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न आंखों ने देखा, न कानों ने सुना, न होंठों ने कहा; सारा ने 98.75% पाकर लिखी कहानी

जहां हालात हार मानने पर मजबूर कर देते हैं, वहीं सारा मोइन ने अपनी दिव्यांगता को ताकत बनाकर इतिहास रच दिया,आइये जानतें हैं सारा मोइन के संघर्ष की कहानी..

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  • दिव्यांग सारा मोइन ने 12वीं में 98.75% अंक प्राप्त किए.
  • ब्रेल डिस्प्ले डिवाइस से पढ़ाई कर रचा इतिहास.
  • स्कूल और परिवार के सहयोग से हासिल की सफलता.
  • भविष्य में IAS बनकर दिव्यांगों की मदद करेंगी.

लखनऊ की सारा मोइन ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती.पूरी तरह से देखने, सुनने और बोलने में असमर्थ होने के बावजूद उन्होंने ISC कक्षा 12वीं में 98.75% अंक हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया.

सारा मोइन ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास के दम पर ISC 12वीं परीक्षा में 98.75 प्रतिशत अंक हासिल किए.उनकी इस शानदार सफलता से न सिर्फ उनका परिवार बल्कि पूरा शहर गर्व महसूस कर रहा है. यह उपलब्धि उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं.

स्कूल का मिला सहयोग
सारा ने अपनी पढ़ाई क्राइस्ट चर्च कॉलेज लखनऊ से पूरी की. स्कूल के प्रिंसिपल मिस्टर छत्री और विशेष शिक्षक सलमान अली काज़ी के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाया. स्कूल प्रशासन ने उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.संस्थान का कहना है कि वे हमेशा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा और अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और सारा की सफलता इसी दिशा में उनके प्रयासों का परिणाम है.

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 ब्रेल डिवाइस से पढ़ाई और संवाद
सारा मोइन ने अपनी पढ़ाई के दौरान एक विशेष डिवाइस ब्रेल डिस्प्ले की मदद ली, जिसके माध्यम से वह कंप्यूटर से जुड़कर पढ़ाई कर पाती थीं.इसी तकनीक के जरिए वह पढ़ने, लिखने और संवाद करने में सक्षम हुईं. घर पर भी उन्होंने इसी डिवाइस के सहारे लगातार अभ्यास किया, जिसने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

परिवार का मिला साथ
सारा के पिता मोइन अहमद इदरीसी और माता जूली हमीद ने हर कदम पर उनका साथ दिया. परिवार का कहना है कि सारा ने कभी अपनी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.उन्होंने हर चुनौती का सामना पूरे साहस और धैर्य के साथ किया.
सारा मोइन का सपना एक IAS अधिकारी बनना है.वह विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों की मदद करना चाहती हैं ताकि उन्हें भी बेहतर शिक्षा और अवसर मिल सकें. उनका लक्ष्य समाज में बदलाव लाना और उन लोगों के लिए काम करना है जो किसी न किसी रूप में वंचित हैं.

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