो गया जब उन्होंने 57वीं रैंक के साथ यूपीएससी की यह परीक्षा पास कर ली.

दो परीक्षायें की एक साथ क्लियर –

किस्मत का खेल तो देखिये जहां चार साल तक शाहिद का किसी भी परीक्षा में चयन नहीं हो रहा था वहीं अंत में एक साथ दो परीक्षाओं में चयन हो गया. उसमें भी दूसरी परीक्षा आईएएस से भी ज्यादा कठिन. शाहिद ने आईएएस और आईएफएस दोनों परीक्षायें पास की हैं. आईएएस में जहां उनकी ऑल इंडिया रैंक 57 थी, वहां आईएफएस में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 45 हासिल की. जैसा की हम जानते हैं आईएएस से भी ज्यादा कठिन आईएफएस परीक्षा मानी जाती है जिसका कटऑफ भी ज्यादा जाता है लेकिन शाहिद ने उसे भी पास कर लिया.

आईएफएस के तीन महीने बाद आईएएस का इंटरव्यू था और शाहिद दिलो-जान से तैयारी में जुट गये क्योंकि उन्हें आईएएस ज्यादा पसंद था और आईएएस बनने का सपना ही उनके मन में बचपन से पल रहा था. तेलांगना से चयनित होने वाले शाहिद दूसरे उम्मीदावार बने. शाहिद की इस उपलब्धि पर उनकी मां रेहाना बेगम और पिता अनन के साथ ही पूरे जिले को बहुत गर्व है.

यूपीएससी के पहले की जिंदगी –

शाहिद, नागरकुर्नूल जिले के अचमपेट निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत बालमूर मंडल के थुम्मनपेट गांव से हैं. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा आचमपेट में की और बाद में वट्टम में जवाहर नवोदय स्कूल से बाकी की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज की बात करें तो उन्होंने सीबीआईटी से इंजीनियरिंग की और इसके बाद आई-गेट ग्लोबल सॉल्यूशंस में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम करने लगे. इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिये दिल्ली का रुख किया और साल 2015 से यूपीएससी की परीक्षा देने लगे.

उनका कहना है कि साल 2015 की परीक्षा के समय वे ठीक से तैयार नहीं थे पर उसके बाद के तीन अटेम्पट उन्होंने तैयारी के साथ ही दिये थे फिर भी उनका चयन नहीं हुआ. उनके मेन्स में खासकर ज्योग्राफी में बहुत खराब नंबर आते थे. लेकिन शाहिद दिल्ली एक सपना लेकर आये थे, जो उन्हें किसी भी कीमत पर पूरा करना ही था. आखिर उन्होंने ऐसा कर दिखाया.

ऑनलाइन कंटेंट खासकर ब्लॉग्स की ली मदद –

शाहिद कहते हैं कि उन्होंने अपनी पुरानी गलतियों से सीखा और एनालाइज किया कि कहां कमी रह जाती है. इसके बाद उन कमियों को दूर किया और इस काम में उनकी मदद की ऑनलाइन उपलब्ध खासतौर पर आईएएस की तैयारी के लिये बनाये गये ब्लॉग्स ने. उन्होंने अपनी तैयारी के लिये खूब ऑनलाइन कंटेंट यूज़ किया और जमकर मॉक टेस्ट दिये. वे अपने पर्सनल नोट्स बनाने पर काफी जोर देते हैं, जिनकी सहायता से परीक्षा के समय रिवीज़न किया जा सके.

वे मानते हैं कि उनकी पिछली असफलताओं के पीछे ठीक से रिवीज़न न कर पाना एक बड़ा कारण था. कैंडिडेट पढ़ाई तो बहुत सारी कर लेते हैं पर बिना रिवीज़न के सारी पढ़ायी व्यर्थ चली जाती है. और रिवीज़न ठीक से करने के लिये अपने बनाये छोटे नोट्स बहुत काम आते हैं.

परीक्षा के पहले के सात दिन होते हैं बहुत खास –

शाहिद ने एक साक्षात्कार में बताया कि कुछ बिंदु होते हैं जो तय करते हैं कि आप रैंक ला पायेंगे या नहीं. उनमें से सबसे जरूरी एक बिंदु है निबंध लेखन. वे मानते हैं कि अगर आपने इसमें प्रगाढ़ता हासिल कर ली तो दूसरे कैंडिडेट्स से 20 से 25 अंक आराम से अधिक पा सकते हैं. ये अंक आपकी रैंक बना सकते हैं. इसी तरह आंसर के सपोर्ट में छोटे-छोटे कम समय लेने वाले डायग्राम्स बनाना भी मदद करता है.

शाहिद मानते हैं कि यूपीएससी परीक्षा के तीनों चरणों के पहले के सात दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. इन्हीं दिनों में जो रिवीज़न कर लिया वही परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने में मददगार होता है. इसीलिये वे खुद के नोट्स बनाने पर जोर देते हैं क्योंकि इतने कम समय में केवल अपने नोट्स से ही रिवीज़न संभव होता है. इन्हीं स्ट्रेटजीस और प्रॉपर प्लानिंग के साथ ही पिछली गलतियों से सीखते हुये शाहिद ने अपनी सफलता का मार्ग खोला.

शाहिद का सफर यही सिखाता है कि असफलताओं से निराश होने से कुछ नहीं होता. अपनी कमियों को तलाशकर उन पर काम करें, उन्हें दूर करें और अगली बार और ज्यादा कोशिश करें. अगर आपकी कोशिश ईमानदार होगी तो सफलता जरूर मिलेगी.

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