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CBSE की पोल खोलने वाले 12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत ने लॉन्च किया पोर्टल, 1.66 करोड़ सरकारी रिकॉर्ड किए सार्वजनिक

12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने 1.66 करोड़ सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए हैं. अब हर कोई इन्हें बेहद आसानी से चेक कर सकता है.

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  • रांची के सार्थक ने सरकारी खरीद रिकॉर्ड का ऑनलाइन डेटाबेस बनाया.
  • उन्होंने 1.66 करोड़ रिकॉर्ड जुटाकर पारदर्शिता और पहुँच बढ़ाई.
  • इससे सरकारी खरीद की जानकारी तक आसान पहुँच सुनिश्चित होगी.

सरकारी खरीद से जुड़े डाक्यूमेंट्स आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकें इसी सोच के साथ रांची के जेवीएम श्यामली स्कूल में 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक अनोखी पहल की है. उन्होंने भारत सरकार के केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (CPP) पोर्टल से करीब 1.66 करोड़ सरकारी खरीद रिकॉर्ड जुटाकर एक ऐसा ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया है, जहां से कोई भी नागरिक, पत्रकार या शोधकर्ता कुछ ही क्लिक में इन रिकॉर्ड तक पहुंच सकता है.

सार्थक का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड जनता के लिए होते हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में उन्हें ढूंढ़ना और डाउनलोड करना काफी मुश्किल है. इसी परेशानी को देखते हुए उन्होंने अपना पोर्टल तैयार किया, ताकि लोगों को जरूरी जानकारी पाने के लिए जटिल प्रक्रिया से न गुजरना पड़े. उनका मानना है कि जब जानकारी तक पहुंच आसान होगी, तभी पारदर्शिता भी मजबूत होगी.

उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह में सीपीपी पोर्टल से लगभग 1.66 करोड़ खरीद रिकॉर्ड एकत्र किए गए. इसके बाद सभी रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से एक सार्वजनिक डेटाबेस में रखा गया है. अब कोई भी व्यक्ति इन दस्तावेजों को डाउनलोड कर सकता है और सरकारी खरीद से जुड़े फैसलों का स्वतंत्र विश्लेषण कर सकता है.

समय की होगी काफी बचत

इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता है. जहां सरकारी पोर्टल पर रिकॉर्ड खोजने और डाउनलोड करने में काफी समय लगता है, वहीं सार्थक के प्लेटफॉर्म पर यह काम कहीं ज्यादा आसान हो गया है. इससे शोध करने वाले लोगों, मीडिया संस्थानों और आम नागरिकों को सरकारी खरीद प्रक्रिया को समझने में काफी मदद मिलेगी.

यह पहली बार नहीं है जब सार्थक किसी बड़े मुद्दे को लेकर चर्चा में आए हैं. इससे पहले उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन किया था. अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने के बाद उन्हें अंकों में अंतर महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया को समझने की कोशिश की. उनकी इस पहल ने भी शिक्षा जगत में काफी चर्चा बटोरी थी.

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इस पर रहेगा फोकस

अब उनकी नई पहल का फोकस सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है. उनका कहना है कि जब सरकारी खर्च से जुड़े रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध होंगे, तो ज्यादा लोग उनका अध्ययन कर सकेंगे. इससे न केवल शोध को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सार्वजनिक निगरानी भी मजबूत होगी.

आगे करेंगे ये काम

सार्थक ने बताया कि आने वाले समय में इस परियोजना को और बेहतर बनाने की योजना है. इसके लिए वह इंजीनियरों की एक टीम के साथ काम करेंगे, ताकि पोर्टल में नई सुविधाएं जोड़ी जा सकें और ज्यादा से ज्यादा रिकॉर्ड लोगों तक पहुंचाए जा सकें.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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