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20 सालों से मचा है हाहाकार, क्यों हर बार कुंभ के समय ही गिर जाता है भारतीय शेयर बाजार?

पिछले 20 सालों में 6 बार कुंभ मेले का आयोजन हुआ और हर बार शुरुआत से लेकर मेले के खत्म होने तक सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव देखने को मिला.

प्रयागराज में 45 दिनों तक चलने वाले महाकुंभ मेले का आगाज आज से हो चुका है. इस दौरान संगम तट पर लगभग 40 करोड़ की संख्या में लोग डुबकी लगाएंगे. इस दौरान सेंसेक्स में भी गिरावट आ सकती है. यह बेहद दिलचस्प है कि बीते 20 सालों में जितने बार भी कुंभ मेले का आयोजन हुआ है, उसी दौरान शेयर बाजार की भी हालत खराब हो जाती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीते दो दशकों में कुंभ मेले के दौरान सेंसेक्स ने कभी भी पॉजिटिव रिटर्न नहीं दिया है. 

20 सालों से एक ट्रेंड है बरकरार

पिछले 20 सालों में 6 बार कुंभ मेले का आयोजन हुआ और हर बार शुरुआत से लेकर मेले के खत्म होने तक सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव देखने को मिला. कुंभ मेला लगभग 52 दिनों तक चलता है और इस दौरान सेंसेक्स में औसतन 3.42 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई है. SAMCO सिक्योरिटीज के अपूर्व शेठ की एनालिसिस के मुताबिक, बीते 20 सालों में छह बार हुए कुंभ मेले के दौरान सेंसेक्स ने हर बार नेगेटिव रिटर्न दिया है. 

हर बार शेयर मार्केट में आई गिरावट

उदाहरण के तौर पर साल 2021 में 1 अप्रैल से 19 अप्रैल तक कुंभ मेले का आयोजन किया गया था. 18 दिनों की इस अवधि में सेंसेक्स में 4.16 परसेंट की गिरावट आई थी. सेंसेक्स में सबसे बड़ी गिरावट 2015 में हुए कुंभ मेले के दौरान देखी गई थी. 14 जुलाई से 28 सितंबर तक आयोजित इस मेले में 8.29 परसेंट तक की गिरावट आई थी. इसी तरह से 5 अप्रैल से 4 मई, 2004 तक हुए कुंभ मेले के दौरान सेंसेक्स में 3.29 परसेंट की गिरावट आई थी. 

कुंभ के बाद मार्केट में आता है उछाल

इस ब्रोकरेज फर्म ने अपने एक नोट में कहा, जब बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा हो, तो कई बार अधिक और जल्दी प्रॉफिट के चक्कर में लोग अपने शेयरों को बेचने में हड़बड़ी करने लगते हैं. इस दौरान गलतियां करने की संभावना बहुत अधिक होती है. इसका एहसास तब तक नहीं होता है जब तक कि शेयर मार्केट में कोई सुधार या गिरावट न आ जाए. 

फर्म ने आगे कहा, कुंभ के दौरान सेंसेक्स का परफॉर्मेंस भले ही उतना बेहतर नहीं होता है, लेकिन इसके खत्म हो जाने के बाद मार्केट में उछाल आता है. कुंभ खत्म होने के छह महीने बाद सेंसेक्स ने छह में से पांच मामलों में पॉजिटिव रिटर्न दिया है, जिसमें औसतन 8 परसेंट तक की बढ़ोतरी देखी गई है. 

क्या यह है वजह?

अर्पूव आगे कहते हैं, कुंभ के दौरान इस पैटर्न की कई वजहें हो सकती हैं जैसे कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग एक जगह से कई दिनों के लिए दूसरी जगह में शिफ्ट होते हैं. कुछ चीजों का कंजप्शन बढ़ता है, कई चीजों के उपभोग में कमी आती है. कुछ सेक्टर्स ऐसे हैं जहां आर्थिक गतिविधि अस्थायी रूप से अधिक हो जाती है, वहीं कई सेक्टरों में हलचल काफी कम हो जाता है. यह अस्थायी पैटर्न शायद मार्केट में गिरावट के लिए जिम्मेदार हो सकता है क्योंकि इस अनिश्चयता से इंवेस्टर्स भी जोखिम के डर से प्रभावित होते हैं. 

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