Stock Market Crash: बजट में एक ऐलान और शेयर बाजार धड़ाम, एक झटके में निवेशकों के डूबे 8 लाख करोड़
Stock Market Crash: बजट में बायबैक से मिलने वाली रकम पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगने के ऐलान के बाद शेयर बाजार भरभराकर नीचे गिरा. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बछ़ी गिरावट आई

Stock Market Crash: बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक ऐलान से शेयर बाजार में आज चारों ओर अफरा-तफरी मच गई. रविवार को बजट के लिए रखे गए स्पेशल ट्रेडिंग सेशन में दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स में 2,370.36 अंक या 2.88 परसेंट की भारी गिरावट आई और यह 80,000 अंक के स्तर से नीचे टूटकर 79,899.42 अंक पर आ गया. वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 748.9 अंक या 2.95 परसेंट की गिरावट के साथ 24,571.75 अंक पर आ गया.
किन शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान?
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में 6.50 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई. भारतीय स्टेट बैंक, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स और इटर्नल के शेयर भी नुकसान में रहे. जबकि सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर मुनाफे में रहे। एशियाई बाजार रविवार को अवकाश के कारण बंद रहेंगे. अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को लिवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 2,251.37 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.
क्यों गिरा शेयर बाजार?
दरअसल, अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फ्यूचर ट्रेड पर STT को 0.02 परसेंट से बढ़ाकर 0.05 परसेंट करने का ऐलान किया. इसके अलावा, FM ने ऑप्शंस प्रीमियम पर STT को 0.1 परसेंट से बढ़ाकर 0.15 परसेंट करने का प्रस्ताव दिया.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सभी कैटेगरी के शेयरहोल्डर्स के लिए बायबैक से मिलने वाली रकम पर अब कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा. इस कदम से बायबैक के टैक्स ट्रीटमेंट में एकरूपता आएगी और इसका मकसद टैक्स आर्बिट्रेज को रोकना है.
इसका शेयर बाजार पर बुरा असर पड़ा. ब्रॉडर मार्केट भी निचले स्तर पर ट्रेड करते दिखे. निफ्टी मिडकैप 100 में 2.7 परसेंट की गिरावट आई और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 3.4 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई है. बजट में हुए इस ऐलान के बाद शेयर बाजार में मची हाहाकार के बीच निवेशकों को आठ लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया.
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