क्या 'गोल्डीलॉक्स फेज' में होने जा रही है भारतीय इकोनॉमी की एंट्री? क्या निवेश के लिए बढ़िया रहेगा यह मौका?
Indian Economy: भारत के मामले में RBI के ताजा आकलन से पता चलता है कि महंगाई का दबाव उम्मीद से ज्यादा तेजी से कम हो रहा है, जबकि ग्रोथ की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. चीजें एक तरह से बैलेंस्ड हैं.

Indian Economy: भारतीय इकोनॉमी को लेकर अभी कई लोग कंफ्यूजन की स्थिति में हैं. एक तरफ महंगाई कम होती नजर आ रही है. एक तफ महंगाई कम होती नजर आ रही हैं, लोन पर इंटरेस्ट में कमी आ रही है, शेयर बाजार में भी अभी बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन फिर भी अनिश्चितता बनी हुई है. लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि क्या अभी निवेश करना सही रहेगा या इंतजार करना चाहिए?
इकोनॉमी जब ऐसी स्थिति में होती है, तो उसे अर्थशास्त्रियों की भाषा में 'गोल्डलॉक्स फेज' कहा जाता है. यानी कि न तो बहुत ठंडा और न ही गर्म, बिल्कुल बैलेंस्ड. हाल के अनुमानों के मुताबिक, भारत अपने गोल्डीलॉक्स फेज में एंट्री लेता नजर आ रहा है.भारतीय रिजर्व बैंक ने भी संकेत दे दिया है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में महंगाई करीब 2 परसेंट के करीब गिर सकती है, जबकि इकोनॉमिक ग्रोथ लगभग 8 परसेंट तक मजबूत रहने की उम्मीद है. ये दोनों ही चीजें मुश्किल से ही एक साथ चलती हैं क्योंकि जब विकास की रफ्तार तेज होती है, तो महंगाई बढ़ने लगती है और जब महंगाई काबू में रहती है तो विकास आमतौर पर धीमा हो जाता है. यही बात इकोनॉमी की मौजूदा स्थिति को असामान्य बनाती है.
क्या होता है गोल्डीलॉक्स?
गोल्डीलॉक्स का नाम बच्चों की परिकथाओं से ली गई है. इस नाम की एक बच्ची एक दिन जंगल में घूमते हुए भालुओं के घर जा पहुंचती है. वहां पहुंचने पर उसे मेज पर रखीं तीन कटोरियां दिखती हैं, जिनमें दलिया भरा होता है. पहली कटोरी का दलिया गर्म होता, दूसरी कटोरी का दलिया ठंडा रहता है और तीसरी कटोरी का दलिया न ज्यादा गर्म रहता है और न ज्यादा ठंडा. गोल्डीलॉक्स को तीसरी कटोरी में परोसा गया दलिया पसंद आया, तो उसने उसे खा लिया. यही वजह है कि इकोनॉमी जब बैलेंस्ड रहती है, तो अर्थशास्त्री उसे 'गोल्डीलॉक्स फेज' कहते हैं.
बेहद नाजुक होता है यह पल
गोल्डिलॉक्स इकोनॉमी तब होती है जब आर्थिक उत्पादन बढ़ने के बावजूद महंगाई कम हो जाती है, कीमतें तेजी से बढ़ना बंद हो जाती हैं, लेकिन फैक्ट्रियां उत्पादन करती रहती हैं, कंपनियां लोगों को नौकरी पर रखती रहती हैं और कंजप्शन भी बना रहता है. यह स्थिति कम समय के लिए और अकसर बेहद नाजुक होती है. भारत के मामले में RBI के ताजा आकलन से पता चलता है कि महंगाई का दबाव उम्मीद से ज्यादा तेजी से कम हो रहा है, जबकि ग्रोथ की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. आसान शब्दों में कहें तो, चीजें बहुत ज्यादा महंगी नहीं हो रही हैं, जबकि पूरी इकॉनमी में ज्यादा सामान और सेवाओं का फ्लो बना हुआ है.
ये भी पढ़ें:
'दुनिया का राजा' बन बैठा भारत, इस मामले में चीन को पछाड़ निकल गया सबसे आगे
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















