Rapido का मालिक कौन है, किसने और कैसे की थी शुरूआत? नेटवर्थ जानें
Rapido Owner: क्या आप जानते हैं कि रैपिडो का मालिक कौन है और कंपनी की नेटवर्थ कितनी है? अगर नहीं तो आज हम आपको बताते हैं कि रैपिडो की शुरूआत किसने और कब की थी. पढ़ें पूरी जानकारी.

Rapido News: भारत में बाइक टैक्सी और राइड बुकिंग की बात हो रही हो तो रैपिडो का नाम जरूर आता है. आज ये कंपनी देश के कई शहरों में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने की सर्विस देती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रैपिडो की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे कौन लोग हैं.
रैपिडो की शुरुआत साल 2015 में तीन दोस्तों अरविंद सांका, पवन गुंटुपल्ली और ऋषिकेश एसआर ने मिलकर की थी. कंपनी का संचालन Roppen Transportation Services Pvt. Ltd. के जरिए होता है. अरविंद सांका कंपनी के सह-संस्थापक होने के साथ रैपिडो के CEO भी हैं.
पहले आया आइडिया, फिर शुरू हुई बाइक टैक्सी
शुरुआत में तीनों ने लोगों को सफर की सर्विस देने के लिए कंपनी शुरू की. इसके बाद उन्होंने देखा कि शहरों में ट्रैफिक ज्यादा हो रहा है और लोगों को कम समय और कम खर्च में सफर करने के ऑप्शन की जरूरत है. इसी सोच के साथ बाइक टैक्सी का आइडिया सामने आया.
यह भी पढ़ें- Cab में सवारियों ने की जातिवादी टिप्पणी, Rapido ने ड्राइवर पर लगाया 100 साल का बैन
बाइक कार के मुकाबले कम खर्चीली होती है और ट्रैफिक में आसानी से निकल सकती है. इसी वजह से रैपिडो ने बाइक टैक्सी के जरिए लोगों को सफर कराने पर ध्यान दिया. धीरे-धीरे कंपनी का काम ज्यादा होता गया और रैपिडो लोगों के बीच पहचान बनाने लगी और फिर कार टैक्सी सर्विस पर फोकस दिया गया.
रैपिडो में किस-किस की हिस्सेदारी है
रैपिडो के संस्थापकों के अलावा कंपनी में कई बड़े इन्वेस्टर ने भी पैसा लगाया है. इनमें WestBridge Capital, Nexus Venture Partners जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं. इन इन्वेस्टर की हिस्सेदारी भी कंपनी में है.
रैपिडो का सालाना ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब 600 करोड़ से 700 करोड़ के बीच रहा है, लेकिन कंपनी ने अपने कारोबार को ज्यादा करने और मार्केटिंग पर भी काफी खर्च किया. इसी वजह से कंपनी को करीब 350 करोड़ से 370 करोड़ का घाटा भी हुआ था.
यह भी पढ़ें- AC, फ्रिज, पंखे और गीजर के बढ़ेंगे दाम, महंगा हो गया ये एक सामान
कितनी है रैपिडो की नेटवर्थ?
रैपिडो की वैल्यूएशन करीब 1.1 अरब यानी 9200 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है. इसी के साथ कंपनी यूनिकॉर्न स्टार्टअप की कैटेगरी में शामिल हुई. लेकिन वैल्यूएशन कंपनी की कीमत होती है, इसे संस्थापकों की निजी नेटवर्थ नहीं माना जाता.























