इजरायल-ईरान तनाव के बीच 233 अंक ऊपर चढ़ा सेंसेक्स, इंडसइंड बैंक समेत इन स्टॉक्स में आया उछाल
Stock Market Today: ईरान और इजरायल तनाव के इधर एशिया और प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजार पर रुख मिलाजुला देखा गया है. जापान का निक्केई 0.14 प्रतिशत उछला तो वहीं टोपिक्स 0.15 प्रतिशत ऊपर गया.

Stock Market News: इजरायल और ईरान के बीच जंग से पूरा मिडिल ईस्ट इस वक्त टेंशन में है. इधर, हफ्ते के तीसरे कारोबार दिन मंगलवार को शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई. हालांकि, बाजार फौरन ने रिकवरी की और ग्रीन जोन में आ गया. इसके बाद 30 अंकों वाले बीएसई सेंसेक्स में 233 अंकों की उछाल देखा गया. निफ्टी भी 24930 के पार चला गया है.
इंडसइंड बैंक के शेयरों में तेजी देखी जा रही है. इसका शेयर 3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है. जबकि हिन्दुस्तान जिंक 6 प्रतिशत फिसल गया. ऑटो शेयर आज टॉप गियर में नजर आ रहे हैं. मारुति, आयशर और टीवीएस के शेयर करीब 2 प्रतिशत ऊपर चढ़े जबकि तो वहीं ऑटो इंडेक्स भी 1.5 प्रतिशत चढ़ा है.
वैश्विक बाजार में मिलाजुला संकेत
जियो जीत इन्वेस्टमेंट के मुख्य रणनीतिकार डॉक्टर वीके विजय कुमार का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सैनिकों के पश्चिम एशिया में मूवमेंट ने तनाव के बीच और तेज हलचल पैदा कर दी है. उनका कहना है कि इसका वैश्विक स्टॉक मार्केट पर उतना असर नहीं दिख रहा है. इससे ऐसा लग रहा है कि बिना वैश्विक इकोनॉमी पर असर डाले ही ये तनाव खत्म हो जाएगा.
ईरान और इजरायल तनाव के इधर एशिया और प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजार पर रुख मिलाजुला देखा गया है. जापान का निक्केई 0.14 प्रतिशत उछला तो वहीं टोपिक्स 0.15 प्रतिशत ऊपर गया. कोस्पी 0.46 प्रतिशत चढ़ा जबकि ऑस्ट्रेलिया का एएसएक्स 0.2 प्रतिशत फिसल गया.
एक दिन पहले स्थानीय बाजार में गिरावट
स्थानीय शेयर बाजार में मंगलवार यानी 18 जूनको गिरावट दिखा. बीएसई पर 30 अंकों वाला शेयर 212.85 अंक यानी 0.26 प्रतिशत गिरकर 81,583.30 के स्तर पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 369.14 अंक तक टूट गया था. दूसरी तरफ, एनएसई का निफ्टी 50 भी 93.10 प्वाइंट यानी 0.37 प्रतिशत गरकर 24,853.40 के स्तर पर बंद हुआ था. सबसे ज्यादा नुकसान सन फार्मा को हुआ और उसके शेयर 2.18 प्रतिशत तक टूट गए.
कमजोर वैश्विक बाजार के इतर इजरायल-ईरान तनाव से क्रूड ऑयल के भाव में तेजी देखी जा रही है. क्रूड ऑयल की कीमतों का बढ़ाना भारत जैसे देश के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि ये अपनी जरूरत का अधिकांश हिस्सा आयात करता है. अगर कच्चे तेल की कीमत बढ़ी तो न सिर्फ व्यापार घाटा बढ़ेगा, बल्कि महंगाई बढ़ जाएगी और उसका करेंसी की वैल्यू पर भी असर देखने को मिलेगा.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















