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IAS Success Story: पहले IPS और फिर IAS, असम के इस बेटे ने इस स्ट्रेटजी के साथ पूरा किया UPSC का यह सफर

असम के अरण्यक सैकिया ने साल 2019 में यूपीएससी सीएसई परीक्षा में 59वीं रैंक के साथ टॉप किया है. इसके पहले साल 2017 में वे 148 रैंक लाकर आईपीएस के पद पर भी चयनित हो चुके हैं. जानते हैं अरण्यक से नोट्स मेकिंग टिप्स.

Success Story Of IAS Topper Aranyak Saikia: असम के अरण्यक हमेशा से यूपीएससी के क्षेत्र में नहीं आना चाहते थे. पहले उन्हें एकेडमिक्स में कैरियर बनाना था. हालांकि उनके परिवार में माता और पिता दोनों ही सिविल सर्वेंट हैं तब भी अरण्यक को इस क्षेत्र में खास रुचि नहीं थी. कुछ समय बीतने के बाद उनके पैरेंट्स ने उनसे यह क्षेत्र चुनने को कहा तो साल 2016 में अपना पोस्टग्रेजुएशन पूरा हो जाने के बाद उन्होंने इस ओर ध्यान दिया. कड़ी मेहनत और लग्न से अरण्यक ने पहले ही प्रयास में साल 2017 में आईपीएस रैंक हासिल कर ली पर उनका ऐम आईएएस था. खेलों के शौकीन अरण्यक ने दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में यूपीएससी सीएसई परीक्षा में नोट्स मेकिंग के महत्व और तरीके पर बात की. जानते हैं विस्तार से.

इकोनॉमिक्स के छात्र रहे हैं अरण्यक –

अरण्यक बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे थे और बाकी क्लासेस के अलावा दसवीं और बारहवीं में भी उन्होंने बहुत अच्छा स्कोर किया था. क्लास दस में अरण्यक के 10 सीजीपीए आए और क्लास 12 में 98.2 प्रतिशत अंक. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और 88 परसेंट अंकों के साथ डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने एम.फिल की डिग्री ली वो भी इकोनॉमिक्स विषय से ही. इकोनॉमिक्स के प्रति अरण्यक का यह लगाव आगे भी बना रहा और उन्होंने यूपीएससी में अपना ऑप्शनल विषय भी इसे ही चुना.

 यहां देखें अरण्यक सैकिया द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

एकेडमिक्स में हमेशा एक्सेल करने वाले अरण्यक किताबी कीड़ा नहीं हैं. पढ़ाई के अलावा उन्हें आउटडोर गेम्स में भी बहुत रुचि है और उन्होंने हमेशा समय निकालकर खेलों को टाइम दिया. बैडमिंटन, फुटबॉल और टेनिस उनके पसंदीदा गेम हैं. इसके साथ ही अरण्यक को रीडिंग, राइटिंग का भी शौक है.

यूपीएससी के लिए नोट्स मेकिंग को मानते हैं जरूरी –

अरण्यक कहते हैं यूपीएससी सीएसई परीक्षा के लिए नोट्स मेकिंग बहुत जरूरी है. पर सवाल यह उठता है कि नोट्स मेकिंग कब से शुरू करें तो इसका जवाब है एक साल पहले से. इस परीक्षा की तैयारी में तकरीबन एक साल का समय तो लग ही जाता है ऐसे में हर विषय को कवर करने के लिए और प्रॉपर रिवीजन के लिए एक साल के नोट्स काफी हैं.

अरण्यक आगे कहते हैं कि उन्होंने सी-सैट पोर्सन के लिए कोई नोट्स नहीं बनाए थे. इनके लिए वे एनसीईआरटी और ऐसी ही स्टैंडर्ड बुक्स को बार-बार रिवाइज करते थे. वे कहते हैं कि हर विषय के नोट्स बनाना जरूरी भी नहीं है. लेकिन कुछ विषय जैसे जीएस वन और करेंट अफेयर्स के नोट्स बनाना ठीक रहता है. न्यूज पेपर से भी वे नोट्स बनाते थे.

नोट्स बनाने के लिए करें सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल –

अरण्यक कहते हैं कि हाथ से लिखकर नोट्स बनाने की जगह इलेक्ट्रॉनिक नोट्स बनाना बेहतर रहता है. ऐसा इसलिए कि इलेक्ट्रॉनिक नोट्स में कभी भी कुछ भी घटाया या बढ़ाया जा सकता है, डायग्राम्स बनाए जा सकते हैं, जरूरत पड़ने पर ग्राफिक्स ऐड ऑन किए जा सकते हैं. कुल मिलाकर इन नोट्स को जरूरत के मुताबिक तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है जब कि हैंड रिटेन नोट्स के साथ ऐसा नहीं होता. दूसरी बात नोट्स बनाने वाले सॉफ्टवेयर फ्री में उपलब्ध होते हैं, इनके लिए आपको पे भी नहीं करना होता इसलिए इनका चुनाव कर सकते हैं.

एक बात का ध्यान और रखें कि हर विषय के नोट्स न बनाकर केवल डायनमिक विषयों के ही नोट्स बनाएं वरना आपका पूरा समय इसी में चला जाएगा और आपको पढ़ाई के लिए बिलकुल समय नहीं मिलेगा. कुल मिलाकर आपको एक बैलेंस्ड अपरोच लेकर चलना है.

रिवीजन करते चलें –

एक बात तो अरण्यक यह कहते हैं कि नोट्स हमेशा अपनी भाषा में बनाएं ताकि वे टू द प्वॉइंट हों और लिखने से आपको अच्छे से समझ भी आ जाएं. दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वह है रिवीजन. वे कहते हैं कि आप कितने भी छोटे नोट्स क्यों न बनाएं वे एंड तक बहुत बड़े हो जाते हैं. इसलिए इनको याद रखने का सही तरीका यह है कि समय-समय पर इन्हें रिवाइज करते रहें. उदाहरण के लिए अरण्यक ने जो नोट्स सुबह बनाएं पहले वे उन्हें शाम को रिवाइज करते थे. फिर एक हफ्ते के नोट्स इकट्ठा हो जाने के बाद उन्हें हफ्ते के हफ्ते रिवाइज करते थे और अंत में महीना खत्म होने पर उस महीने के नोट्स रिवाइज करते थे. इस प्रकार वे एक सेट के नोट्स को दस से पंद्रह बार पढ़ चुके होते थे और इससे इन्हें भूलने की संभावना नहीं रह जाती थी. कहने का मतलब यह है कि नोट्स कितने भी छोटे हों एंड आते-आते बहुत बड़े हो जाते हैं इसलिए इन्हें बड़ा बनने के पहले ही खत्म कर लें.

अरण्यक की सलाह –

अरण्यक कहते हैं की बात चाहे नोट्स मेकिंग की हो या स्ट्रेटजी की, सबको अपना खुद का तरीका निकालना चाहिए. हालांकि किसी और के नोट्स या अनुभव की हेल्प ले सकते हैं लेकिन अपना खुद का तरीका फाइंड आउट करें. हो सकता है शुरू-शुरू में आपको समस्या आए या आप ठीक से नोट्स न बना पाएं पर इसे ट्रायल एंड एरर मानते हुए परेशान न हों और कोशिश करते रहें. एक बार, दो बार गलती होगी पर बाद में आप सही तरीका सीख जाएंगे. अगर कहीं किसी एरिया में बहुत दिक्कत हो रही हो तो इंटरनेट की मदद ले सकते हैं. यहां विभिन्न साइट्स, ब्लॉग्स, वीडियोज और टॉपर्स की कॉपियां और सलाह होती है, जिसकी मदद से आप अपनी समस्या का समाधान तलाश सकते हैं. बहुत से टॉपर्स तो अपने नोट्स भी अपलोड कर देते हैं आप वहां से या तो उन्हें पढ़ सकते हैं या नोट्स बनाने का सही तरीका सीख सकते हैं. कुल मिलाकर यूपीएससी परीक्षा में नोट्स बनाना आपके लिए फायदेमंद साबित होता है.

IAS Success Story: हमेशा टॉप करने वाली सौम्या ने UPSC में भी बनाए रखा यह क्रम और पहली बार में बनीं टॉपर

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