पढ़ाई का दबाव और स्ट्रेस? इन आसान तरीकों से रखें खुद को फिट, बोर्ड एग्जाम में आएंगे बेहतर नंबर
लाइफस्टाइल, पढ़ाई और बोर्ड एग्जाम के दबाव के बीच छात्रों की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही नींद, संतुलित खानपान और समय पर मदद ने से इसे मजबूत रखा जा सकता है.

आज के तेज-तर्रार लाइफस्टाइल और पढ़ाई के दबाव के बीच छात्रों की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ना आम बात हो गई है. ऊपर से अब छात्रों पर बोर्ड एग्जाम का भी प्रेशर है. एक्सपर्ट्स के अनुसार सही दिनचर्या, खानपान और समय पर मदद लेना मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाए रखता है.
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सबसे पहला कदम है नियमित नींद. हर दिन एक ही समय पर सोना और उठना जरूरी है. अनियमित नींद से हार्मोन जैसे सेरोटोनिन और कॉर्टिसोल असंतुलित हो जाते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि रात में मोबाइल या लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता घटा देता है.
हेल्दी डाइट है बेहद जरूरी
स्वस्थ आहार भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड्स से बचें और फलों-सब्जियों के साथ लें. पेट को अक्सर दूसरा दिमाग कहा जाता है, इसलिए फाइबर और प्रोबायोटिक्स का सेवन जरूरी है. इससे दिमाग और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं.
कांसेप्ट को समझें
क्लनिकल मनोचिकित्सक रिंकी लाकड़ा बताती हैं कि बोर्ड एग्जाम या फिर अन्य किसी भी परीक्षा की तैयारी के वक्त कुछ भी समझ ना आने पर टीचर, पेरेंट्स और दोस्तों की मदत ले. किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें. सब्जेक्ट के कांसेप्ट को समझकर और लिख कर प्रैक्टिस जरूर करें.
खुद के लिए निकालें समय
डॉ. अर्पिता कुलश्रेष्ठ का कहना है कि अगर कभी तनाव या चिंता बढ़ जाए तो मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं. अपनी परेशानियों को दबा कर रखना लंबे समय में मानसिक समस्याएं बढ़ा सकता है. छात्रों को चाहिए कि वह रोजाना छोटे-छोटे कदम उठाएं. दिन में थोड़ा समय खुद के लिए निकालें, मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज करें.
छात्रों के लिए अगला ध्यान देने वाला पहलू है सोशल मीडिया का सीमित इस्तेमाल. फर्जी या बढ़ा-चढ़ा कर दिखाई गई प्रोफाइल्स छात्रों में तुलना की भावना पैदा कर सकती हैं और तनाव बढ़ा सकती हैं. रात के समय ज्यादा डिवाइस इस्तेमाल करने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर घटता है, जिससे नींद और दिमागी ताजगी पर असर पड़ता है.
हर दिन होती हैं नई शुरूआत
अपनी भावनाओं को लिखें या भरोसेमंद व्यक्ति से शेयर करें. छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करने की कोशिश करें. इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और तनाव कम होता है. डॉ. कुलश्रेष्ठ कहती हैं कि मजबूत होना मतलब हर समय मुस्कुराना नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर मदद मांगना भी है. हर दिन परफेक्ट नहीं होता पर हर दिन एक नई शुरुआत जरूर होती है.
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