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जिस सिविल सर्विस परीक्षा में चौथे पायदान पर आए थे सुभाष चंद्र बोस, जानिए किसने किया था टॉप

क्या आपको पता है कि सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय सिविल सर्विसेज (ICS) की परीक्षा पास की थी. जानिए उनके बैच का टॉपर कौन था. इसके साथ ही बता रहे हैं कि उनके कितने नंबर थे...

नेता जी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता और प्रेरणास्त्रोत थे. उनका जीवन संघर्ष, बलिदान और दृढ़ता की मिसाल है. सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय सिविल सर्विसेज (ICS) में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया था, जो उनके जीवन के एक अनोखे पहलू को उजागर करता है. वो भारतीय सिविल सर्विसेज (ICS) के 1919 की परीक्षा में चौथे स्थान पर आए थे. क्या आपको पता है इस पेपर में टॉप किसने किया था और कितने नंबर लेकर आए थे.  

इंग्लैंड में की थी सिविल सर्विसेज की तैयारी  

रिपोर्ट्स के अनुसार सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय सिविल सर्विसेज (ICS) की परीक्षा में 1919 में भाग लिया. उस समय ब्रिटिश शासन के तहत यह परीक्षा भारतीयों के लिए एक बड़ी चुनौती थी और इसे पास करना उन दिनों में बहुत कम लोगों के लिए संभव था. सुभाष चंद्र बोस ने अपनी शिक्षा को पूरी तरह से गंभीरता से लिया और उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी के लिए इंग्लैंड का रुख किया.

सिविल सर्विसेज की परीक्षा और परिणाम

सुभाष चंद्र बोस ने इंग्लैंड में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा प्राप्त की थी. उन्होंने भारतीय सिविल सर्विस की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत मेहनत की थी. 1919 में, सुभाष चंद्र बोस ने इस परीक्षा में सम्मिलित होने का निर्णय लिया और सफलतापूर्वक पास किया. उन्हें इस परीक्षा में चौथे स्थान पर सफलता प्राप्त हुई थी, जो उस समय की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.

सुभाष चंद्र बोस ने इस परीक्षा में इतिहास विषय को चुना था. इस परीक्षा में उन्हें 6000 में से 2281 अंक प्राप्त हुए थे. उनकी कड़ी मेहनत और आंतरिक प्रेरणा ने उन्हें इस परीक्षा में सफल बनाया. हालांकि, इस सफलता के बाद बोस ने ICS की नौकरी स्वीकार करने के बजाय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रति अपनी निष्ठा दिखाते हुए ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को प्राथमिकता दी.

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय सिविल सर्विसेज की नौकरी को त्याग दिया क्योंकि उन्हें अपने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना था. उनका मानना था कि स्वतंत्रता केवल ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाने से नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस को जागरूक करने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़ा करने से आएगी. 1939 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की स्थापना की, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन था.

ये थे बोस के बैच के टॉपर 

साल 1919 में आयोजित हुईं भारतीय सिविल सर्विसेज (ICS) की परीक्षा में पी रामालिंगम ने टॉप किया था. उन्होंने 6000 अंकों की परीक्षा में 2716 नंबर प्राप्त किए थे. उन्हें सबसे अधिक नंबर हिस्ट्री और पॉलिटिकल ईकानमी में मिले थे. इसके साथ ही उनके नंबर इंग्लिश में भी ज्यादा थे. 

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