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मुसल्लाहपुर हाट सेंटर में कैसे खोल सकते हैं कोचिंग सेंटर, जहां खान सर की क्लासेज पर हुई फायरिंग

मुसल्लाहपुर हाट और उसके आसपास का इलाका पिछले दो दशकों से एजुकेशन और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी का बड़ा केंद्र बना हुआ है. इसके आसपास के इलाकों में सैकड़ों कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं.

पटना का मुसल्लाहपुर हाट इन दिनों चर्चा में बना हुआ है. दरअसल भारत के फेमस टीचर खान सर के कोचिंग संस्थान पर फायरिंग और तोड़फोड़ की घटना के बाद यह इलाका एक बार फिर चर्चा में आ गया. घटना के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उत्तर आए और सुरक्षा की मांग करने लगे. इस पूरे मामले ने न केवल कोचिंग संस्थानों के बीच कंपटीशन को लेकर बहस छोड़ दी है, बल्कि यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि आखिर मुसल्लाहपुर हाट बिहार की कोचिंग राजधानी कैसे बन गया और यहां नया कोचिंग सेंटर कैसे शुरू किया जा सकता है. 

मुसल्लाहपुर हाट 25 साल में बना बिहार का बड़ा कोचिंग हब

मुसल्लाहपुर हाट और उसके आसपास के करीब 2 किलोमीटर का इलाका पिछले दो दशकों से एजुकेशन और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी का बड़ा केंद्र बना हुआ है. इसके आसपास के इलाकों में सैकड़ों कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार 2000 के आसपास यहां जमीन और किराया बहुत कम था. धीरे-धीरे शिक्षकों और संस्थानों ने यहां अपने सेंटर खोलने शुरू किया और देखते ही देखते यह बिहार का बड़ा कोचिंग हब बन गया. 

क्यों पॉपुलर है यह इलाका?

मुसल्लाहपुर हाट की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत वाली व्यवस्था मानी जाती है. छात्रों को सस्ते किराए पर कमरे और लॉज मिल जाते हैं, यही वजह है कि बिहार के अलग-अलग जिलों से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और मिडिल क्लास परिवारों के छात्र बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं. इस क्षेत्र में सिपाही, दरोगा, रेलवे, शिक्षक भर्ती, बीपीएससी, एसएससी और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले संस्थानों की भरमार है. 

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मुसल्लाहपुर हाट में कैसे खोल सकते हैं कोचिंग सेंटर 

किसी भी कोचिंग संस्थान की शुरुआत करने से पहले यह तय करना जरूरी होता है कि किस विषय या परीक्षा की तैयारी करवाना चाहते हैं. बाजार की मांग को समझ कर ही कोर्स और सब्जेक्ट का चयन किया जाता है. अगर किसी शिक्षक की किसी विशेष विषय पर मजबूत पकड़ है तो वह इस क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार आज भी स्कूल, ट्यूशन, इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं सरकारी नौकरी की तैयारी और भाषा की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है. आमतौर पर यह माना जाता है कि कोचिंग सेंटर उस जगह होना चाहिए, जहां छात्रों की पहुंच आसान हो. वहीं मुसल्लाहपुर हाट जैसे इलाकों की लोकप्रियता के कारण यहां पहले ही से ही बड़ी संख्या में छात्र मौजूद है. ऐसे में नए इंस्टीट्यूट को छात्रों तक पहुंच बनाने में आसानी हो सकती है. मुसल्लाहपुर हाट जैसे इलाके में कोचिंग खोलने के लिए पहले कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन करना होता है. इसके बाद ही सारी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करके यहां कोचिंग सेंटर आप खोल सकते हैं.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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