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DETAILS: आखिर क्यों ढहने की कगार पर है आईडिया-वोडाफोन कंपनी?

वोडाफोन आइडिया भारतीय बाजार में हर तिमाही में तकरीबन 5 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठा रही हैं. जिसके चलते कंपनी पर गहरा संकट आ गया है.

नई दिल्ली: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन भारत में ढहने के कगार पर खडी है. यह बात किसी और ने नहीं बल्कि खुद वोडाफोन के सीईओ निक रीड ने कही है. वोडाफोन जैसे बड़े विदेशी निवेशक अगर ऐसी बात कहते हैं जो जाहिर है कि भारत की वैश्विक छवि को गहरा धक्का लगेगा है. ऐसे में वोडाफोन के भारतीय बाजार से जाने की खबर के चलते अब सबकी निगाहें इस बात पर आ टिकी हैं कि कभी मोटी कमाई करने वाला टेलीकॉम सेक्टर आखिर किस वजह से इस मुहाने पर कैसे आ खड़ा हुआ है.

सवाल यह उठता है कि आखिर वोडाफोन के साथ ऐसा क्या हुआ कि वो भारतीय बाजार से जाने की बात करने लगी है. दरअसल, वोडाफोन आइडिया भारतीय बाजार में हर तिमाही में तकरीबन 5 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठा रही है. इसके अलावा कंपनी पर तकरीबन 99 हजार करोड़ रुपए का कर्ज भी है. लिहाजा, कंपनी को इस भारी भरकम कर्ज पर ब्याज भी चुकाना पड़ता है इसके बाद हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल पुराने एजीआर के मामले में निर्णय दे दिया जिसने टेलीकॉम कंपनियों खासकर वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल की कमर तोड़ कर रख दी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों को सरकार को 92 हजार करोड़ चुकाने होंगे. इसमें से वोडाफोन आइडिया को लगभग 28 हजार करोड़ रुपये चुकाने होंगे.

कंपनी के इन्हीं हालातों को लेकर हाल ही में वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला अपनी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कैबिनेट सचिव से मिले थे. टेलीकॉम क्षेत्र के इन्हीं हालातों को देखते हुए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की कमेटी का गठन किया गया है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी. दरअसल, टेलीकॉम क्षेत्र की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि रिलायंस जियो को छोडकर कोई भी टेलीकॉम कंपनी आज की तारीख में मुनाफा नहीं कमा पा रही हैं. वहीं, टेलीकॉम क्षेत्र पर 7 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज आज की तारीख में है. ऐसे में, टेलीकॉम क्षेत्र की दो दिग्गज आइडिया और वोडाफोन, मिलकर भी, वोडाफोन आइडिया को मुनाफे की पटरी पर नहीं ला पा रही हैं.

टेलीकॉम सेक्टर की आखिर यह हालत क्यों हुई ?

टेलीकॉम क्षेत्र की हालत बीते कुछ सालों के दौरान हुई हालत किसी से छुपी नहीं है. टेलीकॉम सेक्टर में 2006 में रिलायंस जियो की एंट्री के साथ ही यहां परिस्थितियां बदलनी शुरू हो गईं थी. जिस टेलीकॉम क्षेत्र में कभी देश भर में दर्जन भर से ज्यादा कंपनियां होती थीं, वहां कंपनियों के विलय और अधिग्रहण का दौर शुरू हो गया. प्राइवेट क्षेत्र की दो बडी दिग्गज वोडाफोन और आइडिया को विलय कर जान बचानी पडी. लेकिन, अब हालत ऐसी हो गई है कि 30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ देश की दूसरी सबसे बडी टेलीकॉम कंपनी होने के बावजूद वोडाफोन आइडिया आज इस मुहाने पर आ खड़ी हुई है. दरअसल, शुरुआत में रिलायंस जियो ने बेहद कम कीमतों पर अपनी सेवाएं लॉंच की जिसके चलते वोडाफोन, आइडिया और एयरटेल को भी कीमतें घटानी पड़ीं. इससे कंपनियों के बीच प्राइस वॉर शुरू हो गई. इस प्राइस वॉर के चलते पुरानी टेलीकॉम कंपनियों की जमीन दरकने लगी. होते होते आज यह स्थिति हो गई कि वोडाफोन आइडिया भारतीय बाजार से जाने की बात कर रही हैं.

टेलीकॉम सेक्टर की हालत पहले से ही खराब थी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने कंपनियों की नींव को हिलाकर रख दिया है. इसीलिए, वोडाफोन आइडिया और अन्य टेलीकॉम कंपनियां सरकार से गुहार लगा रही हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले वाली रकम को बिना ब्याज और पेनल्टी के 10 सालों की किश्तों में वसूला जाए. इसके अलावा स्पेक्टम फीस को दो साल के लिए माफ किया जाए! तभी जाकर टेलीकॉम कंपनियों को राहत मिलेगी और वह व्यापार चालू रख सकेंगी. टेलीकॉम सेक्टर की खस्ताहालत को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े नौकरशाह कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की कमेटी का गठन किया है जो कि टेलीकॉम क्षेत्र की सेहत सुधारने के लिए प्रस्ताव दे सकती है. सात लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज के बोझ तले बैठे टेलीकॉम सेक्टर का पूरा दारोमदार सरकारी रहमत पर टिका हुआ है. अगर सरकार टेलीकॉम कंपनियों को राहत देती है तो ही कंपनियां चालू रह सकती हैं वर्ना, मौजूदा स्थिति यह है कि बिना सरकारी मदद के टेलीकॉम सेक्टर ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा.

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