ईरान वॉर के बीच तेल के गहराते संकट को लेकर बड़ी चेतावनी, मई तक चरमरा सकती है ग्लोबल इकोनॉमी
एशियाई बाजारों को लेकर उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं. अगर तनाव इसी तरह जारी रहा, तो क्रूड ऑयल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा.

Middle East Tensions Impact on Global Economy: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को चार हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान पहले ही खारिज कर चुका है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है. इस बीच Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है और कई देशों में ऊर्जा आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में ऊर्जा विशेषज्ञ भविष्य को लेकर गंभीर चेतावनी दे रहे हैं.
बिगड़ सकते हैं हालात
ऊर्जा अर्थशास्त्री Anas Alhajji ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजाते हुए कहा है कि यदि यह ईरान से जुड़ा युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ सकता है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कुछ ही हफ्तों में इसके गंभीर परिणाम सामने आने लगेंगे.
उन्होंने मौजूदा हालात को Strait of Hormuz से जोड़ते हुए बताया कि इस संकीर्ण मार्ग से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को बड़ा झटका दे सकती है. इसका असर मिडिल ईस्ट से दूर यूरोप तक दिखाई देने लगा है.
If this war doesn't end soon, the global economy would collapse by early May. https://t.co/MV8z99nN6j
— Anas Alhajji (@anasalhajji) March 25, 2026
एशियाई बाजार में बेकाबू होगा तेल
अनस अल्हाजी के अनुसार, यूरोप में ऊर्जा संकट तेजी से गहराता जा रहा है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे रूस के ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता फिर बढ़ सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि जिस रूसी तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश यूरोप कई वर्षों से कर रहा था, वह प्रयास इस संकट में कमजोर पड़ सकता है.
वहीं एशियाई बाजारों को लेकर उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं. अगर तनाव इसी तरह जारी रहा, तो क्रूड ऑयल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा.
Source: IOCL




























