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घर खरीददार के लिए नोएडा और नोएडा वेस्ट क्यों बन रहे खास पसंद? ये हैं इसके 3 बड़े कारण

आने वाले कुछ सालों में, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 20% सालाना ग्रोथ के साथ नए रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं, जिससे यह उत्तर भारत के प्रमुख रियल एस्टेट पावरहाउस के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा.

दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोग आज जब घर खरीदने की बात होती है तो वे नोएडा या फिर ग्रेटर नोएडा और नोएडा वेस्ट को खासतौर पर पसंद कर रहे हैं. एनसीआर के अंदर नोएडा में घर खरीददार के यहां पर मूव करने के पीछे दरअसल कई सारे फैक्टर्स हैं. इस बारे में InvestoXpert.com के फाउंडर और एमडी विशाल रहेजा का कहना है कि पिछले पांच सालों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा उभरते बाजारों से विकसित होकर अब परिपक्व रियल एस्टेट हब बन चुके हैं. इसका श्रेय रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और बढ़ती मांग को जाता है. रेजिडेंशियल सेगमेंट में, खासकर 2 और 3 बीएचके अपार्टमेंट्स की डिमांड में 40% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

इसकी वजह मेट्रो कनेक्टिविटी का विस्तार, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का विकास और कॉर्पोरेट हब्स के नजदीक होना है. पिछले कुछ सालों में प्रॉपर्टी की कीमतों में औसतन 25-30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसमें ग्रेटर नोएडा वेस्ट ने एनसीआर क्षेत्र में सबसे तेज़ ग्रोथ रेट दर्ज की है. इसका मुख्य कारण इसकी किफायती कीमतें और आने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की बेहतर पहुंच है.

उन्होंने आगे बताया कि कॉमर्शियल सेगमेंट में भी जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली है. नोएडा में टेक्नोलॉजी कंपनियों और मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन्स के बेस सेटअप करने से ऑफिस स्पेस की डिमांड में तेज़ी आई है. इंफोसिस, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग जैसी कंपनियों की मौजूदगी ने खासतौर पर नोएडा एक्सप्रेसवे और सेक्टर 62 जैसे इलाकों में ऑफिस ऑक्यूपेंसी रेट को बढ़ावा दिया है, जिससे पिछले पांच सालों में कॉमर्शियल प्रॉपर्टी मार्केट में करीब 40% की वृद्धि हुई है. साथ ही, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और ग्रेटर नोएडा में बनने वाली फिल्म सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स से यह इलाका एंटरटेनमेंट और बिजनेस हब के रूप में उभरने की ओर अग्रसर है, जिससे और भी कॉमर्शियल इन्वेस्टमेंट्स की संभावना है.

मेट्रो विस्तार और कनेक्टिविटी

इसके अलावा, मेट्रो विस्तार और एक्सप्रेसवे के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी ने इस रियल एस्टेट बूम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो एक्वा लाइन और जेवर एयरपोर्ट तक मेट्रो विस्तार की योजनाएं इन शहरों की अपील को और बढ़ाएंगी. इस समय 100 से ज्यादा नए हाउसिंग और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स विभिन्न विकास चरणों में हैं, जो इस क्षेत्र में भविष्य में भारी ग्रोथ की संभावनाएं दर्शाते हैं. खासतौर पर सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग और ‘मेक इन इंडिया’ पहल से भी इस क्षेत्र को मजबूती मिलेगी.

आने वाले कुछ सालों में, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 20% सालाना ग्रोथ के साथ नए रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं, जिससे यह उत्तर भारत के प्रमुख रियल एस्टेट पावरहाउस के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा.

दिल्ली-गुरुग्राम के मुकाबले स्थिर प्रोपर्टी कीमत

जबकि इस बारे में गीतांजलि होमस्टेट के फाउंडर सुनील सिसोदिया बताते हैं कि "नोएडा और ग्रेटर नोएडा ने सैटेलाइट टाउन से लेकर व्यस्त शहरी केंद्रों तक का एक जबरदस्त सफर तय किया है, जो आज एंड-यूज़र्स और इन्वेस्टर्स दोनों को आकर्षित कर रहे हैं. इनका विकास एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे स्ट्रेटेजिक डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और बदलते हुए खरीदारों की पसंद शहर के ग्रोथ को प्रभावित करते हैं.

महामारी से पहले, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को मुख्य रूप से अफोर्डेबल हाउसिंग, चौड़ी सड़कों और प्लान्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जाता था. ये क्षेत्र मिड-सेगमेंट के खरीदारों के बीच काफी पॉपुलर थे, और दिल्ली और गुरुग्राम की तुलना में यहां प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर थीं. खासतौर पर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, सेंट्रल नोएडा, नोएडा एक्सटेंशन और ग्रेटर नोएडा के कुछ हिस्से प्रतिष्ठित डेवलपर्स की रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लिए पसंदीदा लोकेशन थे. इसकी डिमांड कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल हब्स और आईटी पार्क्स की नजदीकी के कारण थी.

महामारी ने इस क्षेत्र में बड़े बदलाव लाए. लोग अब बड़े स्पेस, बेहतर सुविधाएं और हरियाली वाली जगहों की मांग कर रहे हैं. वर्क फ्रॉम होम के चलते नोएडा और ग्रेटर नोएडा के उपनगरों में प्रॉपर्टी की डिमांड तेजी से बढ़ी.  नोएडा एक्सटेंशन और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. वहीं, सेंट्रल नोएडा और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे प्रीमियम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे कि आने वाले जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी प्रोजेक्ट की वजह से अपर मिडिल क्लास खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं."

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राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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