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इस फसल को उगाने वाले किसानों की बढ़ेगी आमदनी! बदलने जा रहा है 58 साल पुराना कानून

Big News for Sugarcane Farmers: पहले सरकार ने FRP को बढ़ाने का फैसला लिया था और अब FRP चीनी के अलावा गन्ने से बनने वाले दूसरे उत्पादों की कुल आय से तय होने का प्रस्ताव है.

Big News for Sugarcane Farmers: भारत दुनिया में सबसे ज्यादा गन्ना उगाने वाले देशों में दूसरे नंबर पर है.पहले नंबर पर ब्राजील है. देश में गन्ने की खेती पर बड़ी संख्या में किसानों की रोजी-रोटी निर्भर है, जिनकी आमदनी सरकार के एक कदम से बढ़ने वाली है. दरअसल, सरकार ने गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में कुछ संशोधन करने के बारे में सोच रही है. इससे किसानों की गन्ने के उत्पादन से होने वाली कमाई बढ़ सकती है. आइए जानते हैं कैसे? 

पहले FRP में हुई बढ़ोतरी 

सरकार देश में गन्ना किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश में लगातार जुटी हुई है. इसके तहत पहले सरकार ने FRP (Fair and Remunerative Price) को बढ़ाने का फैसला लिया. इसी साल अप्रैल में सरकार ने गन्ने का FRP 4.41 परसेंट बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया. FRP वह मिनिमम पैसा है, जो चीनी मिले गन्ना किसानों को उनके उत्पादन पर देती है. इससे कम कीमत पर चीनी मिले किसानों से गन्ने की खरीद नहीं कर सकते हैं.

सरकार ने चीनी की रिकवारी के आधार पर नई FRP 10.25 परसेंट तय किया. यानी कि प्रोसेसिंग के दौरान गन्ने से प्राप्त चीनी अगर 10.25 परसेंट से ज्यादा मिलती है, तो किसानों को और भी ज्यादा पैसा देना होगा. चीनी की रिकवरी में हर 0.1 परसेंट की बढ़ोतरी पर किसानों को 3.46 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम दिया जाएगा. सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों को राहत मिली थी.

नए नियम में क्या है प्रस्ताव? 

अब नए नियम के तहत अब FRP सिर्फ चीनी से नहीं, बल्कि गन्ने से बनने वाले दूसरे उत्पादों की कुल आय से भी तय होगा क्योंकि मौजूदा समय में गन्ने से चीनी के अलावा, इथेनॉल, बायो सीएनजी, मोलेसिस, बिजली बगास भी पैदा किए जा रहे हैं. अब चूंकि अब तक FRP को सिर्फ चीनी से जोड़कर देखा जाता है इसलिए किसानों को इन दूसरी चीजों के उत्पादन से होने वाली कमाई का लाभ नहीं मिल पाता है.

इसके अलावा, नए नियम के तहत किसानों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य कर दिए जाने का भी प्रस्ताव है, जिसकी मांग किसान लंबे समय से करते आ रहे हैं. चीनी भारत का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है, जिससे लगभग 5 करोड़ किसान और 5 लाख से ज्यादा श्रमिक सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. ऐसे में सरकार के इन फैसलों का लाभ उन्हें मिल पाएगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और देश की इकोनॉमी मजबूत होगी. 

चीनी मिलों को लेकर भी है प्रस्ताव

इसके अलावा, नए प्रस्ताव में दो चीनी मिलों के बीच 15 किलोमीटर की दूरी होने के नियम की भी समीक्षा की जाएगी. दरअसल, गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत सरकार ने तय किया है कि किन्हीं दो चीनी मिलों के बीच कम से कम 15 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए ताकि गन्ने की सप्लाई हर मिल में समान से होती रहे और किसानों को भी अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा दौड़भाग नहीं करनी पड़े, लेकिन अब इस नियम को पुराना मानते हुए हटाए जाने की बात कही जा रही है. ऐसे में हो सकता है कि चीनी मिलों के बीच दूरी कम की जाए, इससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में चीनी की मिले लगेंगी और उनके बीच आपसी प्रतिस्पर्धा भी बनी रहेगी.

 

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