19 महीने में 100 करोड़ की लूट, बुजुर्गों के बैंक बैलेंस पर कैसे डाका डाल रहे ठग?
देश में डिजिटल अरेस्ट के मामलों की बढ़ती संख्या बेहद चिंता का सबब बनती जा रही है और इसी क्रम में पुणे में डेढ़ साल में साइबर ठग 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं.

कुछ समय से देश में डिजिटल अरेस्ट के मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है. महाराष्ट्र के पुणे में 19 महीनों में ऐसी डिजिटल अरेस्ट की धांधली से 100 करोड़ रुपये की ठगी साइबर ठग कर चुके हैं. पुणे में इसका सबसे ज्यादा असर सीनियर सिटीजन्स यानी बुजुर्गों पर पड़ा है और जनवरी 2025 से जून 2026 तक के बीच में 136 डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आ चुके हैं
पुलिस ने कहा है कि डिजिटल अरेस्ट के मामले बुजुर्गों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि अलग-अलग मामलों में वो करोड़ों रुपये की रकम गंवा चुके हैं. पुणे साइबर पुलिस ने लोगों को सावधान किया है कि वो ऐसे मामलों में फंसने से बचने के लिए किसी भी तरह की संवेदनशील जानकारी किसी भी शख्स को ना दें. भले ही वो खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी होने का दावा कर रहा हो और फोन या वीडियो कॉल पर उन्हें ब्लैकमेल कर रहा हो.
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2026 के 7 महीनों में पूरे 2025 के बराबर जितनी ठगी
साइबर ठगों ने इस कदर अपना हमला बढ़ाया है कि पूरे 2025 में जितनी रकम डिजिटल अरेस्ट के दौरान गंवाई, लगभग उतनी ही रकम का 2026 के 7 महीनों में लोग घाटा उठा चुके हैं. पुणे साइबर पुलिस ने जानकारी दी है कि साल 2025 में 85 डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आए जिनमें कुल मिलाकर 53.52 करोड़ रुपये का नुकसान लोगों को उठाना पड़ा. इसके अलावा 2026 के 7 महीनों में डिजिटल अरेस्ट के 51 मामले सामने आए जिनमें कुल मिलाकर 46.27 करोड़ रुपये का चूना लोगों को लगाया गया.
जानें कितनी रकम कब-कब गंवाई गई?
पुणे में हुए साइबर ठगी के मामलों में ये केस सबसे बड़ा है और इसमें एक 82 साल के बुजुर्ग को 10.75 करोड़ रुपये गंवाने पड़े. रिपोर्ट के मुताबिक ये फ्रॉड 23 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के दौरान हुआ. ये 15 साल पहले उत्तर भारत से पुणे आए थे और इस धोखाधड़ी के चलते उनको अपनी सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी रकम गंवानी पड़ी.
मई 2026 में एक और ऐसा मामला सामने आया जिसमें 87 साल के एक बुजुर्ग को 3.46 करोड़ रुपये का चूना लगा. ये एक रिटायर्ड एक्जीक्यूटिव हैं और पुणे साइबर पुलिस के मुताबिक फ्रॉडस्टर्स ने सीबीआई अधिकारी बनकर उन्हें फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग केस में संलिप्त होने का दावा किया और उनसे 3.46 करोड़ रुपये ऐंठ लिए.
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