Delhi University ने फिर बढ़ाई फीस, छह महीने में दूसरी बार हुई बढ़ोत्तरी
यह विश्वविद्यालय की अपनी नीति से भी काफी ज्यादा है, जिसके अनुसार वार्षिक फीस बढ़ोतरी लगभग 10 प्रतिशत तक ही होनी चाहिए थी, ताकि महंगाई को देखते हुए संतुलन बना रहे.

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से अपने विश्वविद्यालय स्तर की सुविधाओं के लिए फीस बढ़ा दी है. यह पिछले छह महीनों में दूसरी बार फीस बढ़ाने का मामला है, जिससे छात्रों और कॉलेजों में चिंता बढ़ गई है. इस बढ़ोतरी ने एक लंबे समय से जारी ट्रेंड को भी स्पष्ट कर दिया है, जिसमें DU की फीस लगातार बढ़ती जा रही है. अब विश्वविद्यालय के हिस्से की कुल फीस 4,100 रुपये हो गई है, जो पिछली जुलाई में तय की गई 3,500 रुपये की फीस से 600 रुपये ज्यादा है यानी सिर्फ छह महीने में फीस में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
यह विश्वविद्यालय की अपनी नीति से भी काफी ज्यादा है, जिसके अनुसार वार्षिक फीस बढ़ोतरी लगभग 10 प्रतिशत तक ही होनी चाहिए थी, ताकि महंगाई को देखते हुए संतुलन बना रहे. कॉलेज प्रशासन ने इस बात पर चिंता जताई है कि फीस बढ़ाने की गति और नियमितता काफी तेज है. उनके अनुसार, एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय होने के नाते, जो विभिन्न आर्थिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों को सेवा देता है, बार-बार फीस बढ़ाना एक लंबी अवधि में चिंताजनक संकेत देता है.
छह महीने में दूसरी बार DU फीस बढ़ी
संशोधित शुल्क संरचना के अनुसार, विश्वविद्यालय ने University Development Fund को 1,750 और University Facilities & Services Charges को भी 1,750 कर दिया है. इसके अलावा, छात्रों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) सहायता फंड के लिए 300 और University Students Welfare Fund के लिए₹300 देने होंगे। पिछली जुलाई में DU ने अपनी फीस 3,500 तय की थी. तब University Development Fund 1,500 और University Facilities Charges 1,500 थे. EWS Welfare Fund 250 था.
पिछले चार शैक्षणिक सत्रों में DU की केंद्रीयकृत फीस दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है. University Development Fund 2022 में 900 था, जो 2023 में 1,000, 2024 में 1,200, 2025 में 1,500 और अब 2026 में 1,750 तक पहुंच गया है. इसी तरह Facilities & Services Charges भी 2022 में 500 से बढ़कर अब 1,750 हो गया है. EWS Welfare Fund 2022 में 100 से बढ़कर अब 300 हो चुका है.
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
विश्वविद्यालय ने फीस बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि संचालन लागत और महंगाई बढ़ रही है और सालाना लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि जरूरी है ताकि विश्वविद्यालय स्तर की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखा जा सके. लेकिन कॉलेज प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार हुई फीस वृद्धि और अब हाल की 17 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी ने छात्रों पर दबाव बढ़ा दिया है.
कॉलेजों के प्रमुखों ने बताया कि टॉप-टीयर कॉलेजों में स्नातक कार्यक्रम की कुल फीस अब प्रति सेमेस्टर 30,000-40,000 तक पहुंच गई है. एक कॉलेज प्रधान ने कहा कि भले ही DU की फीस निजी या विदेशी विश्वविद्यालयों की तुलना में अभी भी कम है, लेकिन सार्वजनिक विश्वविद्यालय में लगातार बढ़ती फीस एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती है. अगर यह रफ्तार जारी रही, तो आने वाले वर्षों में छात्रों और उनके परिवारों पर वित्तीय दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है.
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Source: IOCL























