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छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों को बड़ी राहत, परीक्षा का आदेश बदला; सरकार ने 24 घंटे में लिया यू-टर्न

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों की स्थानीय परीक्षाएं डीईओ के माध्यम से कराने का आदेश विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने वापस ले लिया है. आइए पूरी डिटेल्स जानते हैं...

छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश ने कुछ दिनों के लिए शिक्षा जगत में हलचल मचा दी थी. यह आदेश 3 फरवरी को जारी हुआ था, जिसमें कहा गया था कि 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को छोड़कर बाकी सभी कक्षाओं की स्थानीय परीक्षाएं जिला शिक्षा अधिकारी यानी डीईओ के माध्यम से कराई जाएंगी. इस फैसले से निजी स्कूल संचालकों में नाराजगी फैल गई और विरोध के स्वर तेज हो गए. बढ़ते दबाव के बाद विभाग ने 24 घंटे के भीतर ही अपना फैसला बदल लिया और निजी स्कूलों को राहत दे दी.

लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने 3 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी किया था. इसमें कहा गया था कि छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों में स्थानीय परीक्षाएं शिक्षा विभाग कराएगा. यह आदेश सिर्फ सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं था, बल्कि अनुदान प्राप्त, अशासकीय यानी निजी स्कूलों और स्वामी आत्मानंद स्कूलों पर भी लागू किया गया था. आदेश के अनुसार, 25 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच वार्षिक परीक्षाएं कराई जानी थीं और 30 अप्रैल तक परिणाम घोषित करने के निर्देश थे. इसके लिए जिला स्तर पर संचालन समिति, प्रश्न पत्र बनाने वाली समिति और मॉडरेशन समिति बनाने की बात भी कही गई थी.

निजी स्कूल क्यों हुए नाराज

अब तक छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूल अपनी परीक्षाएं खुद आयोजित करते आए हैं. स्कूलों ने पहले से ही परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. ऐसे में सत्र के आखिरी महीने में अचानक परीक्षा का तरीका बदल देना स्कूलों और छात्रों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गया. निजी स्कूल संचालकों का कहना था कि इससे बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा. उन्हें नए पैटर्न और व्यवस्था में परीक्षा देनी होगी, जबकि तैयारी पुराने तरीके से की जा चुकी है.

एसोसिएशन ने उठाई आवाज

इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन सामने आई. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता और सचिव मोती जैन ने लोक शिक्षण संचालक को पत्र लिखकर आदेश को रद्द करने की मांग की. एसोसिएशन का कहना था कि शिक्षा का अधिकार कानून यानी आरटीई एक्ट में इस तरह की स्थानीय परीक्षा कराने का कोई प्रावधान नहीं है. बोर्ड परीक्षाओं के अलावा अन्य परीक्षाएं स्कूलों की स्वायत्तता के तहत आती हैं. ऐसे में विभाग का यह आदेश स्कूलों की स्वतंत्रता पर असर डालता है.

सिलेबस और मूल्यांकन पर सवाल

निजी स्कूलों ने यह मुद्दा भी उठाया कि कई स्कूल ऐसे विषय पढ़ाते हैं, जो सरकारी सिलेबस का हिस्सा नहीं हैं. इन विषयों की परीक्षा कौन लेगा, इसका जिक्र आदेश में नहीं था. इसके अलावा बिना साफ सिलेबस और ब्लूप्रिंट के परीक्षा कराने की बात कही गई थी, जिससे बच्चों में तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई. स्कूलों का कहना था कि परीक्षा से पहले बच्चों को यह साफ होना चाहिए कि उन्हें क्या पढ़ना है और किस तरह से सवाल पूछे जाएंगे.

किताबों को लेकर भी विवाद

इस पूरे मामले के बीच एक और बात सामने आई. पाठ्यपुस्तक निगम के अनुसार, राज्य के 1784 निजी स्कूलों ने इस सत्र में एससीईआरटी की किताबें ली ही नहीं थीं. ये स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई करा रहे थे. ऐसे में अगर शिक्षा विभाग खुद परीक्षा कराता, तो इन स्कूलों के लिए परेशानी और बढ़ जाती. क्योंकि पढ़ाई और परीक्षा का आधार अलग-अलग हो जाता.

आंदोलन की चेतावनी से बदला फैसला

निजी स्कूल एसोसिएशन ने साफ कह दिया था कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन करेंगे. एसोसिएशन ने सरकार को तीन दिन का समय दिया था, लेकिन बढ़ते विरोध और दबाव को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने 24 घंटे के भीतर ही नया आदेश जारी कर दिया.

नए आदेश में क्या बदला

4 फरवरी को जारी नए आदेश में निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों को पुराने आदेश से मुक्त कर दिया गया. यानी अब ये स्कूल पहले की तरह अपनी परीक्षाएं खुद आयोजित कर सकेंगे. नए आदेश में सिर्फ स्वामी आत्मानंद स्कूलों का जिक्र रखा गया है. बाकी स्कूलों के लिए डीईओ के माध्यम से परीक्षा कराने का फैसला वापस ले लिया गया है.

यह भी पढ़ें - UPSC नियमों में बड़ा बदलाव: बार-बार सिविल सेवा परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे IAS-IFS, IPS ऑप्शन को लेकर भी हुआ बदलाव

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