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Mutual Fund Taxation: म्यूचुअल फंड से आप भी करते हैं कमाई? जानिए भारत में कैसे लगता है इस इनकम पर टैक्स!

How Mutual Funds Are Taxed: म्यूचुअल फंड से कमाई करने वाले लोगों को इनकम टैक्स के इन नियमों के बारे में जरूर जानना चाहिए, ताकि आपको पता चले कि रिटर्न पर किस तरह से टैक्स की देनदारी बनेगी...

Mutual Fund: म्यूचुअल फंड लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन का अच्छा टूल माना जाता है. इसमें किए निवेश पर मिलने वाला रिटर्न यानी मुनाफा टैक्स के दायरे में आता है. आयकर कानून के तहत इसे कमाई माना जाता है, जिस पर कैपिटल गेन टैक्स देना होता है. टैक्स का कैलकुलेशन फंड किस तरह का है और उसमें आपका होल्डिंग पीरियड कितना है इस पर निर्भर करेगा. म्यूचुअल फंड की पहली और सबसे अहम कैटेगरी इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड की है.

इस फंड पर शेयर की तरह टैक्स

आयकर कानून के तहत, ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीम्स जो अपने एसेट का 65 फीसदी या उससे ज्यादा हिस्सा भारत में लिस्टेड कंपनियों की इक्विटी यानी शेयरों में निवेश करती हैं, इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड कहलाती हैं. इक्विटी म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने पर इक्विटी यानी शेयर की तरह ही टैक्स लगता है. 

शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन

इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से ज्यादा का निवेश लॉन्ग टर्म माना जाता है. ऐसे में 12 महीने से ज्यादा निवेश करके पैसे निकालने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. एक वित्त वर्ष में एक लाख रुपए तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं है. इससे ऊपर जो भी मुनाफा होगा, उस पर 10 फीसदी टैक्स लगेगा. होल्डिंग पीरियड 12 महीने से कम होने यानी निवेश को 12 महीने से कम में निकाल लेने पर मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा. इस पर 15 फीसदी की दर से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा.

टैक्स से जुड़े नियमों में बदलाव

फाइनेंस एक्ट 2023 के जरिए म्यूचुअल फंड पर टैक्स से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है, जिसके बाद एक नई कैटेगरी बन गई है. इस कैटेगरी में वे सभी म्यूचुअल फंड स्कीमें शामिल हैं, जिनका भारतीय कंपनियों की इक्विटी में निवेश 35 फीसदी से कम है. इनमें डेट म्यूचुअल फंड, गोल्ड/सिल्वर म्यूचुअल फंड, विदेशी म्यूचुअल फंड स्कीम्स और विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वाले भारतीय म्यूचुअल फंड स्कीमें शामिल हैं. इस तरह की स्कीम्स मुख्य रूप से बॉन्ड, डिबेंचर और अन्य फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं.

होल्डिंग पीरियड के हिसाब से टैक्स

एक अप्रैल 2023 या उसके बाद आपने इन म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश किया है या आगे निवेश करते हैं तो होल्डिंग पीरियड कुछ भी हो इससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा, जो आपकी इनकम में जुड़ेगा. आपकी इनकम जिस स्लैब में आएगी उस रेट से टैक्स लगेगा.

यहां मिलेगा इंडेक्सेशन का फायदा

डेट म्यूचुअल फंड में आपका निवेश 31 मार्च 2023 या उससे पहले का है तो आपको इंडेक्सेशन का फायदा मिलता रहेगा. इस कंडीशन में डेट फंड की यूनिट को 36 महीने से ज्यादा रखकर बेचने पर इंडेक्सेशन बेनेफिट के बाद मुनाफे पर 20 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. इंडेक्सेशन टैक्स देनदारी घटाने में मदद करता है. 36 महीने से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन लागू होगा और टैक्स स्लैब के हिसाब से मुनाफे पर टैक्स बनेगा.

हाइब्रिड फंड पर टैक्सेशन

सभी ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीम्स, जिनका भारतीय कंपनियों की इक्विटी में निवेश 35 फीसदी से ज्यादा, लेकिन 65 फीसदी से कम है वो तीसरी कैटेगरी में आती हैं. इनमें कुछ हाइब्रिड फंड आते हैं. इन स्कीम में अगर आप 36 महीने से ज्यादा निवेश करते हैं तो यह लॉन्ग टर्म माना जाएगा और इंडेक्सेशन बेनेफिट के बाद मुनाफे पर 20 फीसदी टैक्स लगेगा. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होने पर इसे रेगुलर कमाई की तरह माना जाएगा और स्लैब रेट के मुताबिक टैक्स लगेगा.

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